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पिथौरागढ़ में बादल फटने से लापता हुआ मैनपुरी निवासी सेना का जवान
ब्यूरो/अमर उजाला किशनी (मैनपुरी)
Updated Thu, 17 Aug 2017 08:21 AM IST
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सेना का जवान
- फोटो : अमर उजाला
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मैनपुरी के गांव कोड़र निवासी और आर्टी रेजीमेंट में तैनात जवान अशोक कुमार पुत्र अतर सिंह उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में बादल फटने व बाढ़ आने के बाद से लापता हैं। सेना के सीओ की ओर से उसके परिवारीजनों को यह खबर दी गई, तभी से घरवाले परेशान हैं।
बताया गया है कि जवान अशोक कुमार चीन बॉर्डर पर रेजिमेंट की गाड़ी से एम्युनेशन लेकर शनिवार को निकला था। पिथौरागढ़ से सौ किलोमीटर दूर धारचूल्हा के पास अचानक बादल फट जाने तथा बाढ़ के कारण उसका पता नहीं चल सका है।
रेजीमेंट के सीओ ने रविवार को उसकी पत्नी को जवान के गायब होने की सूचना फोन से दी। सीओ के अनुसार लापता जवान की तलाश जारी है। बाढ़ के चलते ढूंढने में असुविधा हो रही है। क्योंकि पहाड़ों से भारी संख्या में पत्थर टूटकर भी गिरे है।
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इधर, तीन दिन बाद भी अशोक का कोई पता नहीं चल सका है। इससे पत्नी और परिवार के अन्य सदस्य सदमे में है। पत्नी की तो रो रो कर हालत खराब है। जवान के दो मासूम बच्चे भी परेशान है।
लापता जवान अशोक कुमार 1999 में सेना में भर्ती हुआ था। घर में पत्नी मनीषा देवी के अलावा दो बेटे निखिल 10 वर्ष और रितिक चार वर्ष है। कुछ ही दिनों पूर्व ही उन्होंने किशनी के रामनगर तिराहे पर मकान बनवाया था। तभी से अशोक का परिवार किशनी में ही रह रहा है।
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बताया गया है कि जवान अशोक कुमार चीन बॉर्डर पर रेजिमेंट की गाड़ी से एम्युनेशन लेकर शनिवार को निकला था। पिथौरागढ़ से सौ किलोमीटर दूर धारचूल्हा के पास अचानक बादल फट जाने तथा बाढ़ के कारण उसका पता नहीं चल सका है।
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रेजीमेंट के सीओ ने रविवार को उसकी पत्नी को जवान के गायब होने की सूचना फोन से दी। सीओ के अनुसार लापता जवान की तलाश जारी है। बाढ़ के चलते ढूंढने में असुविधा हो रही है। क्योंकि पहाड़ों से भारी संख्या में पत्थर टूटकर भी गिरे है।
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इधर, तीन दिन बाद भी अशोक का कोई पता नहीं चल सका है। इससे पत्नी और परिवार के अन्य सदस्य सदमे में है। पत्नी की तो रो रो कर हालत खराब है। जवान के दो मासूम बच्चे भी परेशान है।
लापता जवान अशोक कुमार 1999 में सेना में भर्ती हुआ था। घर में पत्नी मनीषा देवी के अलावा दो बेटे निखिल 10 वर्ष और रितिक चार वर्ष है। कुछ ही दिनों पूर्व ही उन्होंने किशनी के रामनगर तिराहे पर मकान बनवाया था। तभी से अशोक का परिवार किशनी में ही रह रहा है।