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इस विश्वविद्यालय के छात्र रहे अटल बिहारी वाजपेयी, एमए राजनीति की परीक्षा में आए थे अव्वल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Fri, 17 Aug 2018 10:24 AM IST
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अखबार पढ़ते हुए अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी आगरा विश्वविद्यालय के छात्र रहे। उन्होंने वर्ष 1950 के आसपास कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीति विज्ञान से एमए की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की थी। कानपुर से ही एलएलबी की पढ़ाई शुरू की थी, उसे बीच में छोड़ दी थी।
कानपुर का डीएवी कॉलेज वर्तमान में छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय से संबद्ध है। जिस समय अटल बिहारी वाजपेयी इस कॉलेज में अध्ययनरत थे, यह आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध था। वर्ष 1949 से लेकर वर्ष 1955 तक आगरा विश्वविद्यालय के कुलपति ले. कर्नल सीवी महाजन थे। वो विश्वविद्यालय के 12वें कुलपति थे।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (पूर्ववर्ती आगरा विश्वविद्यालय) के कुलपति डॉ. अरविंद कुमार दीक्षित का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इस विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र रहे हैं, यह विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है। वो प्रखर राष्ट्र भक्त और भारतीय राजनीति को नई दिशा देने वाले थे। नई पीढ़ी के प्रेरणास्रोत रहे। उनके व्यक्तित्व, विचारों और कार्यों से युवा पीढ़ी आगे भी प्रेरित होगी।
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कानपुर का डीएवी कॉलेज वर्तमान में छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय से संबद्ध है। जिस समय अटल बिहारी वाजपेयी इस कॉलेज में अध्ययनरत थे, यह आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध था। वर्ष 1949 से लेकर वर्ष 1955 तक आगरा विश्वविद्यालय के कुलपति ले. कर्नल सीवी महाजन थे। वो विश्वविद्यालय के 12वें कुलपति थे।
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (पूर्ववर्ती आगरा विश्वविद्यालय) के कुलपति डॉ. अरविंद कुमार दीक्षित का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इस विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र रहे हैं, यह विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है। वो प्रखर राष्ट्र भक्त और भारतीय राजनीति को नई दिशा देने वाले थे। नई पीढ़ी के प्रेरणास्रोत रहे। उनके व्यक्तित्व, विचारों और कार्यों से युवा पीढ़ी आगे भी प्रेरित होगी।
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विश्वविद्यालयों में नहीं मिला रिकार्ड
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के एमए की डिग्री डीएवी कॉलेज से प्राप्त करने का रिकार्ड नहीं मिल पाया। भाजपा के नेताओं ने दो वर्ष पहले डिग्री का रिकार्ड संबंधित कॉलेज और कानपुर विश्वविद्यालय में न मिलने पर नाराजगी जताई थी। कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति से भी मिले थे।
वहां के कुलपति ने बताया कि कानपुर विश्वविद्यालय उस समय नहीं बना था, आगरा विश्वविद्यालय में रिकार्ड होने चाहिए। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (पूर्ववर्ती आगरा विश्वविद्यालय) की ओर से बताया गया कि कानपुर विश्वविद्यालय बनने के बाद उससे जुड़े सारे रिकार्ड भेज दिए थे। यहां भी रिकार्ड नहीं मिला। इस तरह दोनों विश्वविद्यालयों में रिकार्ड नहीं मिला।
वहां के कुलपति ने बताया कि कानपुर विश्वविद्यालय उस समय नहीं बना था, आगरा विश्वविद्यालय में रिकार्ड होने चाहिए। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (पूर्ववर्ती आगरा विश्वविद्यालय) की ओर से बताया गया कि कानपुर विश्वविद्यालय बनने के बाद उससे जुड़े सारे रिकार्ड भेज दिए थे। यहां भी रिकार्ड नहीं मिला। इस तरह दोनों विश्वविद्यालयों में रिकार्ड नहीं मिला।
अटलजी के नाम पर सभागार
वहीं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने हिंदी के प्रचार-प्रसार में भी महती भूमिका निभाई। हिंदी भाषा के लिए उनके योगदान को देखते हुए केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा में अटल बिहारी वाजपेयी अंतरराष्ट्रीय सभागार बनाया गया है। कई देशों के छात्र-छात्राएं आज इस सभागार के मंच पर खड़े होकर हिंदी बोलते हैं। हिंदी सेवी कार्यशाला में हिस्सा लेने आते हैं।
संस्थान में 11 दिसंबर 2017 को केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह अटल बिहारी वाजपेयी अंतरराष्ट्रीय सभागार का उद्घाटन किया था। इसमें 300 लोगों के बैठने की व्यवस्था है। प्रथम तल पर दो कक्ष हैं इनमें 60 और 150 लोगों के बैठने की व्यवस्था है। सभागार वातानुकूलित है। करीब साढ़े आठ करोड़ रुपये की लागत से तीन वर्षों में यह बनकर तैयार हुआ था।
केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक प्रो. नंद किशोर पांडेय का कहना है कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का आगरा से गहरा संबंध रहा है। वह संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी में बोले। कवि के तौर पर उन्होंने हिंदी को आगे बढ़ाया। इसको देखते हुए सभागार का नाम उनके नाम पर रखने का विचार किया गया।
संस्थान में 11 दिसंबर 2017 को केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह अटल बिहारी वाजपेयी अंतरराष्ट्रीय सभागार का उद्घाटन किया था। इसमें 300 लोगों के बैठने की व्यवस्था है। प्रथम तल पर दो कक्ष हैं इनमें 60 और 150 लोगों के बैठने की व्यवस्था है। सभागार वातानुकूलित है। करीब साढ़े आठ करोड़ रुपये की लागत से तीन वर्षों में यह बनकर तैयार हुआ था।
केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक प्रो. नंद किशोर पांडेय का कहना है कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का आगरा से गहरा संबंध रहा है। वह संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी में बोले। कवि के तौर पर उन्होंने हिंदी को आगे बढ़ाया। इसको देखते हुए सभागार का नाम उनके नाम पर रखने का विचार किया गया।