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अंधआस्था: बेटी को मार ही डालते वे
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Tue, 29 Sep 2015 01:52 AM IST
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एक ओर ‘डिजिटल इंडिया’ का सपना है, तो दूसरी तरफ अंधविश्वास के मेले भी कम नहीं। ऐसा ही एक मेला सोमवार को पिनाहट के दलित बहुल गांव अमरसिंह पुरा में लगा। 15 साल की नीरू को देवी रूप बताकर सुबह पांच बजे जलसमाधि देने की तैयारी थी। ऐन वक्त पर पुलिस के आने से उसकी जान बची। इसी अंधविश्वास के अभिशाप में वह आठ सालों से एक छोटे से मंदिर का कैदी बनी हुई है।
वर्ष 2002 में आई फिल्म प्रथा की पटकथा अमरसिंह पुर में रीयल लाइफ में उतारी जा रही है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय से सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक हरी सिंह (64) की सात बेटियों और दो बेटों में पांचवें नंबर की नीरू को सोमवार सुबह पांच बजे गंगाजल और दूध से नहलाया गया। लाल जोड़ा पहनाकर शृंगार किया गया। पूजा-अर्चना के बाद गांव के तालाब में उसे जल समाधि देने की तैयारी हो ही रही थी कि सूचना पाकर पिनाहट थाने की पुलिस आ गई।
पुलिस ने नीरू को फिर से मंदिर पहुंचवाया। हरी सिंह का कहना है कि सात दिन पहले नीरू ने उन्हें बताया कि देवी ने सपने में आकर उससे ऐसा करने को कहा है। उसने 12 साल पहले बारिश के लिए गांव की चार लड़कियों के साथ ‘तप’ किया था। दो साल बाद फिर से ‘तप’ पर बैठी। बैठे-बैठे पैर खराब हो जाने से वह तब से खड़ी नहीं पाती। उसके कहने पर पांच साल पहले गांववालों की मदद से मंदिर बनवाया गया। वह वहीं देवी की मूर्ति के साथ ही रहती है।
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नोटों का ढेर लगा
नीरू के जलसमाधि का पता चलने पर आसपास के गांवों से हजारों लोग दर्शन करने पहुंचे। उन्होंने चढ़ावे से मंदिर में नोटों का ढेर लग गया। बाहर प्रसाद बेचने के ठेले भी लग गए।
पुलिस ने दिया नोटिस
पुलिस ने हरी सिंह को नोटिस भेजा है कि क्यों न उनके खिलाफ अंधविश्वास में बेटी का बचपन छीनने और उसे जलसमाधि (आत्महत्या) के लिए उकसाने का केस दर्ज किया जाए?
चमत्कार की आस में अंधविश्वास का मेला
पिनाहट। गांव अमरसिंह पुरा स्थित मंदिर में देवी बनाकर बैठाई गई नीरू भूखी-प्यासी और गुमसुम है। बाहर उसके पिता हरी सिंह देवी की महिमा का बखान कर रहे हैं। आंखों पर अंधविश्वास की पट्टी बांधे दूर-दूर से परेशानियां लेकर आए लोग देवीकृपा पाने के उपाय पूछ रहे हैं। किसी को बेटा चाहिए तो किसी को नौकरी।
विप्रावली गांव से महिलाओं की टोली नंगे पांव आई है। नया बांस से बुजुर्ग ट्रैक्टर ट्रॉली में आए हैं। पडुआ पुरा और देवगढ़ वाले सुबह से डेरा डाले हैं। सब को मैया से बात करनी है। पर मैया तो मौन हैं। नीरू कुछ बोलती नहीं। सुबह जब जलसमाधि से पुलिस ने रोका तो हरी सिंह ने बताया कि शाम को मैया बोलेगी। बस इसी इंतजार में हजारों लोग डटे रहे। सुबह से दोपहर हो गई। दोपहर से शाम। ‘आज मैया बोली तो गांव खुशहाल हो जाएगो, टैम पे बारिश होएगी, कोई बीमार न पड़ैगो, कोई बेऔलाद न रहैगो...।’ अब शाम के पांच बज गए हैं। दस साल से खामोश बताई जा रही नीरू ने मीडिया के सवालों का जवाब देने के लिए मुंह खोल दिया है।
बस फिर क्या है, गूूूंज उठे जयकारे। एक बोला देवी मैया की जय, दूसरे ने दोहराया और शुरू हो गया भजन कीर्तन। बीच का पुरा गांव से आए पांच-छह युवा कह रहे हैं, बोलो नीरू मैया की जय और महिलाएं ताली बजा रही हैं। भीड़ बढ़ी है, तो मेला लग गया है। चाट वाले भी आ गए हैं, प्रसाद के ठेले भी लग गए हैं, गुब्बारे भी बिकने लगे हैं।
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वर्ष 2002 में आई फिल्म प्रथा की पटकथा अमरसिंह पुर में रीयल लाइफ में उतारी जा रही है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय से सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक हरी सिंह (64) की सात बेटियों और दो बेटों में पांचवें नंबर की नीरू को सोमवार सुबह पांच बजे गंगाजल और दूध से नहलाया गया। लाल जोड़ा पहनाकर शृंगार किया गया। पूजा-अर्चना के बाद गांव के तालाब में उसे जल समाधि देने की तैयारी हो ही रही थी कि सूचना पाकर पिनाहट थाने की पुलिस आ गई।
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पुलिस ने नीरू को फिर से मंदिर पहुंचवाया। हरी सिंह का कहना है कि सात दिन पहले नीरू ने उन्हें बताया कि देवी ने सपने में आकर उससे ऐसा करने को कहा है। उसने 12 साल पहले बारिश के लिए गांव की चार लड़कियों के साथ ‘तप’ किया था। दो साल बाद फिर से ‘तप’ पर बैठी। बैठे-बैठे पैर खराब हो जाने से वह तब से खड़ी नहीं पाती। उसके कहने पर पांच साल पहले गांववालों की मदद से मंदिर बनवाया गया। वह वहीं देवी की मूर्ति के साथ ही रहती है।
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नोटों का ढेर लगा
नीरू के जलसमाधि का पता चलने पर आसपास के गांवों से हजारों लोग दर्शन करने पहुंचे। उन्होंने चढ़ावे से मंदिर में नोटों का ढेर लग गया। बाहर प्रसाद बेचने के ठेले भी लग गए।
पुलिस ने दिया नोटिस
पुलिस ने हरी सिंह को नोटिस भेजा है कि क्यों न उनके खिलाफ अंधविश्वास में बेटी का बचपन छीनने और उसे जलसमाधि (आत्महत्या) के लिए उकसाने का केस दर्ज किया जाए?
चमत्कार की आस में अंधविश्वास का मेला
पिनाहट। गांव अमरसिंह पुरा स्थित मंदिर में देवी बनाकर बैठाई गई नीरू भूखी-प्यासी और गुमसुम है। बाहर उसके पिता हरी सिंह देवी की महिमा का बखान कर रहे हैं। आंखों पर अंधविश्वास की पट्टी बांधे दूर-दूर से परेशानियां लेकर आए लोग देवीकृपा पाने के उपाय पूछ रहे हैं। किसी को बेटा चाहिए तो किसी को नौकरी।
विप्रावली गांव से महिलाओं की टोली नंगे पांव आई है। नया बांस से बुजुर्ग ट्रैक्टर ट्रॉली में आए हैं। पडुआ पुरा और देवगढ़ वाले सुबह से डेरा डाले हैं। सब को मैया से बात करनी है। पर मैया तो मौन हैं। नीरू कुछ बोलती नहीं। सुबह जब जलसमाधि से पुलिस ने रोका तो हरी सिंह ने बताया कि शाम को मैया बोलेगी। बस इसी इंतजार में हजारों लोग डटे रहे। सुबह से दोपहर हो गई। दोपहर से शाम। ‘आज मैया बोली तो गांव खुशहाल हो जाएगो, टैम पे बारिश होएगी, कोई बीमार न पड़ैगो, कोई बेऔलाद न रहैगो...।’ अब शाम के पांच बज गए हैं। दस साल से खामोश बताई जा रही नीरू ने मीडिया के सवालों का जवाब देने के लिए मुंह खोल दिया है।
बस फिर क्या है, गूूूंज उठे जयकारे। एक बोला देवी मैया की जय, दूसरे ने दोहराया और शुरू हो गया भजन कीर्तन। बीच का पुरा गांव से आए पांच-छह युवा कह रहे हैं, बोलो नीरू मैया की जय और महिलाएं ताली बजा रही हैं। भीड़ बढ़ी है, तो मेला लग गया है। चाट वाले भी आ गए हैं, प्रसाद के ठेले भी लग गए हैं, गुब्बारे भी बिकने लगे हैं।