Agra: एसएन में बनी वो खिड़की, जहां नवजात बच्चे को छोड़कर चुपचाप लौट सकती हैं मां, झाड़ियों में न फेंके
आश्रय पालना स्थलों के माध्यम से अनचाहे नवजात को जीने का अधिकार प्राप्त हो सकेगा। साथ ही इच्छुक दंपती इन मासूम को विधि अनुरूप गोद लेकर अपना परिवार पूरा कर सकेंगे।
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अनचाहे नवजात को लोग इधर-उधर न फेंके, उनकी जान बचे और वह भी अच्छा जीवन जी सकें, इसके लिए प्रदेश सरकार ने पहल की है। प्रदेश के सात मेडिकल कॉलेजों के महिला चिकित्सालयों में आश्रय पालना स्थापित करने की मंजूरी दी गई है। इसमें एसएन मेडिकल कॉलेज भी शामिल है। यहां एमसीएच (मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ) के सामने पालना लगाया जाएगा, जिसमें अनचाहे नवजात को छोड़ा जा सकेगा। शनिवार को इसके लिए जगह देखी गई।
आश्रय पालना स्थल की स्थापना के लिए जीवन संरक्षण अभियान के संस्थापक व संचालक देवेंद्र जे. अग्रवाल ‘गुरुजी’ ने एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता के साथ मेडिकल कॉलेज में एमसीएच के पास जगह देखी। गुरुजी ने बताया कि कॉलेज प्रशासन को भूमि आवंटन के संबंध में पत्र प्राप्त हो गया है। दो माह में आश्रय पालना स्थल स्थापित कर समाज और प्रशासन को समर्पित कर दिया जाएगा। आश्रय पालना स्थलों के माध्यम से अनचाहे नवजात को जीने का अधिकार प्राप्त हो सकेगा। साथ ही इच्छुक दंपती इन मासूम को विधि अनुरूप गोद लेकर अपना परिवार पूरा कर सकेंगे। आगरा के अलावा लखनऊ, गोरखपुर, प्रयागराज, मेरठ, झांसी और कानपुर राजकीय मेडिकल कॉलेजों में आश्रय पालना स्थल के स्थापना की स्वीकृति शासन से दी गई है। आश्रय पालना स्थलों की स्थापना महेशाश्रम, मां भगवती विकास संस्थान, उदयपुर की ओर से जीवन संरक्षण अभियान के तहत की जा रही है।
अनचाहे नवजात (खासतौर पर बेटियों) के जन्म लेते ही डस्टबिन, कटीली झाड़ियों, नदी, तालाब, कुएं में फेंक दिए जाने की तमाम घटनाएं सामने आती हैं। शिशुओं की मौत तक हो जाती है। कुछ लोग बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन या अन्य असुरक्षित स्थानों पर नवजात को छोड़कर चलते हैं। ऐसे नवजात गलत हाथों में पड़ते हैं तो उन्हें भिक्षावृत्ति, वेश्यावृत्ति व अन्य अनैतिक कार्यों में ढकेल दिया जाता है।
सुरक्षा व गोपनीयता का रखा जाएगा ध्यान
- आश्रय पालना स्थल हाईटेक मोशन सेंसर से युक्त होंगे। पालना स्थल में शिशु को छोड़ने के दो मिनट के बाद चिकित्सालय के स्वागत कक्ष में अपने आप घंटी बजेगी। इस दो मिनट में छोड़ने वाला व्यक्ति आसानी से सुरक्षित रूप से वहां से जा सकेगा और इससे उसकी पहचान भी गोपनीय बनी रहेगी।
नवजात का होगा पालन
- स्वागत कक्ष में घंटी बजते ही चिकित्सा कर्मी की ओर से आश्रय पालना स्थल से शिशु को तत्काल प्राप्त कर उसकी चिकित्सकीय व व्यक्तिगत देखभाल (दूध पिलाना, साफ सफाई करना, स्वच्छ कपड़े पहनाना) आदि किया जाएगा।
- शिशु के स्वस्थ होने पर उसे तत्काल नजदीकी राजकीय मान्यता प्राप्त शिशु गृह में भेज दिया जाएगा।
- जिला बाल कल्याण समिति की ओर से शिशु को आवश्यकतानुसार दत्तक ग्रहण के लिए विधिक रूप से स्वतंत्र घोषित किया जाएगा।
- केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण की ओर से शिशु के दत्तक ग्रहण की कार्यवाही की जाएगी।
- जिला न्यायालय की ओर से उस शिशु को दत्तक ग्रहण के माध्यम से पुनर्वास कर दिया जाएगा, जहां से मिलेगा उसे एक नया जीवन, नया नाम, नई पहचान।