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ताज की सतह पर जमा हुई राख और मिट्टी
अमर उजाला ब्यूरो आगरा
Updated Wed, 08 Mar 2017 11:46 PM IST
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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दुनिया के सातवें अजूबे ताजमहल को भारी प्रदूषण से खतरा है। पीले पड़ चुके ताज की मडपैक से सफाई की जा रही है लेकिन इस बार यमुना की रेत के कणों की जगह संगमरमरी सतह पर राख और मिट्टी चिपक रही है। वायु प्रदूषण की प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आए हैं। हालांकि विस्तृत जांच की रिपोर्ट बाकी है। एएसआई के मिकल ब्रांच ने ताजमहल के अंदर और नेशनल एनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट ताजगंज में अलग-अलग रिसर्च स्टडी शुरू कर दी है।
दिवाली से ताजनगरी में एयर क्वालिटी इंडेक्स बेहद खतरनाक स्तर पर बनी रही। भारी प्रदूषण से ताजमहल पर कई तत्व जमा हो गए। एएसआई और नेशनल एनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट दोनों ने ही क्रमश: ताज के अंदर और बाहर का पर्यावरण अध्ययन शुरू किया। कई महीनों की सैंपलिंग के बाद संगमरमरी सतह पर राख और मिट्टी के कण जमा पाए गए। धूल, मिट्टी के कणों के पीछे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे, इनर रिंग रोड और नेशनल हाईवे के साथ शिल्पग्राम में हो रही पार्किंग की खोदाई मानी जा रही है। राख के कणों के लिए ताजनगरी में जलाए जा रहे कूड़े और पास के ताजगंज मोक्षधाम को वजह माना जा रहा है। हालांकि इस स्टडी में इन सैंपलों की विस्तृत जांच होनी बाकी है, जिसमें यह पता चल सकेगा कि आखिर इन कणों की ताज पर आने की दिशा क्या है।
हर घंटे ताज पर प्रदूषण की जांच
एएर्सआई केमिकल ब्रांच के सुपरिंटेंडेंट आर्कियोलॉजी केमिस्ट डा. एमके भटनागर ने ताजमहल पर बीते साल कीड़ों के हमले के बाद प्रदूषण के असर की जांच शुरू की है। वह हर घंटे प्रदूषण की जांच कर रहे हैं। ताजमहल पर लगाए गए उपकरणों में प्रदूषण के सैंपल में वह प्रदूषणकारी तत्वों, हवा की दिशा, खास वक्त पर प्रदूषण, मौसम के असर और संगमरमर पर उसके प्रभाव की जांच कर रहे हैं। हर मौसम में सैंपल लेने के बाद अब उनकी जांच और आंकड़ों का अध्ययन किया जा रहा है।
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छह जगह से नीरी ने जुटाए सैंपल
नेशनल एनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट की टीम सप्ताह भर से आगरा में है। ताजगंज में पश्चिमी गेट, पूर्वी गेट, दक्षिणी गेट की ओर कुल छह जगह से सैंपल एकत्रित किए जा रहे हैं। ताजखेमा होटल की छत पर भी कई उपकरण लगाकर प्रदूषण का स्तर और उनके तत्वों के सैंपल लिए गए हैं। यह टीम सप्ताह भर रहने के बाद बुधवार शाम को दिल्ली चली गई। अब दिल्ली की लैब में इन सैंपलों की विस्तृत जांच की जाएगी। वायु प्रदूषण के बाद नीरी की टीम ताजगंज में ठोस कूड़ा निस्तारण और ध्वनि प्रदूषण की जांच के लिए भी आएगी।
कीड़ों के हमले के बाद सो गया प्रशासन
बीते साल ताज पर हरे कीड़ों के हमले के बाद भी स्थानीय प्रशासन यमुना नदी की न तो ताज के पीछे सफाई करा पाया और न ही प्रदूषण ही कम करा सका। यह मामला अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल देख रहा है, जहां एएसआई की रिपोर्ट भी दाखिल हो चुकी है।
‘ताजमहल पर प्रदूषण की विस्तृत जांच के लिए सैंपल लिए गए हैं। केमिकल ब्रांच पता लगा रही है कि आखिर ताज पर किस तरह का प्रदूषण आ रहा है और इसका असर कितना पड़ रहा है। ताज के संरक्षण में यह जांच सहायक होगी’
डा. एमके भटनागर
अधीक्षण पुरातत्व रसायनविद
‘ताजगंज प्रोजेक्ट से पर्यावरण पर पड़े असर का अध्ययन करने के लिए नीरी से रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। नीरी की पूर्व में स्टडी आ चुकी है। अब प्रोजेक्ट के बाद की रिपोर्ट अप्रैल तक आ जाएगी’
दिनेश कुमार, उपनिदेशक, यूपी टूरिज्म
दिवाली से ताजनगरी में एयर क्वालिटी इंडेक्स बेहद खतरनाक स्तर पर बनी रही। भारी प्रदूषण से ताजमहल पर कई तत्व जमा हो गए। एएसआई और नेशनल एनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट दोनों ने ही क्रमश: ताज के अंदर और बाहर का पर्यावरण अध्ययन शुरू किया। कई महीनों की सैंपलिंग के बाद संगमरमरी सतह पर राख और मिट्टी के कण जमा पाए गए। धूल, मिट्टी के कणों के पीछे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे, इनर रिंग रोड और नेशनल हाईवे के साथ शिल्पग्राम में हो रही पार्किंग की खोदाई मानी जा रही है। राख के कणों के लिए ताजनगरी में जलाए जा रहे कूड़े और पास के ताजगंज मोक्षधाम को वजह माना जा रहा है। हालांकि इस स्टडी में इन सैंपलों की विस्तृत जांच होनी बाकी है, जिसमें यह पता चल सकेगा कि आखिर इन कणों की ताज पर आने की दिशा क्या है।
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हर घंटे ताज पर प्रदूषण की जांच
एएर्सआई केमिकल ब्रांच के सुपरिंटेंडेंट आर्कियोलॉजी केमिस्ट डा. एमके भटनागर ने ताजमहल पर बीते साल कीड़ों के हमले के बाद प्रदूषण के असर की जांच शुरू की है। वह हर घंटे प्रदूषण की जांच कर रहे हैं। ताजमहल पर लगाए गए उपकरणों में प्रदूषण के सैंपल में वह प्रदूषणकारी तत्वों, हवा की दिशा, खास वक्त पर प्रदूषण, मौसम के असर और संगमरमर पर उसके प्रभाव की जांच कर रहे हैं। हर मौसम में सैंपल लेने के बाद अब उनकी जांच और आंकड़ों का अध्ययन किया जा रहा है।
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छह जगह से नीरी ने जुटाए सैंपल
नेशनल एनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट की टीम सप्ताह भर से आगरा में है। ताजगंज में पश्चिमी गेट, पूर्वी गेट, दक्षिणी गेट की ओर कुल छह जगह से सैंपल एकत्रित किए जा रहे हैं। ताजखेमा होटल की छत पर भी कई उपकरण लगाकर प्रदूषण का स्तर और उनके तत्वों के सैंपल लिए गए हैं। यह टीम सप्ताह भर रहने के बाद बुधवार शाम को दिल्ली चली गई। अब दिल्ली की लैब में इन सैंपलों की विस्तृत जांच की जाएगी। वायु प्रदूषण के बाद नीरी की टीम ताजगंज में ठोस कूड़ा निस्तारण और ध्वनि प्रदूषण की जांच के लिए भी आएगी।
कीड़ों के हमले के बाद सो गया प्रशासन
बीते साल ताज पर हरे कीड़ों के हमले के बाद भी स्थानीय प्रशासन यमुना नदी की न तो ताज के पीछे सफाई करा पाया और न ही प्रदूषण ही कम करा सका। यह मामला अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल देख रहा है, जहां एएसआई की रिपोर्ट भी दाखिल हो चुकी है।
‘ताजमहल पर प्रदूषण की विस्तृत जांच के लिए सैंपल लिए गए हैं। केमिकल ब्रांच पता लगा रही है कि आखिर ताज पर किस तरह का प्रदूषण आ रहा है और इसका असर कितना पड़ रहा है। ताज के संरक्षण में यह जांच सहायक होगी’
डा. एमके भटनागर
अधीक्षण पुरातत्व रसायनविद
‘ताजगंज प्रोजेक्ट से पर्यावरण पर पड़े असर का अध्ययन करने के लिए नीरी से रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। नीरी की पूर्व में स्टडी आ चुकी है। अब प्रोजेक्ट के बाद की रिपोर्ट अप्रैल तक आ जाएगी’
दिनेश कुमार, उपनिदेशक, यूपी टूरिज्म