फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Bhog will be offered to ancestors in Tirthangri today, will be offered for salvation

पितृपक्ष- तीर्थंनगरी में आज पितरों को अर्पित होंगे भोग, मोक्ष के लिए होगा तर्पण

Fri, 09 Sep 2022 11:24 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 09 Sep 2022 11:24 PM IST
विज्ञापन
Bhog will be offered to ancestors in Tirthangri today, will be offered for salvation
सोरोंजी। भगवान वराह की निर्वाण स्थली सूकरक्षेत्र में आज से अपने पितरों का तर्पण करने के लिए श्रद्धालु पहुंचेंगे। श्रद्घालु हरि की पौड़ी एवं गंगा घाटों पर स्नान करके पितरो की मोक्ष की कामना के लिए तर्पण करेंगे एवं भोग अर्पित करेंगे। राजस्थान, एमपी, गुजरात, दिल्ली सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग दस हजार श्रद्धालु अपने पितरों की श्राद्ध पूजा करने के लिए पहुंचेंगे। तीर्थंनगरी में भी श्राद्ध पूजा के लिए पुरोहितों ने तैयारियां पूर्ण कर लीं हैं। हरि की पौड़ी के वराह घाट, लक्ष्मण जी वाले घाट, लाल घाट, बालाजी घाट, भागीरथी गंगा मंदिर घाट पर, बरी वाले घाट पर श्राद्ध पूजा के लिए श्रद्धालु पहुंचेंगे। 25 सितंबर पितृ विसर्जन अमावस्या तक प्रतिदिन तिथियों के अनुसार श्रद्धालु अनवरत अपने पितरों की श्राद्ध पूजा व तर्पण के लिए पहुंचेंगे।
विज्ञापन

तीन पीढ़ियों तक के पूर्वजों का तर्पण किया जाता
धर्म शास्त्रों में उल्लेख है कि श्रावण मास की पूर्णिमा से ही पितृ मृत्यु लोक में आ जाते हैं तथा कुश पर विराजमान हो जाते हैं पितृ पक्ष में हम अपने पितरों के नाम पर जो भी दान निकालते हैं, उसे वह सूक्ष्म रूप में आकर ग्रहण करते हैं, श्राद्ध पक्ष में पूर्व की तीन पीढ़ियों तक के पूर्वजों का तर्पण किया जाता है, आत्माओं की शांति के लिए एक वर्ष बाद सोरोंजी सूकर क्षेत्र में तर्पण कर्म व पिंडदान तीर्थ पुरोहितों द्वारा वराह कुंड गंगा जी हरिपदी में कराया जाता है। -पं. राहुल वशिष्ठ, ज्योतिषाचार्य
विज्ञापन

काले तिल, जौ, कुशा के साथ जल से होता है तर्पण- पितरों का ध्यान कर उनको जल चढ़ाना चाहिए , जल के पात्र में काले तिल व जौ डालकर कुशा के साथ जल में तर्पण करना होता है, निर्धन ब्राह्मणों को दान देना चाहिए, कन्या को भी दान देना हितकर रहता है, आमतौर पर श्राद्ध कर्म परिवार का मुखिया या बड़ा ही करता है, लेकिन महिलाएं भी श्राद्ध कर सकती हैं, गरूण पुराण में श्राद्ध कर्म के विषय में विस्तार से उल्लेख है, सही उत्तराधिकारी न होने पर दामाद और नाती भी इस कार्य को कर सकता है। पं. बृजकुमार गौड़,आचार्य
विज्ञापन
विज्ञापन

पितृपक्ष के दौरान घर को साफ सुथरा रखना चाहिए
- हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है। पितरों की मुक्ति के लिए विधि विधान से श्राद्ध कर्म किया जाता है। 16 दिनों तक चलने वाले पितृपक्ष में पितरों को तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान समेत कई अनुष्ठान किए जाते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में ऐसी कुछ चीजें हैं जिनका सेवन नहीं करना चाहिए। पितृपक्ष के दौरान घर को साफ सुथरा रखना चाहिए। इस दौरान घर के किचन में बासी या झूठा खाना नहीं रखना चाहिए। रसोई में गंदा बर्तन रखने से पितृ नाराज हो जाते हैं। पं.दिलीप चौधरी, अनुष्ठान विशेषज्ञ

पितृ हमारे पूर्वज हैं जिनका ऋण हमारे ऊपर है
हर रोज दुर्गा सप्तशती या सुंदर कांड का पाठ करना चाहिए। इसके पाठ करने से न केवल पितरों को शांति मिलती है बल्कि प्रभावित व्यक्ति के जीवन की बाधाएं भी दूर होती हैं। प्रतिदिन घर में गीता का पाठ करें। ऐसा करने से आपको सभी परेशानियों से मुक्ति प्राप्त होगी। पितरों को लेकर बहुत से लोगों में हमेशा जिज्ञासा बनी रहती है। जैसे वे कौन हैं, वे क्यों नाराज होते हैं, उनकी नाराजगी से क्या होता है। पितृ हमारे पूर्वज हैं जिनका ऋण हमारे ऊपर है।
-पं. प्रशांत कोठेवार
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed