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बीमारी से हार गया पाक के छक्के छुड़ाने वाला बाह का लाल
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बीमारी से हार गया जम्मू-कश्मीर में पाक के छक्के छुडाने वाला बाह का लाल, सैनिक सम्मान के साथ हुई अंत
- फोटो : Agra Dehat
बाह। बड़ागांव (बाह) के संतोष शर्मा (38) ने जम्मू-कश्मीर में तैनाती के दौरान सीमा पर पाकिस्तानी सैनिकों के छक्के छुड़ाए थे। सोमवार की रात वह गुरुग्राम के नारायना हॉस्पिटल में बीमारी से जिंदगी की जंग हार गए। मंगलवार को बड़ागांव में सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। जिसमें ग्रामीणों की भीड़ उमड़ी थी।
बड़ागांव के शिव शंकर शर्मा ने 1971 की जंग में हिस्सा लिया था। उन्होंने अपने तीनों बेटों संतोष शर्मा, अनिल शर्मा और आशुतोष शर्मा को भी फौजी बनाया था। परिजनों ने बताया कि दूसरे नंबर के बेटे संतोष शर्मा को छह महीने पहले लिवर की बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 24 नवंबर को गुरुग्राम के नारायना हॉस्पिटल में लिवर ट्रांसप्लांट हुआ। पर, सोमवार की रात उनकी सांसें थम गई। सेना के जवान उनका पार्थिव शरीर लेकर बाह पहुंचे। मुखाग्नि बेटे प्रशांत शर्मा ने दी।
संतोष शर्मा का पार्थिव शरीर जैसे ही घर पर पहुंचा। उसे देखते ही मां राम कुमारी बेसुध हो गई। पत्नी पायल शर्मा का भी रो रो कर हालत खराब है। वह कही कहती रही कि बच्चे प्रशांत और प्रियांशु की देखभाल अब कौन करेगा।
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छह महीने पहले संतोष शर्मा के बीमार होने पर डॉक्टरों ने लिवर खराब होने की जानकारी दी थी। उपचार के बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ तो लिवर ट्रांसप्लांट का अंतिम विकल्प बताया था। संतोष शर्मा के बडे भाई राज किशोर ने अपना लिवर ट्रांसप्लांट के लिए दे दिया।
24 नवंबर को लिवर ट्रांसप्लांट होने के बाद भी जान नहीं बच सकी। लिवर दान करने वाले राज किशोर की हालत भी ठीक नहीं है। बच्ची के सहारे दरवाजे पर भाई के अंतिम दर्शन को निकले राज किशोर ने बताया कि अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी, लेकिन भाई को नहीं बचा सका।
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बड़ागांव के शिव शंकर शर्मा ने 1971 की जंग में हिस्सा लिया था। उन्होंने अपने तीनों बेटों संतोष शर्मा, अनिल शर्मा और आशुतोष शर्मा को भी फौजी बनाया था। परिजनों ने बताया कि दूसरे नंबर के बेटे संतोष शर्मा को छह महीने पहले लिवर की बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 24 नवंबर को गुरुग्राम के नारायना हॉस्पिटल में लिवर ट्रांसप्लांट हुआ। पर, सोमवार की रात उनकी सांसें थम गई। सेना के जवान उनका पार्थिव शरीर लेकर बाह पहुंचे। मुखाग्नि बेटे प्रशांत शर्मा ने दी।
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संतोष शर्मा का पार्थिव शरीर जैसे ही घर पर पहुंचा। उसे देखते ही मां राम कुमारी बेसुध हो गई। पत्नी पायल शर्मा का भी रो रो कर हालत खराब है। वह कही कहती रही कि बच्चे प्रशांत और प्रियांशु की देखभाल अब कौन करेगा।
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छह महीने पहले संतोष शर्मा के बीमार होने पर डॉक्टरों ने लिवर खराब होने की जानकारी दी थी। उपचार के बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ तो लिवर ट्रांसप्लांट का अंतिम विकल्प बताया था। संतोष शर्मा के बडे भाई राज किशोर ने अपना लिवर ट्रांसप्लांट के लिए दे दिया।
24 नवंबर को लिवर ट्रांसप्लांट होने के बाद भी जान नहीं बच सकी। लिवर दान करने वाले राज किशोर की हालत भी ठीक नहीं है। बच्ची के सहारे दरवाजे पर भाई के अंतिम दर्शन को निकले राज किशोर ने बताया कि अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी, लेकिन भाई को नहीं बचा सका।