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Agra News: बैसाख शुक्ल द्वादशी को शूकरक्षेत्र में स्नान का है विशेष पौराणिक महत्व
Sun, 19 May 2024 10:56 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Sun, 19 May 2024 10:56 PM IST
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सोरोंजी। पौराणिक तीर्थनगरी सोरोंजी में गंगा स्नान, धार्मिक अनुष्ठान, कल्पवास, पंचकोसी परिक्रमा आदि धर्म कर्म करने से अनंत गुना फल प्राप्त होता है। यह वराह पुराण में भी वर्णित है। इसमें भी बैसाख द्वादशी मास का शूकरक्षेत्र में स्नान का विशेष महत्व है। इसी महात्म्य के कारण इस दौरान देशभर से हजारों श्रद्धालु तीर्थनगरी आएंगे।
सोमवार को बैसाख द्वादशी है। इस दिन गंगा स्नान के लिए वराह घाट पर पालिका प्रशासन द्वारा तैयारियां पूरी कर ली गई है। विशेष सफाई, वैकल्पिक प्रकाश व्यवस्था, ठंडे पानी के लिए वाटर कूलर आदि के इंतजाम किए गए हैं। विद्वान आचार्य पं. राहुल वाशिष्ठ ने बताया कि शूकरक्षेत्र सोरोंजी पृथ्वी का सबसे प्राचीन तीर्थस्थल है।
कहा कि जो मनुष्य संपूर्ण बैसाख स्नान करने में असमर्थ हों, वह बैसाख शुक्ल द्वादशी को सूकरक्षेत्र सोरों के चक्रतीर्थ में स्नान कर लें तो उन्हें संपूर्ण बैसाख स्नान का फल प्राप्त होता है। इस दिन दक्षिणा सहित अन्न दान करने से करोड़ों वेदपाठी ब्राह्मणों को तृप्तिकर भोजन कराने के बराबर फल प्राप्त होता है।
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सोमवार को बैसाख द्वादशी है। इस दिन गंगा स्नान के लिए वराह घाट पर पालिका प्रशासन द्वारा तैयारियां पूरी कर ली गई है। विशेष सफाई, वैकल्पिक प्रकाश व्यवस्था, ठंडे पानी के लिए वाटर कूलर आदि के इंतजाम किए गए हैं। विद्वान आचार्य पं. राहुल वाशिष्ठ ने बताया कि शूकरक्षेत्र सोरोंजी पृथ्वी का सबसे प्राचीन तीर्थस्थल है।
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कहा कि जो मनुष्य संपूर्ण बैसाख स्नान करने में असमर्थ हों, वह बैसाख शुक्ल द्वादशी को सूकरक्षेत्र सोरों के चक्रतीर्थ में स्नान कर लें तो उन्हें संपूर्ण बैसाख स्नान का फल प्राप्त होता है। इस दिन दक्षिणा सहित अन्न दान करने से करोड़ों वेदपाठी ब्राह्मणों को तृप्तिकर भोजन कराने के बराबर फल प्राप्त होता है।
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