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Agra News: ये चिड़िया बाघ के मुंह से भी चुराती है निवाला, बाह के जंगल में बढ़ रहा कुनबा

Tue, 16 Aug 2022 06:00 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Tue, 16 Aug 2022 06:00 AM IST
सार

बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि रूफस ट्रीपी काफी फुर्तीली होती है, जो बहुत ही तेजी से एक डाल से दूसरी पर पहुंच जाती है। इस चिड़िया को बाघ की डेंटिस्ट भी कहा जाता है।

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Asian bird Rufous treepie steals morsel from tiger's mouth
रूफस ट्रीपी - फोटो : के नारायण/जगदीश नेगी

विस्तार

एशियन चिड़िया रूफस ट्रीपी की आवाज बेहद मधुर है, लेकिन इसका कारनामा बेहद खतरनाक है। ये चिड़िया बाघ के मुंह में घुस कर अपना भोजन कर आसानी से निकल जाती है। बाह के जंगलों में एशियन चिड़िया रूफस ट्रीपी (डेंड्रोकिट्टा वागाबुंडा) की चहचहाहट बढ़ रही है। इसकी आवाज लोगों को बांसुरी जैसी मधुर आवाज गीत मल्हार का एहसास कराती है। वैसे रूफस ट्रीपी का स्थानीय नाम टका चोर है। यह चिड़िया सिक्के, आभूषण, चमकदार वस्तुओं को चुरा कर अपने घोंसले में रख देती है।

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बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि आंख गहरे लाल रंग और पैर भूरे रंग के होते हैं। सिर और छाती काले। इसकी चोंच अलग तरह की होती है। ये काफी फुर्तीली होती है, जो बहुत ही तेजी से एक डाल से दूसरी पर पहुंच जाती है। रूफस ट्रीपी सर्वाहारी चिड़िया है। आमतौर पर बीज, फल, कीड़े, छिपकली, मेंढक, छोटे पक्षी इसका भोजन होते हैं, लेकिन जिन इलाकों में बाघ होते हैं तो ये खाने के लिए उन पर ही निर्भर रहती है। 

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बाघ की डेंटिस्ट कही जाती है ये चिड़िया 

रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि ये चिड़िया बाघ के दांतों के बीच फंसे मांस के टुकड़ों को खाती है। खास बात ये है कि अपनी फुर्ती के कारण ये बाघ के मुंह में घुसकर इतनी तेजी से बाहर निकल आती है, कि बाघ को पता ही नहीं चलता है। हालांकि बाह के जंगल में बाघ नहीं हैं, लेकिन यहां पाए जाने वाले लेपर्ड इसके निशाने पर रहते हैं। इस चिड़िया को बाघ की डेंटिस्ट भी कहा जाता है।

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रूफस ट्रीपी की पहचान

रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि इसकी लंबाई करीब 30 सेमी होती है और इसकी पूंछ 15-20 सेमी लंबी होती है। इस चिड़िया का वजन करीब 90 से 120 ग्राम होता है। इस चिड़िया के आंख गहरे लाल रंग और पैर भूरे रंग के होते हैं। सिर और छाती काली होती है। चेहरा और गला गहरे रंग का होता है। पूंछ का रंग नीला-भूरा और पंखों में सफेद धब्बे से होते हैं।

जंगल में 30 से 35 के बीच है इनकी संख्या 

बाह के जंगलों में इन दिनों रूफस ट्रीपी का कुनवा बढ़ रहा है। एक अंदाजे के मुताबिक इनकी संख्या 30 से 35 है। रूफस ट्रीपी ने पतली कांटेदार टहनियों से कपनुमा घोंसला बनाए थे। अब अंडों से निकले चूजे उड़ान भरने लायक हो गए हैं। इससे चंबल क्षेत्र में इनकी संख्या बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि इस चिड़िया को घरों के आसपास कूडे़ के ढेर पर इन्हें चोंच मारते हुए देखा जा सकता है। ये चिड़िया सफाई भी करती है। ये भोजन की तलाश में शाखाओं के बीच चिपक जाती हैं। वहीं बागों और अनाज की फसलों को कुछ नुकसान पहुंचाती है।

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