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आयुर्वेदाचार्य का दावा, आपकी रसोई में मौजूद इस फ्लू से भी बचाव के उपाय
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Tue, 10 Feb 2015 02:18 AM IST
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मौजूदा समय में सबसे बड़ी चिंता बने स्वाइन फ्लू से बचाव का कारगर उपाय हर घर की रसोई में मौजूद है। यदि रोज सुबह-शाम एक कप ‘हर्बल टी’ का सेवन किया जाए तो यह बीमारी दूर रहेगी। वायरल बुखार, सामान्य फ्लू, सर्दी-जुकाम और खांसी की दशा में यह समान रूप से लाभकारी है। इसका नियमित सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ता है। इसी की कमी स्वाइन फ्लू फैलने का सबसे बड़ा कारण है। आयुर्वेदाचार्य डा. राजेंद्र प्रसाद वंशीवाला ने अपने अध्ययन के आधार पर यह दावा किया है।
उन्होंने बताया कि बदलते मौसम में फ्लू यानी सर्दी, जुकाम, बुखार की शिकायत आम है। शरीर में त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) के असंतुलन से विषाणु के प्रभावी होने से ये शिकायतें होती हैं। डा. वंशीवाला ने बताया कि हर्बल टी के लिए लौंग, इलायची, सोंठ, हल्दी, दालचीनी, गिलोय, तुलसी, कालीमिर्च और पिप्पली की बराबर मात्रा का चूर्ण बना लें। दो ग्राम चूर्ण एक कप चाय में डालकर अच्छी तरह उबालकर सुबह-शाम पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। स्वाइन-फ्लू जैसी बीमारी से भी बचाव होता है। सामान्य स्थिति में भी इस चाय का सेवन किया जा सकता है। उन्होंने बताया एक फुट लंबी गिलोय को कूटकर पीस लें। उसकारस भी बेहद लाभकारी है।
इसके अलावा कपूर और इलायची को पीसकर कपड़े में छोटी पोटली बना लें। इसे बार-बार सूंघते रहें, तो स्वाइन समेत अन्य फ्लू से बचा जा सकता है। चिरायता, गुडुची, अनंतमूल, सोंठ, हल्दी, कालमेघ, वासा और तुलसी का काढ़ा भी लाभकारी है। मरीज को नीलगिरि तेल का भाप लेना चाहिए। डा. वंशीवाला का यह अध्ययन पत्र गत दिवस रायपुर में हुए राष्ट्रीय आरोग्य मेले में पढ़ा गया। मेले का मुख्य विषय स्वाइन फ्लू था और सबने हर्बल टी को बचाव में कारगर माना।
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उन्होंने बताया कि बदलते मौसम में फ्लू यानी सर्दी, जुकाम, बुखार की शिकायत आम है। शरीर में त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) के असंतुलन से विषाणु के प्रभावी होने से ये शिकायतें होती हैं। डा. वंशीवाला ने बताया कि हर्बल टी के लिए लौंग, इलायची, सोंठ, हल्दी, दालचीनी, गिलोय, तुलसी, कालीमिर्च और पिप्पली की बराबर मात्रा का चूर्ण बना लें। दो ग्राम चूर्ण एक कप चाय में डालकर अच्छी तरह उबालकर सुबह-शाम पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। स्वाइन-फ्लू जैसी बीमारी से भी बचाव होता है। सामान्य स्थिति में भी इस चाय का सेवन किया जा सकता है। उन्होंने बताया एक फुट लंबी गिलोय को कूटकर पीस लें। उसकारस भी बेहद लाभकारी है।
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इसके अलावा कपूर और इलायची को पीसकर कपड़े में छोटी पोटली बना लें। इसे बार-बार सूंघते रहें, तो स्वाइन समेत अन्य फ्लू से बचा जा सकता है। चिरायता, गुडुची, अनंतमूल, सोंठ, हल्दी, कालमेघ, वासा और तुलसी का काढ़ा भी लाभकारी है। मरीज को नीलगिरि तेल का भाप लेना चाहिए। डा. वंशीवाला का यह अध्ययन पत्र गत दिवस रायपुर में हुए राष्ट्रीय आरोग्य मेले में पढ़ा गया। मेले का मुख्य विषय स्वाइन फ्लू था और सबने हर्बल टी को बचाव में कारगर माना।
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