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बीएड 2004-05: एसआईटी की सूची में शामिल 812 अभ्यर्थी फर्जी घोषित, कुलपति ने सुनाया निर्णय
Wed, 29 Jul 2020 12:46 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 29 Jul 2020 12:46 PM IST
सार
- दो अभ्यर्थी एक्स स्टूडेंट थे
- 2 प्रमाणपत्र सही पाए गए
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अशोक कुमार मित्तल ने बुधवार को कार्य परिषद की आपात बैठक बुलाई थी। इसमें उन 814 अभ्यर्थियों पर फैसला लिया गया, जिनका नाम एसआईटी (विशेष जांच दल) की ओर से तैयार विश्वविद्यालय के बीएड सत्र 2004-05 के फर्जी प्रमाणपत्र वाले अभ्यर्थियों की सूची में शामिल था। इन अभ्यर्थियों ने विभिन्न माध्यम से विश्वविद्यालय के समक्ष अपना पक्ष रखा था।
कार्यपरिषद ने अपना पक्ष रखने वाले 814 में से 812 अभ्यर्थियों को फर्जी घोषित किया है। दो अभ्यर्थी संबंधित सत्र में एक्स स्टूडेंट के रूप में शामिल हुए थे।
इनके रिकॉर्ड सही है। इन्होंने शैक्षणिक सत्र 2003-04 में विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया था और उस साल फेल हो गए थे। इनको सही माना गया है। कुलपति प्रोफेसर अशोक मित्तल की अध्यक्षता में हुई कार्यपरिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
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कार्यपरिषद ने अपना पक्ष रखने वाले 814 में से 812 अभ्यर्थियों को फर्जी घोषित किया है। दो अभ्यर्थी संबंधित सत्र में एक्स स्टूडेंट के रूप में शामिल हुए थे।
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इनके रिकॉर्ड सही है। इन्होंने शैक्षणिक सत्र 2003-04 में विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया था और उस साल फेल हो गए थे। इनको सही माना गया है। कुलपति प्रोफेसर अशोक मित्तल की अध्यक्षता में हुई कार्यपरिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
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कार्यपरिषद की बैठक में मौजूद विश्वविद्यालय के पदाधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि हाईकोर्ट ने प्रकरण में विश्वविद्यालय प्रशासन को तीन माह के अंदर निर्णय लेने का आदेश दिया था। यह अवधि आज पूरी हो रही थी। बुधवार सुबह कार्य परिषद की बैठक सुबह 11 बजे बुलाई गई।
अभ्यर्थियों पर निर्णय लेने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से रिपोर्ट हाईकोर्ट में भेजी जाएगी। कुलपति ने बताया कि अपना पक्ष रखने वाले अभ्यर्थियों की जांच के लिए समिति बनाई गई थी। बुधवार को कार्य परिषद में जांच समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।
अभ्यर्थियों पर निर्णय लेने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से रिपोर्ट हाईकोर्ट में भेजी जाएगी। कुलपति ने बताया कि अपना पक्ष रखने वाले अभ्यर्थियों की जांच के लिए समिति बनाई गई थी। बुधवार को कार्य परिषद में जांच समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।