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‘अटल’ हो स्टेशन का नाम, चले ‘अटल’ एक्सप्रेस
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
Updated Thu, 24 Dec 2015 01:49 AM IST
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जिस रेल लाइन का शिलान्यास किया था। उस पर गुरुवार से पैसेंजर ट्रेन दौड़ने लगेगी। खेत में बने शिलान्यास के पत्थर को किसान रामवीर ने इसलिए नहीं हटने दिया है कि स्टेशन का नाम ‘अटल’ रखा जाएगा। बटेश्वर और क्षेत्र के हर व्यक्ति की यही सोच है कि बटेश्वर हाल्ट का नाम ‘अटल’ स्टेशन ही रखा जाए और सर्व प्रथम चलने वाली ट्रेन का नाम ‘अटल’ एक्सप्रेस ही हो।
रेल लाइन शुभारंभ की पूर्व बेला पर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे अटल के पारिवारिक भतीजे रमेश बाजपेयी (76) और उनकी पत्नी राजेश्वरी देवी ने कहा कि ट्रेन का संचालन अच्छी बात है लेकिन ट्रेन का नाम ‘अटल’ एक्सप्रेस और स्टेशन का नाम भी ‘अटल’ स्टेशन होना चाहिए। अटल के बाल सखा सूरजभान गुप्ता (88) ने भी उनसे सहमति जताई। अटल के पारिवारिक भाई की पत्नी दत्तो देवी (90) ने कहा कि स्टेशन दूर बनाया गया है। अटल का नाम नहीं जोड़ा गया है। उनका नाम स्टेशन के साथ होना चाहिए। ग्रामीण विनोद जैन ने कहा कि जन भावनाओं को अनुरूप अटल स्टेशन के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। ट्रेन का नाम भी अटल एक्सप्रेस होना चाहिए। रामसिंह आजाद ने कहा कि ट्रेन की शुरूआत ऐतिहासिक पल होगा। कसक इस बात की है कि बटेश्वर को स्टेशन का दर्जा नहीं दिया गया है। क्षेत्र का हर व्यक्ति ‘अटल’ स्टेशन और ‘अटल’ एक्सप्रेस के पक्ष में है। इस संबंध में डीआरएम प्रभाष कुमार ने बताया कि शासन स्तर पर ही इस तरह के प्रस्ताव पर विचार संभव है। लोगों को अपना सुझाव भेजना चाहिए।
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अरिदमन और प्रभुदयाल कठेरिया ने जताई खुशी
बाह। छह अप्रैल 1999 को जब रेल लाइन का शिलान्यास किया था तब केन्द्र और प्रदेश में भाजपा की ही सरकार थी। उस समय सांसद प्रभुदयाल कठेरिया थे और यूपी कैबिनेट में अरिदमन सिंह मंत्री थे। दोनों ने बाह क्षेत्र की आर्थिक दशा और दिशा सुधारने के लिए अटल जी से बटेश्वर रेल लाइन का तोहफा लिया था। गुरुवार को पैसेंजर ट्रेन का संचालन शुरू होने से पूर्व बुधवार को अरिदमन सिंह बटेश्वर पहुंचे। उन्होंने बटेश्वर हाल्ट को देखा और रेल अधिकारियोें से बात की। कहा कि यहां रेल की सीटी बजेगी तो खुशी होगी। कसक है कि बटेश्वर स्टेशन नहीं बना। इसके लिए लड़ाई लड़ी जाएगी। वहीं तत्कालीन सांसद प्रभुदयाल कठेरिया ने कहा कि रेल लाइन शुरू होने से खुशी है। बटेश्वर को रेल स्टेशन का दर्जा दिलाकर ही रहेंगे। सरकार के सामने ये मामला उठाया जाएगा।
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दिन भर चली समारोह की तैयारियां
बाह। बटेश्वर रेल लाइन पर गुरुवार को ट्रेन संचालन के समारोह की तैयारियां बुधवार को दिन भर चली। डीआरएम प्रभाष कुुमार खुद मौजूद रहे। तैयारियों को अंतिम रूप देने के बाद उन्होंने बताया कि दोपहर 12:30 बजे समारोह शुरू होगा। इसके बाद ट्रेन को हरी झंडी दिखाई जायेगी। समारोह में रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा, मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. रामशंकर कठेरिया, फतेहपुर सीकरी के सांसद चौधरी बाबूलाल के अलावा और भी कई लोग मौजूद रहेंगे।
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खबर छपी तो हटा दिया मुंशी प्रेमचंद्र का ‘बटेसर’
बाह। मुंशी प्रेमचंद्र की कहानी ‘पंचपरमेश्वर’ में वर्णित ‘बटेसर’ की तर्ज पर बटेश्वर हाल्ट को पहले ‘बटेसर’ नाम दिया गया। मंगलवार को यहां हर जगह ‘बटेसर’ ही लिखा नजर आया। स्थानीय साहित्यकार डॉ. बीपी मिश्रा और डॉ. शिवशंकर कटारा समेत तमाम जानकार इस संयोग पर सुखद अहसास कर रहे थे। बुधवार को जब अमर उजाला में इसकी खबर छपी तो आननफानन में इसे बदलकर ‘बटेश्वर’ लिख दिया गया। इस बारे में जब रेलवे के अधिकारियों से संपर्क किया गया तो वे कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं दिखे। उन्होंने इसे पेंटर द्वारा की गई गलती माना।
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अटल के जन्मदिन पर रेल यात्रियों का स्वागत
शमसाबाद। भाजयुमो कार्यकर्ता अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर सुबह नौ बजे रेलवे स्टेशन पहुंचकर यात्रियों और रेल कर्मियों का स्वागत करेंगे। यह जानकारी हरेंद्र कुमार और दिलीप माहौर ने दी है।
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रेल लाइन शुभारंभ की पूर्व बेला पर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे अटल के पारिवारिक भतीजे रमेश बाजपेयी (76) और उनकी पत्नी राजेश्वरी देवी ने कहा कि ट्रेन का संचालन अच्छी बात है लेकिन ट्रेन का नाम ‘अटल’ एक्सप्रेस और स्टेशन का नाम भी ‘अटल’ स्टेशन होना चाहिए। अटल के बाल सखा सूरजभान गुप्ता (88) ने भी उनसे सहमति जताई। अटल के पारिवारिक भाई की पत्नी दत्तो देवी (90) ने कहा कि स्टेशन दूर बनाया गया है। अटल का नाम नहीं जोड़ा गया है। उनका नाम स्टेशन के साथ होना चाहिए। ग्रामीण विनोद जैन ने कहा कि जन भावनाओं को अनुरूप अटल स्टेशन के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। ट्रेन का नाम भी अटल एक्सप्रेस होना चाहिए। रामसिंह आजाद ने कहा कि ट्रेन की शुरूआत ऐतिहासिक पल होगा। कसक इस बात की है कि बटेश्वर को स्टेशन का दर्जा नहीं दिया गया है। क्षेत्र का हर व्यक्ति ‘अटल’ स्टेशन और ‘अटल’ एक्सप्रेस के पक्ष में है। इस संबंध में डीआरएम प्रभाष कुमार ने बताया कि शासन स्तर पर ही इस तरह के प्रस्ताव पर विचार संभव है। लोगों को अपना सुझाव भेजना चाहिए।
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अरिदमन और प्रभुदयाल कठेरिया ने जताई खुशी
बाह। छह अप्रैल 1999 को जब रेल लाइन का शिलान्यास किया था तब केन्द्र और प्रदेश में भाजपा की ही सरकार थी। उस समय सांसद प्रभुदयाल कठेरिया थे और यूपी कैबिनेट में अरिदमन सिंह मंत्री थे। दोनों ने बाह क्षेत्र की आर्थिक दशा और दिशा सुधारने के लिए अटल जी से बटेश्वर रेल लाइन का तोहफा लिया था। गुरुवार को पैसेंजर ट्रेन का संचालन शुरू होने से पूर्व बुधवार को अरिदमन सिंह बटेश्वर पहुंचे। उन्होंने बटेश्वर हाल्ट को देखा और रेल अधिकारियोें से बात की। कहा कि यहां रेल की सीटी बजेगी तो खुशी होगी। कसक है कि बटेश्वर स्टेशन नहीं बना। इसके लिए लड़ाई लड़ी जाएगी। वहीं तत्कालीन सांसद प्रभुदयाल कठेरिया ने कहा कि रेल लाइन शुरू होने से खुशी है। बटेश्वर को रेल स्टेशन का दर्जा दिलाकर ही रहेंगे। सरकार के सामने ये मामला उठाया जाएगा।
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दिन भर चली समारोह की तैयारियां
बाह। बटेश्वर रेल लाइन पर गुरुवार को ट्रेन संचालन के समारोह की तैयारियां बुधवार को दिन भर चली। डीआरएम प्रभाष कुुमार खुद मौजूद रहे। तैयारियों को अंतिम रूप देने के बाद उन्होंने बताया कि दोपहर 12:30 बजे समारोह शुरू होगा। इसके बाद ट्रेन को हरी झंडी दिखाई जायेगी। समारोह में रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा, मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. रामशंकर कठेरिया, फतेहपुर सीकरी के सांसद चौधरी बाबूलाल के अलावा और भी कई लोग मौजूद रहेंगे।
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खबर छपी तो हटा दिया मुंशी प्रेमचंद्र का ‘बटेसर’
बाह। मुंशी प्रेमचंद्र की कहानी ‘पंचपरमेश्वर’ में वर्णित ‘बटेसर’ की तर्ज पर बटेश्वर हाल्ट को पहले ‘बटेसर’ नाम दिया गया। मंगलवार को यहां हर जगह ‘बटेसर’ ही लिखा नजर आया। स्थानीय साहित्यकार डॉ. बीपी मिश्रा और डॉ. शिवशंकर कटारा समेत तमाम जानकार इस संयोग पर सुखद अहसास कर रहे थे। बुधवार को जब अमर उजाला में इसकी खबर छपी तो आननफानन में इसे बदलकर ‘बटेश्वर’ लिख दिया गया। इस बारे में जब रेलवे के अधिकारियों से संपर्क किया गया तो वे कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं दिखे। उन्होंने इसे पेंटर द्वारा की गई गलती माना।
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अटल के जन्मदिन पर रेल यात्रियों का स्वागत
शमसाबाद। भाजयुमो कार्यकर्ता अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर सुबह नौ बजे रेलवे स्टेशन पहुंचकर यात्रियों और रेल कर्मियों का स्वागत करेंगे। यह जानकारी हरेंद्र कुमार और दिलीप माहौर ने दी है।