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मैनपुरी में विदेशी पक्षियों को लुभाएगा 150 हेक्टेयर का वेटलैंड सर्किट
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करहल के गांव सहस के पास मौजूद सारस
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। सारसों के साथ विदेशी पक्षियों को भी मैनपुरी की आबोहवा खूब भाती है। इसका कारण जिले में वेटलैंड्स की अधिकता है लेकिन अनदेखी के चलते बड़ी संख्या में वेटलैंड्स समाप्त हो गए हैं। इन्हें पुनर्जीवित करने के लिए मुख्य विकास अधिकारी ने पहल की है। अब लंबी तैयारी के बाद 150 हेक्टेयर का वेटलैंड सर्किट बनाने के लिए काम शुरू हो गया है। ये वेटलैंड सर्किट विदेशी पक्षी और सारसों को अपनी ओर आकर्षित करेगा।
पूरे देश में सारसों की सबसे अधिक आबादी मैनपुरी में है। मैनपुरी में भी विशेषकर किशनी और करहल क्षेत्र में इनकी संख्या सर्वाधिक है। इसके पीछे कारण यहां वेटलैंड्स की अधिकता होना है। किशनी क्षेत्र में स्थित समान पक्षी विहार की भी इसमें अहम भूमिका है। 526 हेक्टेयर में फैले समान पक्षी विहार में सारसों के साथ ही विदेशी परिंदे भी सर्दियों में प्रवास करने आते हैं। इसके आसपास के क्षेत्र में भी वेटलैंड्स की अधिकता के कारण बड़ा क्षेत्र पक्षियों से गुलजार रहता था लेकिन विगत दो दशकों में कई वेटलैंड्स अनदेखी की भेंट चढ़ गए।
इससे धीर-धीरे पक्षी भी एक निश्चित क्षेत्र में सिमटते गए। अब बंद हो चुके वेटलैंड्स का जीर्णोद्धार कर एक वेटलैंड सर्किट बनाया जाएगा। इसके लिए मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया ने पहल की है। उन्होंने किशनी और करहल क्षेत्र में बंद वेटलैंड्स का निरीक्षण कर एक प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसमें लगभग 150 हेक्टेयर क्षेत्रफल के वेटलैंड्स का जीर्णोद्धार कर सर्किट बनाया जाएगा। इनके पुनर्जीवन से सारसों और विदेशी पक्षियों की आवक बढ़ेगी। इस पूरे कार्य को मनरेगा के तहत अंजाम दिया जाएगा। इसके लिए गांवों में काम शुरू भी हो गया है। सीडीओ खुद इसकी मॉनीटरिंग कर रही हैं।
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इन क्षेत्रों में होगा काम
वेटलैंड्स सर्किट बनाने के लिए आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के किनारे के वेटलैंड्स पर काम कराया जाएगा। इसमें करहल के गांव सौज में सबसे बड़े 108 हेक्टेयर के तालाब की खोदाई कराई जाएगी। इसके साथ ही सहन, सहस, नगला झड़ू, कुदैया, हसेल, नगला सारंग, कुर्रा आदि क्षेत्रों के वेटलैंड्स में भी खोदाई कराई जाएगी। ये खोदाई मनरेगा के माध्यम से कराई जाएगी। इससे श्रमिकों को भी रोजगार मिलेगा।
इस वेटलैंड को पसंद करते हैं सारस व अन्य पक्षी
वेटलैंड को सारसों और विदेशी पक्षियों द्वारा खूब पसंद किया जाता है। वेटलैंड में पानी आसानी से उपलब्ध होता है। इसके अलावा नम भूमि होने के चलते कीट आदि भी रहते हैं। इससे पक्षियों को भोजन मिल जाता है। मैनपुरी के वेटलैंड्स इसलिए भी विशेष हैं क्योंकि ये नहर और रजबहों से जुड़े हैं। इससे यहां गर्मियों में भी पानी रहता है।
कहां कितने क्षेत्रफल में होगा काम
सौज-108 हेक्टेयर
सहन-30 हेक्टेयर
सहस-3 हेक्टेयर
हसेल-4 हेक्टेयर
नगला झड़ू- 1 हेक्टेयर
कुदैया-2 हेक्टेयर
न. सारंग-2 हेक्टेयर
वर्जन
सारसों की एक बड़ी आबादी मैनपुरी क्षेत्र में है। इसका एक बड़ा कारण वेटलैंड्स हैं। इसके चलते वेटलैंड सर्किट बनाने का काम शुरू किया गया है। मनरेगा से काम शुरू हो गया है। जल्द से जल्द कार्य पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है।
ईशा प्रिया, मुख्य विकास अधिकारी।
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पूरे देश में सारसों की सबसे अधिक आबादी मैनपुरी में है। मैनपुरी में भी विशेषकर किशनी और करहल क्षेत्र में इनकी संख्या सर्वाधिक है। इसके पीछे कारण यहां वेटलैंड्स की अधिकता होना है। किशनी क्षेत्र में स्थित समान पक्षी विहार की भी इसमें अहम भूमिका है। 526 हेक्टेयर में फैले समान पक्षी विहार में सारसों के साथ ही विदेशी परिंदे भी सर्दियों में प्रवास करने आते हैं। इसके आसपास के क्षेत्र में भी वेटलैंड्स की अधिकता के कारण बड़ा क्षेत्र पक्षियों से गुलजार रहता था लेकिन विगत दो दशकों में कई वेटलैंड्स अनदेखी की भेंट चढ़ गए।
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इससे धीर-धीरे पक्षी भी एक निश्चित क्षेत्र में सिमटते गए। अब बंद हो चुके वेटलैंड्स का जीर्णोद्धार कर एक वेटलैंड सर्किट बनाया जाएगा। इसके लिए मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया ने पहल की है। उन्होंने किशनी और करहल क्षेत्र में बंद वेटलैंड्स का निरीक्षण कर एक प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसमें लगभग 150 हेक्टेयर क्षेत्रफल के वेटलैंड्स का जीर्णोद्धार कर सर्किट बनाया जाएगा। इनके पुनर्जीवन से सारसों और विदेशी पक्षियों की आवक बढ़ेगी। इस पूरे कार्य को मनरेगा के तहत अंजाम दिया जाएगा। इसके लिए गांवों में काम शुरू भी हो गया है। सीडीओ खुद इसकी मॉनीटरिंग कर रही हैं।
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इन क्षेत्रों में होगा काम
वेटलैंड्स सर्किट बनाने के लिए आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के किनारे के वेटलैंड्स पर काम कराया जाएगा। इसमें करहल के गांव सौज में सबसे बड़े 108 हेक्टेयर के तालाब की खोदाई कराई जाएगी। इसके साथ ही सहन, सहस, नगला झड़ू, कुदैया, हसेल, नगला सारंग, कुर्रा आदि क्षेत्रों के वेटलैंड्स में भी खोदाई कराई जाएगी। ये खोदाई मनरेगा के माध्यम से कराई जाएगी। इससे श्रमिकों को भी रोजगार मिलेगा।
इस वेटलैंड को पसंद करते हैं सारस व अन्य पक्षी
वेटलैंड को सारसों और विदेशी पक्षियों द्वारा खूब पसंद किया जाता है। वेटलैंड में पानी आसानी से उपलब्ध होता है। इसके अलावा नम भूमि होने के चलते कीट आदि भी रहते हैं। इससे पक्षियों को भोजन मिल जाता है। मैनपुरी के वेटलैंड्स इसलिए भी विशेष हैं क्योंकि ये नहर और रजबहों से जुड़े हैं। इससे यहां गर्मियों में भी पानी रहता है।
कहां कितने क्षेत्रफल में होगा काम
सौज-108 हेक्टेयर
सहन-30 हेक्टेयर
सहस-3 हेक्टेयर
हसेल-4 हेक्टेयर
नगला झड़ू- 1 हेक्टेयर
कुदैया-2 हेक्टेयर
न. सारंग-2 हेक्टेयर
वर्जन
सारसों की एक बड़ी आबादी मैनपुरी क्षेत्र में है। इसका एक बड़ा कारण वेटलैंड्स हैं। इसके चलते वेटलैंड सर्किट बनाने का काम शुरू किया गया है। मनरेगा से काम शुरू हो गया है। जल्द से जल्द कार्य पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है।
ईशा प्रिया, मुख्य विकास अधिकारी।