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अगस्त क्रांतिः आजादी की जंग में सुलगा था परखम, युवाओं पर दागी थी गर्म सलाखें
Thu, 15 Aug 2019 06:14 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 15 Aug 2019 06:14 AM IST
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अगस्त क्रांति
- फोटो : अमर उजाला
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आजादी की जंग लड़ने में परखम भी पीछे नहीं था आजादी के योद्धाओं ने स्वराज की हुंकार उठते ही गांव में मालगाड़ी पलट दी थी। 10 अगस्त 1942 को शहर में छात्रों ने विदेशी सत्ता का अंत करने और जुल्मों के खिलाफ जोरदार जुलूस निकाला था।
13 अगस्त को गांव-गांव आजादी को लेकर संघर्ष का बिगुल बजने लगे तो गोरी सरकार ने तमाम लोगों को जेल में डाल दिया। उसी दौरान 14 अगस्त को फरह ब्लॉक के गांव परखम में वहीं के निवासी रूपराम के नेतृत्व में भारत माता के सपूतों ने मालगाड़ी को पलट दिया था।
इसके बाद गोरी सरकार की पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने परखम के ग्रामीणों पर जमकर जुल्म किए थे। कई ग्रामीणों को बंदी बना लिया गया था। इसके बाद झुड़ावई, बलरई, ओल समेत जिला के दूसरे गांवों से निकले आजादी के योद्धाओं ने कई गांवों को जोड़कर मंडल बना दिया। प्रतिष्ठित नागरिक भी आंदोलन से जुड़ गए थे।
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13 अगस्त को गांव-गांव आजादी को लेकर संघर्ष का बिगुल बजने लगे तो गोरी सरकार ने तमाम लोगों को जेल में डाल दिया। उसी दौरान 14 अगस्त को फरह ब्लॉक के गांव परखम में वहीं के निवासी रूपराम के नेतृत्व में भारत माता के सपूतों ने मालगाड़ी को पलट दिया था।
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इसके बाद गोरी सरकार की पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने परखम के ग्रामीणों पर जमकर जुल्म किए थे। कई ग्रामीणों को बंदी बना लिया गया था। इसके बाद झुड़ावई, बलरई, ओल समेत जिला के दूसरे गांवों से निकले आजादी के योद्धाओं ने कई गांवों को जोड़कर मंडल बना दिया। प्रतिष्ठित नागरिक भी आंदोलन से जुड़ गए थे।
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ब्रिटिश हुकूमत के शासनकाल की गुलामी का अहसास भले ही वर्तमान पीढ़ी को न हो, लेकिन इस आजादी को पाने के लिए क्रांतिकारियों ने बड़ा बलिदान दिया है। परखम में अंग्रेजों द्वारा दी गई यातनाओं की कहानी को सुन रूह कांप जाती है।
बात उन दिनों की है जब देश में अंग्रेज भारत छोड़ों आंदोलन की ज्वाला तेज हो रही थी। आर्थिक तंगी से जूझ रहे क्रांतिकारियों को सूचना मिली कि अंग्रेज अफसर कानपुर से आगरा के लिए मालगाड़ी में वेतन लेकर आ रहे हैं।
मालगाड़ी कानपुर, बरेली के रास्ते आगरा को आनी थी। 14 अगस्त 1942 की रात क्रांतिकारियों ने मालगाड़ी में खजाने को लूटने की योजना बनाई। इसके लिए फरह के गांव परखम को सुरक्षित माना।
बच्चू सिंह, भरतो, अशोक अग्रवाल, महिपाल सिंह ने बताया अनेक लोग घरों को छोड़कर भाग गए। पकड़े गए युवकों के नाखूनों को खींचा गया। उनके शरीर के अंगों को गर्म लोहे से जलाया।
बात उन दिनों की है जब देश में अंग्रेज भारत छोड़ों आंदोलन की ज्वाला तेज हो रही थी। आर्थिक तंगी से जूझ रहे क्रांतिकारियों को सूचना मिली कि अंग्रेज अफसर कानपुर से आगरा के लिए मालगाड़ी में वेतन लेकर आ रहे हैं।
मालगाड़ी कानपुर, बरेली के रास्ते आगरा को आनी थी। 14 अगस्त 1942 की रात क्रांतिकारियों ने मालगाड़ी में खजाने को लूटने की योजना बनाई। इसके लिए फरह के गांव परखम को सुरक्षित माना।
बच्चू सिंह, भरतो, अशोक अग्रवाल, महिपाल सिंह ने बताया अनेक लोग घरों को छोड़कर भाग गए। पकड़े गए युवकों के नाखूनों को खींचा गया। उनके शरीर के अंगों को गर्म लोहे से जलाया।