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वृंदावनः डेढ़ सौ प्राचीन श्री बांकेबिहारी मंदिर के आंगन का फर्श धंसा, सेवायतों में मची खलबली
Sat, 04 Jul 2020 12:14 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sat, 04 Jul 2020 12:14 AM IST
सार
भरतपुर के राजा द्वारा उक्त मंदिर का निर्माण कराया गया था
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बांकेबिहारी मंदिर के आंगन का धंसा फर्श
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
श्री बांकेबिहारी मंदिर के आंगन का फर्श अचानक धंस गया। इससे सेवायतों में खलबली मच गई। सूचना प्रबंधन को दी गई। सिविल इंजीनियरों की मदद से फर्श की खोदाई शुरू करा दी गई है, जिससे प्रभावित क्षेत्र की मरम्मत के साथ इसके कारण की जांच की जा सके।
कोरोना संक्रमण के चलते श्रीबांकेबिहारी मंदिर के पट आम भक्तों के लिए बंद हैं। सेवायत ही विधिवत पूजा सेवा कर रहे हैं। इस दौरान सेवायतों को प्रतीत हुआ कि मंदिर के मुख्य आंगन का फर्श कुछ स्थानों पर धंस रहा है। इसकी जानकारी तत्काल ही मंदिर प्रबंधन को दी गई।
ये भी पढ़ें: कानपुर मुठभेड़: आगरा मंडल के दो सिपाहियों ने भी गंवाई जान, परिवार में गम-गुस्से का माहौल
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अनुमति की निर्धारित प्रक्रिया के बाद शुक्रवार को मंदिर आंगन में संबंधित क्षेत्र की खोदाई का काम शुरू किया गया। गर्भगृह के सामने वाले क्षेत्र में करीब दो से तीन फीट खोदाई में जमीन में पोल और गीलापन पाया गया है। इस कार्य में मंदिर प्रबंधन ने सिविल इंजीनियरों की मदद ली है। साथ ही निर्माण विशेषज्ञों को दिल्ली से बुलाया है। जिससे फर्श धंसने के कारण की जांच की जा सके।
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कोरोना संक्रमण के चलते श्रीबांकेबिहारी मंदिर के पट आम भक्तों के लिए बंद हैं। सेवायत ही विधिवत पूजा सेवा कर रहे हैं। इस दौरान सेवायतों को प्रतीत हुआ कि मंदिर के मुख्य आंगन का फर्श कुछ स्थानों पर धंस रहा है। इसकी जानकारी तत्काल ही मंदिर प्रबंधन को दी गई।
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अनुमति की निर्धारित प्रक्रिया के बाद शुक्रवार को मंदिर आंगन में संबंधित क्षेत्र की खोदाई का काम शुरू किया गया। गर्भगृह के सामने वाले क्षेत्र में करीब दो से तीन फीट खोदाई में जमीन में पोल और गीलापन पाया गया है। इस कार्य में मंदिर प्रबंधन ने सिविल इंजीनियरों की मदद ली है। साथ ही निर्माण विशेषज्ञों को दिल्ली से बुलाया है। जिससे फर्श धंसने के कारण की जांच की जा सके।
सेवायत बोले- पुरातत्वविदों की देखरेख में हो मरम्मत कार्य
ठाकुर श्री बांके बिहारी जी मंदिर के मुख्य आंगन में मरम्मत संबंधी कार्य पुरातत्व विदों की देखरेख में होना चाहिए। मंदिर के सेवायत आचार्य अतुल कृष्ण गोस्वामी ने कहा कि ठाकुर श्री बांके बिहारी जी का मंदिर लगभग डेढ़ सौ साल प्राचीन है।
मंदिर के मुख्य आंगन में फर्श के नीचे तीन फीट मिट्टी बैठने की जानकारी हुई है। दर्शनार्थियों के लिए बंद मंदिर में मरम्मत कार्य किया जाना स्वागत योग्य है, लेकिन मंदिर प्रशासन को चाहिए कि उक्त कार्य करने में मंदिर की प्राचीनता का ख्याल रखे।
प्रदीप गोस्वामी बिंदु ने कहा कि भरतपुर के राजा द्वारा उक्त मंदिर का निर्माण कराया गया था। सेवायत मोहन बिहारी गोस्वामी, श्याम बिहारी गोस्वामी, अरविंद गोस्वामी, अशोक गोस्वामी, अमर बिहारी गोस्वामी, बाल कृष्ण गोस्वामी आदि ने मरम्मत कार्य शुरू कराए जाने का स्वागत किया है।
ठाकुर श्री बांके बिहारी जी मंदिर के मुख्य आंगन में मरम्मत संबंधी कार्य पुरातत्व विदों की देखरेख में होना चाहिए। मंदिर के सेवायत आचार्य अतुल कृष्ण गोस्वामी ने कहा कि ठाकुर श्री बांके बिहारी जी का मंदिर लगभग डेढ़ सौ साल प्राचीन है।
मंदिर के मुख्य आंगन में फर्श के नीचे तीन फीट मिट्टी बैठने की जानकारी हुई है। दर्शनार्थियों के लिए बंद मंदिर में मरम्मत कार्य किया जाना स्वागत योग्य है, लेकिन मंदिर प्रशासन को चाहिए कि उक्त कार्य करने में मंदिर की प्राचीनता का ख्याल रखे।
प्रदीप गोस्वामी बिंदु ने कहा कि भरतपुर के राजा द्वारा उक्त मंदिर का निर्माण कराया गया था। सेवायत मोहन बिहारी गोस्वामी, श्याम बिहारी गोस्वामी, अरविंद गोस्वामी, अशोक गोस्वामी, अमर बिहारी गोस्वामी, बाल कृष्ण गोस्वामी आदि ने मरम्मत कार्य शुरू कराए जाने का स्वागत किया है।