UP: तीन वर्षीय मासूम का गला काटते समय नहीं घबराया अरुण, बचने के लिए मासूम की मां का लिया सहारा; ऐसे खुला राज
मथुरा में तीन वर्षीय मासूम बच्ची की हत्या उसके ही ताऊ के बेटे ने की। वो फरीदाबाद में नौकरी करता था। वहां से वापस आया और कत्ल की साजिश रची। कोई उस पर शक न करे इसके लिए भी आरोपी ने पूरा प्लान तैयार कर लिया था।
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तीर्थनगरी मथुरा में मांट के बिलंदपुर गांव में तीन साल की प्रियल की हत्या को 19 साल के उसके तहेरे भाई अरुण द्वारा एकाएक अंजाम नहीं दिया गया। वह दो माह से हत्या की साजिश रच रहा था। उसके निशाने पर पहले चाचा हाकिम सिंह था, मगर उसने बाद में थप्पड़ के बदले प्रियल की हत्या करना चुना। इसके लिए उसने कई क्राइम सीरियल देखे। उसी के आधार पर हत्या करने के बाद खुद को बचाने की तरकीब भी अपनाई। मगर, वह बच नहीं सका। पुलिस एक सप्ताह में इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है।
इंस्पेक्टर मांट प्रदीप कुमार ने बताया कि चोरी के आरोप में हाकिम सिंह ने अरुण को थप्पड़ मार दिए थे। दिवाली के बाद अरुण, जो कि ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा है। वह फरीदाबाद चला गया। वहां एक डाटा एंट्री ऑपरेटर के तौर पर निजी कंपनी में नौकरी करने लगा। अरुण ने बताया कि वह थप्पड़ से इतना आहत हुआ कि उसने हत्या करने की ठान ली थी। इसके लिए वह क्राइम सीरियल देखने लगा। उन सीरियल को देख हत्या करने और खुद को बचाने की तरकीब जुटाने लगा।
अरुण ने 24 जनवरी को हत्या के बाद मौके पर पहुंची पुलिस को काफी देर तक अपनी पूर्वनियोजित थ्योरी में उलझाने का प्रयास किया। पुलिस जब पूछताछ कर रही थी तो अरुण ने कहा था कि गांव में घरों में जंगली जानकर आ जाते हैं। संभव है कि प्रियल को कई जंगली जानवर काट गया है। इसके बाद जब पुलिस ने साफ तौर पर चाकू से गला रेतने की बात कही और चाकू की तलाश शुरू की तो अरुण ने पुलिस के पास आकर कहा कि उक्त चाकू की जांच करने का कोई फायदा नहीं, उसे कई लोगों ने छू लिया है। उस पर फिंगर प्रिंट नहीं मिलेंगे। इसी बात पर पुलिस का माथा ठनका।
मगर, सबूत के अभाव में अरुण को कुछ नहीं कहा। इसके बाद बच्ची की मां से पूछताछ की, जब बच्ची की मां ने आखिरी बार बच्ची के साथ अरुण के होने की बात बताई तब पुलिस का शक और गहरा गया। इसके बाद अरुण से पूछताछ की तो उसने गांव के ही किसी अज्ञात द्वारा किसी रंजिश में हत्या या रेप के बाद हत्या की कहानी गढ़ी। पुलिस ने अरुण को शुक्रवार को हिरासत में लिया। हिरासत में छह घंटे के बाद उसने कड़ी पूछताछ में हत्या की बात स्वीकार की।
हत्या के बाद एक घंटे तक शव के साथ कमरे में रहा आरोपी
अरुण ने प्रियल की हत्या के बाद एक घंटे तक कमरे का अंदर से दरवाजा बंद रखा। उसे बाहर से खटपट की आवाज आ रही थी। शातिर दिमाग अरुण नहीं चाहता था कि उसे कमरे से कोई भी निकलते हुए देखे। खटपट की आवाज बंद होने के बाद वह कमरे से बाहर निकलकर भाग गया। जब बच्ची की मां साधना छोटे बेटे को दवा दिलाकर घर वापस लौटी तो उसने बेटी का शव कमरे चारपाई पर पड़ा देख शोर मचाया। नाटकीय ढंग से आरोपी अरुण मौके पर पहुंचा को परिवार के साथ शोक मनाने लगा।
अरुण ने कहा था घर में कोई मरने वाला है जल्द
बच्ची की मां प्रियल ने पुलिस को बताया कि फरीदाबाद से लौटने के बाद अरुण ने कई बार परिवार के लोगों से कहा था कि घर में जल्द किसी की मौत होने वाली है। पुलिस को साधना की यह बात अटपटी लगी, इससे अरुण की ओर शक और गहराता गया। हालांकि पुलिस हिरासत में अरुण ने साधना को लेकर भी उल्टे-सीधे बयान दिए। जब बयानों को लेकर साधना से पुलिस ने क्रॉस पूछताछ तो उसने साफ तौर पर खुद को लेकर दिए आरोपी अरुण के बयानों से किनारा कर लिया।