वृंदावन कुंभ में महंताई की परंपरा शुरू, राजस्थान के भगवान दास बने पहले महामंडलेश्वर
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भगवान श्रीकृष्ण की जन्म और लीला भूमि पर आयोजित वैष्णव कुंभ में अब महामंडलेश्वर और महंत की पदवी देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वृंदावन कुंभ बैठक में गुरुवार को तीनों अनी और अखाड़ों के महंत और संतों ने महंत भगवानदास को महामंडलेश्वर की पदवी प्रदान की। वृंदावन कुंभ में यह पहली महंताई है।
वृंदावन में यमुना तट पर चल रही वैष्णव कुंभ बैठक को गुरुवार को 17 दिन हो गए। इस बीच एक शाही स्नान भी हो चुका है। हालांकि महामंडलेश्वर और महंत की पदवी पर महंताई की प्रक्रिया का शुभारंभ गुरुवार को निर्मोही अनी अखाड़े में हुआ।
शोभायात्रा निकली
संत परंपरा में बूंदी (राजस्थान) के महंत भगवान दास को तीनों अनी और अखाड़ों के महंत और संतों की मौजूदगी में महामंडलेश्वर की पदवी प्रदान की गई। महामंडलेश्वर बनने से पूर्व सभी अखाड़ों के निशान और चिह्नों की पूजा की गई। बैंडबाजे के बीच शोभायात्रा निकाली गई। शुभारंभ पर हनुमानजी की पूजा की गई।
इस अवसर पर अखिल भारतीय निर्मोही अनी अखाड़ा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत राजेंद्र दास, दिगंबर अनी अखाड़ा के श्रीकृष्ण दास, निर्वाणी अनी अखाड़ा के महंत धर्मदास, गोवर्धन श्रीराधा दामोदर सेवाश्रम के महंत महामंडलेश्वर डॉ. सांवरिया बाबा मौजूद रहे।
महामंडलेश्वर बने भगवान दास महाराज ने बताया कि वह गोसेवा और मानव सेवा के प्रकल्पों के साथ आगे बढ़ेंगे। उनके महामंडलेश्वर बनने पर महंत बिजेंद्र दास, संतदास चित्रकूट वाले, राष्ट्रीय सचिव नरेंद्र दास महाराज, अवधेश पांडेय, बलराम शर्मा, राधेदास, आशीष, देवनाथ दास, रामकुमार दास, अर्जुनदास, बलकेश्वर हनुमान मंदिर के अशोक दासआदि मौजूद रहे।