{"_id":"594948ec4f1c1b7b198b468c","slug":"bear-conservation-center-in-agra-may-be-closed","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"...तो आगरा के कीठम में अब देखने को नहीं मिलेंगे भालू ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
...तो आगरा के कीठम में अब देखने को नहीं मिलेंगे भालू
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Tue, 20 Jun 2017 09:40 PM IST
विज्ञापन
bear
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कीठम के भालू संरक्षण केंद्र की मान्यता पर तलवार लटक गई है। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की टीम के निरीक्षण में भालू संरक्षण केंद्र में कई खामियां पाई गई थीं। 16 पेज की इस रिपोर्ट में इस केंद्र के संचालक वाइल्ड लाइफ एसओएस को व्यवस्थाएं सुधारने की चेतावनी दी गई थी। अब सेंट्रल जू अथारिटी की टीम गुरुवार को फिर से निरीक्षण करने आ रही है।
यह टीम देखेगी कि तय वक्त में उन खामियों को अब तक दूर किया गया या नहीं। दरअसल, भालू संरक्षण केंद्र में बरती जा रही लापरवाही पर पर्यावरण मंत्रालय और सेंट्रल जू अथारिटी के तीन वरिष्ठ अधिकारियों की टेढ़ी नजर है। पिछली बार सेंटर की खामियों को उजागर करने वाले अधिकारी इस बार निरीक्षण की टीम में नहीं है।
कीठम झील के पास 17 हेक्टेयर जमीन पर भालू संरक्षण केंद्र का संचालन एनजीओ वाइल्ड लाइफ एसओएस कर रहा है। हाल में ही वन्यजीव अधिकारियों की टीम ने सेंटर का निरीक्षण कर पाया था कि मानक के मुताबिक भालू संरक्षण केंद्र में काम नहीं हो रहा। भालुओं के साथ अन्य जानवरों को रखा गया है, जिससे एक दूसरे को इन्फेक्शन का खतरा है। हिरन और सीही भी साथ रखे गए हैं। टीम ने केंद्र के अंदर बने स्टाफ रूम, गार्ड रूम हटाने के साथ हरियाली बढ़ाने के निर्देश दिए थे।
विज्ञापन
भालुओं के लिए अलग-अलग कमरे बनाने को कहा था, जबकि यहां 20×12 के हॉल में एक साथ चार-चार भालू रहते हैं। कोरोंटाइन न होने पर टीम ने अपनी रिपोर्ट में नाराजगी जताई थी। वाइल्ड लाइफ एसओएस के सेंटर प्रभारी डा. बैजूराज के मुताबिक, टीम ने जो संस्तुति की थीं, उनके मुताबिक बदलाव किए गए हैं। टीम अब आ रही है तो सेंटर की व्यवस्थाएं देख लेगी। हमने सरकार के आदेश के मुताबिक ही जानवरों को शिफ्ट किया है।
विज्ञापन
यह टीम देखेगी कि तय वक्त में उन खामियों को अब तक दूर किया गया या नहीं। दरअसल, भालू संरक्षण केंद्र में बरती जा रही लापरवाही पर पर्यावरण मंत्रालय और सेंट्रल जू अथारिटी के तीन वरिष्ठ अधिकारियों की टेढ़ी नजर है। पिछली बार सेंटर की खामियों को उजागर करने वाले अधिकारी इस बार निरीक्षण की टीम में नहीं है।
विज्ञापन
कीठम झील के पास 17 हेक्टेयर जमीन पर भालू संरक्षण केंद्र का संचालन एनजीओ वाइल्ड लाइफ एसओएस कर रहा है। हाल में ही वन्यजीव अधिकारियों की टीम ने सेंटर का निरीक्षण कर पाया था कि मानक के मुताबिक भालू संरक्षण केंद्र में काम नहीं हो रहा। भालुओं के साथ अन्य जानवरों को रखा गया है, जिससे एक दूसरे को इन्फेक्शन का खतरा है। हिरन और सीही भी साथ रखे गए हैं। टीम ने केंद्र के अंदर बने स्टाफ रूम, गार्ड रूम हटाने के साथ हरियाली बढ़ाने के निर्देश दिए थे।
विज्ञापन
भालुओं के लिए अलग-अलग कमरे बनाने को कहा था, जबकि यहां 20×12 के हॉल में एक साथ चार-चार भालू रहते हैं। कोरोंटाइन न होने पर टीम ने अपनी रिपोर्ट में नाराजगी जताई थी। वाइल्ड लाइफ एसओएस के सेंटर प्रभारी डा. बैजूराज के मुताबिक, टीम ने जो संस्तुति की थीं, उनके मुताबिक बदलाव किए गए हैं। टीम अब आ रही है तो सेंटर की व्यवस्थाएं देख लेगी। हमने सरकार के आदेश के मुताबिक ही जानवरों को शिफ्ट किया है।
390 में से 195 भालू मर गए
Bear
कीठम के भालू संरक्षण केंद्र में फतेहपुर सीकरी के पास कौरई गांव के अलावा देश भर से कलंदरों के पास से छुड़ाए गए भालुओं को रखा गया है। सेंटर के निर्माण के बाद से अब तक 390 भालू यहां लाए गए हैं, जिनमें से अब तक आधे यानी 195 की मौत हो चुकी है। हर महीने चार से पांच भालुओं की मौत होती है। भालू संरक्षण केंद्र का प्रबंधन संभाल रहे एनजीओ वाइल्ड लाइफ एसओएस के मुताबिक ये मौत प्राकृतिक हैं, लेकिन वन्य जीव प्रेमी लगातार भालुओं की मौत पर सवाल उठाते रहे हैं।