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यहां के भिखारियों की इनकम जानकर रह जाएंगे दंग, हर वर्ष कमाते हैं इतना

Mon, 19 Feb 2018 08:16 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला मथुरा Updated Mon, 19 Feb 2018 08:16 AM IST
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beggars earn lakhs of rupees annually
demo pic - फोटो : अमर उजाला
धर्मनगरी मथुरा में भीख मांगते-मांगते धनवान बन गए हैं कई भिखारी। सालाना इनकम लाखों में पहुंच गई है। शनिवार और रविवार सबसे ज्यादा कमाई वाले दिन हैं। इन दोनों दिनों के लिए बड़े भिखारी कमीशन पर कुछ अपने लोग भी बैठाने लगे हैं। 
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भिखारियों की भीड़ में अब नौजवान ज्यादा शामिल होने लगे हैं। पश्चिम बंगाल के आनंद तीन साल से वृंदावन में भीख मांग रहा है। उसका कहना है कि शनिवार और रविवार को तो दो हजार तक रुपये मिल जाते हैं। 
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वह भी महीने भर में 25 से 30 हजार की इनकम मानते हैं। मध्य प्रदेश की कौशल्या भी दिन में तीन सौ से चार सौ रुपये तक कमा लेती हैं। शनिवार और रविवार को यही इनकम बढ़कर दो हजार तक पहुंच जाती है। 
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कौशल्या किराए का मकान लेकर रहती है। अपने गांव भी हर महीने दस से पंद्रह हजार रुपये भेज देती है। इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो चल रही है जिसमें भीख मांगने वाला खुद को बीटेक इंजीनियर बता रहा है। 

वह छह महीने से वृंदावन में भीख मांग रहा है। उसका कहना है कि वह पैंतीस से चालीस हजार रुपये महीने भर में कमा लेता है। कइयों ने तो भीख मांगकर ई रिक्शा खरीद लिया है।

ब्रज की होली देखने के लिए देश भर से तो लोग आते ही हैं विदेशों से भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। इस अवसर पर लोग जमकर दान भी करते हैं। इस मौके पर धर्मनगरी में भिखारियों की संख्या भी बढ़ जाती है। 

दिल्ली, मुंबई, जयपुर तक के भिखारी यहां पहुंच जाते हैं। भिखारियों की बढ़ती भीड़ से परेशान व्यापारियों ने पुलिस के साथ अभियान भी चलाया था।

किराए पर मकान लेकर रह रहे

यदि वृंदावन की बात की जाए तो करीब दस हजार भिखारी तो होंगे ही। यह बाकायदा किराए का मकान लेकर रह रहे हैं। कुछ ने धर्मशालाओं में कमरे किराए पर ले रखे हैं। दो से तीन हजार रुपये महीने का किराया दे रहे हैं। 

पूरे परिवार का खर्च इसी धंधे से इनका चलता है। इनमें ज्यादातर मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के हैं। इनमें कई तो ऐसे हैं जो घूमने के लिए आए थे, लेकिन बाद में यहीं के होकर रह गए हैं। 

इनमें एक बड़ी संख्या महिलाओं की भी है। इनमें से कुछ ने तो मजबूरी में भीख मांगना शुरू किया था जबकि तमाम ने बढ़ती आमदनी को देखकर इसमें हाथ आजमाना शुरू कर दिया।

भिखारी के कमरे से मिले थे नोटों से भरे बोरे

वृंदावन के ज्ञान गूदड़ी क्षेत्र में वर्ष 2008 में एक भिखारी अपने कमरे में मृत में मिला था। जब पुलिस ने वहां तलाशी ली तो 100 और 50 के नोट बोरी में भरे मिले थे। 

अब इससे ही उसकी आमदनी का अंदाजा लगाया जा सकता है। एक संदूक भरा हुआ था जिसमें सिक्के भरे हुए थे। रुपये और सिक्के मालखाने में जमा करा दिए गए थे। 

लोगों ने पुलिस को बताया था कि वह सुबह भीख मांगने निकलता था और शाम को ही वापस लौटता था। उसके पास उसके परिवार के लोगों का भी आनाजाना लगा रहता था।
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