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1 करोड़ खर्च के बाद भी ताजमहल पर फेल हुए ये इंतजाम, एएसआई की नीतियों पर सवाल

Sun, 07 Jan 2018 09:37 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Sun, 07 Jan 2018 09:37 AM IST
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archaeological survey of india policy questioned about taj mahal in agra
ताजमहल - फोटो : अमर उजाला
ताजमहल में एएसआई ने मुख्य गुंबद के अंदर दीवारों को गंदे हाथों से छूने से बचाने के लिए जो रेलिंग लगाई है, वह उपयोगी साबित ही नहीं हो पाई। एक करोड़ रुपये खर्च कर गुंबद के अंदर संकरी गैलरी में स्टील की रेलिंग के बावजूद पर्यटक ताज की दीवारों को गंदा कर रहे हैं। 
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वहीं यह रेलिंग कब्र वाले हिस्से में भीड़ प्रबंधन को फेल कर रही है। न तो भीड़ प्रबंधन में रेलिंग कारगर साबित हुई और न ही ताज की दीवारों को बचाने में।

क्रि समस से नए साल तक ताजमहल में सैलानियों का सैलाब उमड़ा, लेकिन जैसी बदइंतजामी इस साल हुई, ऐसी ताज पर कभी नजर नहीं आई। ताज पर टिकट 35 हजार तक ही बिके, लेकिन हालात बेकाबू हो गए। पूर्व में 48 हजार से ज्यादा टिकट ताज पर बेचे जा चुके हैं और एक भी सैलानी बिना देखे नहीं लौटा। 
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ताजमहल ट‌िकट - फोटो : अमर उजाला
सीआईएसएफ ने भी हालात बिगड़ने के पीछे गुंबद में लगी रेलिंग को जिम्मेदार माना था और इसे हटाने की वकालत की। अक्तूबर में ही रेलिंग लगाई गई है, जिसके बाद ताज में भीड़ प्रबंधन के हालात बिगड़ गए। 

एएसआई ने एक करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन यह उपयोगी नहीं नहीं हो सकी। अब इसी रेलिंग के कारण ताज पर दो तरह की टिकट और 40 हजार पर्यटकों की संख्या सीमित करने का प्रस्ताव है।

2007 में बनाया प्रस्ताव

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ताजमहल - फोटो : सतेंद्र सिंह
एएसआई पूर्व में 2007 में ईरान की विश्व धरोहर में शुमार पर्सीपोलिस के साइरस मकबरे की तर्ज पर कांच की दीवार लगाने का प्रस्ताव बना चुकी थी। कांच की दीवार का प्रस्ताव भी तत्कालीन अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. डीएन डिमरी ने तैयार कराया था। 

सीआईएसएफ तथा स्थानीय प्रशासन ने इसकी वकालत की है, लेकिन एएसआई के मौजूदा अधिकारी टफ एंड ग्लास की चार से पांच फुट ऊंची दीवार को रेलिंग के मुकाबले खारिज कर चुके हैं। हालांकि ऐसी ही दीवार गुवाहाटी के कामाख्या देवी मंदिर में लगाई गई है।
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यहां है कांच की दीवार

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साइरस का मकबरा - फोटो : google
यूनेस्को ने 1979 में ईरान के शहर शिराज के पास पर्सीपोलिस में 2500 साल पुराने साइरस के मकबरे को वर्ल्ड हेरिटेज मान्यूमेंट का दर्जा दिया था। यूनेस्को के कार्यक्रम में एएसआई अधिकारी जब ईरान गए थे तो वहां साइरस के मकबरे में कांच की दीवार दिखाई गई। पर्यटकों द्वारा दीवारों को छूने से बचाने के लिए इसे लगाया गया था। 

उस दौरे के बाद ताजमहल मुख्य गुंबद में जाने के लिए सीढ़ियों पर लकड़ी के कवर लगाए गए ताकि संगमरमर की मूल सीढ़ियां घिसें नहीं। कांच की दीवार का एक सैंपल भी मुख्य मकबरे में कब्रों के चारों ओर लगाई गई एल्युमिनियम की जाली की जगह लगाकर देखा गया था। 

एएसआई के संयुक्त निदेशक डीआर गहलौत और निदेशक स्मारक सी. दोरजी भी इस प्रस्ताव को लेकर सहमत थे, लेकिन कुछ गाइडों ने तब इस पर सवाल उठा दिए थे, जिसके बाद यह प्रस्ताव लटक गया।
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