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कोरोना का असर: ताजनगरी में फूलों की बेकदरी, सड़क पर फेंके जा रहे बेला और गेंदा के फूल

Sat, 22 May 2021 12:05 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 22 May 2021 12:05 AM IST
सार

धर्मस्थलों के द्वार के बंद हैं, शादियों में भव्यता कम हुई है। इसका सीधा असर ताजनगरी में फूलों के कारोबार पर पड़ा है। 

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Bella and marigold flowers being thrown on the road in agra
फूल मंडी में पड़े गेंदा के फूल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में फूलों की बेकदरी हो रही है...बेला, चमेली, गुलाब और गेंदा के फूल सड़कों पर फेंके जा रहे हैं। प्रति महीने करीब छह करोड़ रुपये का फूलों का कारोबार पिछले दो माह से महज 10 फीसदी ही रह गया है। फूल व्यवसायियों का बुरा हाल है। किसानों की लागत नहीं निकल रही तो उसने भी मंडियों में फूल को लाना कम कर दिया है। वह खेतों में ही सड़ रहे हैं। 

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ताजनगरी में फूलों की खेती मुगलकाल से की जा रही है। ताजगंज से लेकर मलपुरा तक गेंदा, बेला, चमेली, गुलाब की खेती तो होती ही है, विदेशी फूलों का रकबा भी बढ़ा है। रकाबगंज की फूलों की मंडी में आगरा के अलावा दिल्ली, पुणे, नासिक और थाईलैंड से भी फूल मंगाए जाते हैं। आगरा का बेला फूल का गजरा प्रसिद्ध है, जिसकी डिमांड पूरे देश में रहती है। 
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20 कुंतल तक गेंदा फेंक रहे
फूल मंडी में गेंदा फूल सबसे ज्यादा करीब 50 कुंतल तक आता है। विगत समय में आवक कम होकर 30 कुंतल हुई है। इसकी खपत अब भी है मगर महज 9-10 कुंतल तक ही। ऐसे में रोजाना यह फूल फेंका जा रहा है। रमजान में कुछ दिन फूल बिके भी थे लेकिन अब वह मांग भी खत्म हो गई है।

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विदेशी फूल के खरीदार भी नहीं
आढ़ती सुनहरी लाल ने बताया कि फूल मंडी में विदेशी फूलों की खासी डिमांड रहती थी। डेकोरेशन से लेकर होटलों में होने वाली शादियों के लिए आर्डर बुक कराए जाते थे, लेकिन दो माह से एक भी आर्डर नहीं आया है। फुटकर में थोड़े बहुत फूल बेचे जा रहे हैं। पांच करोड़ रुपये के कारोबार का दस फीसदी ही बचा है।

30 क्विंटल तक फूल फेंक रहे
रकाबगंज फूल मंडी के अध्यक्ष नवीन पाराशर ने बताया कि रकाबगंज फूल मंडी में आवक घटी है। पूर्व के 80-100 क्विंटल की जगह 50 से 60 क्विंटल फूल बिक्री के लिए आ रहे हैं। मंदिरों में फूल बंगलों का यह सीजन है। इसी तरह सहालग का भी सीजन है, लेकिन दोनों ही जगह से फूलों की डिमांड बंद है। फूलों से खाद बनाने का काम भी बंद पड़ा है। ऐसे में रोजाना करीब 30 क्विंटल तक फूल यूं ही फेंके जा रहे हैं। 

गुलदस्ते का कारोबार ठप 
भगवान टाकीज निवासी सुमित कुमार ने बताया कि भगवान टाकीज व मदिया कटरा में सबसे ज्यादा फूलों के गुलदस्ते बिकते हैं। इन दिनों गुलदस्ते और फूल दोनों ही नहीं बिक रहे हैं। यदाकदा शादियों में विदाई कराने वाली कार को सजाने के लिए लोग लेकर आते हैं। 80 लाख रुपये प्रति माह के कारोबार में से महज 10 फीसदी ही काम बचा है। 

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