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दुष्कर्मियों को न दिया जाए दया याचिका का अधिकार, एक माह के अंदर दी जाए फांसी

Thu, 06 Feb 2020 09:59 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Thu, 06 Feb 2020 09:59 AM IST
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Aparajita 100 Million Smiles Student Samvad For Nirbhaya Justice
अपराजिता अभियान में शामिल हुए छात्र-छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
सात वर्ष बाद भी निर्भया के दोषियों को सजा न मिल पाना हमारी न्याय व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करता है। ऐसे किसी भी दरिंदे को दोष सिद्ध होने और सजा सुनाए जाने के बाद दया याचिका देने का अवसर ही नहीं मिलना चाहिए। अमर उजाला कार्यालय में अपराजिता अभियान के तहत बुधवार को आयोजित संवाद कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने निर्भया मामले में दोषियों की फांसी टलने पर अपना रोष जाहिर किया।
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एक माह के अंदर दी जाए फांसी
‘हैवानियत की घटनाओं में दोष सिद्ध होने के एक माह के अंदर दोषियों को फांसी दी जानी चाहिए। सजा में देरी होने से अपराधियों का मनोबल बढ़ता है।’ - अनंत चौधरी, बीटेक के छात्र, आईईटी, विवि
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अब सजा में देरी ठीक नहीं
‘सुप्रीम कोर्ट से सजा सुनाए जाने और राष्ट्रपति की ओर से दया याचिका खारिज करने के बाद भी अब सजा में देरी पर ठीक नहीं है।’ - ओमकार सिकरवार, दाऊदयाल में बीकॉम के छात्र
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कानून में बदलाव करना चाहिए
‘अंग्रेजों के जमाने के कानून अभी तक चल रहा है। सरकार अनुच्छेद 370 हटाने का कदम उठा सकती है। इस मामले में भी कानून में बदलाव करना चाहिए।’ - गीतम सिसौदिया, एमए इतिहास, विवि

ऐसे अपराध में उम्र न देखी जाए

‘दुष्कर्म के मामले में अपराधियों की उम्र नहीं देखनी चाहिए। उसके कृत्य के आधार पर सजा सुनाई जानी चाहिए। इसके लिए कानून में बदलाव जरूरी है।’ - गौरव शर्मा, पीएचडी के छात्र, विवि

न्याय व्यवस्था पर खड़े हो रहे सवाल
‘निर्भया मामले में दुष्कर्मियों की फांसी टलने से हमारी न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कड़े कानून बनाने चाहिए।’ - प्रभलीन कौर, उत्तम इंस्टीट्यूट में एमबीए की छात्रा

सजा में देरी से अपराध को बढ़ावा
‘जघन्य अपराधों की सुनवाई की अलग व्यवस्था हो।  सजा में देरी से अपराध को बढ़ावा मिलता है।’ - निकिता वरुण, दाऊदयाल संस्थान की छात्रा

जितनी जल्दी हो सके फांसी दी जाए
‘निर्भया के साथ हुई हैवानियत के दोषियों को जितनी जल्दी हो सके, फांसी देनी चाहिए। तभी महिलाएं व बालिकाएं खुद को सुरक्षित महसूस करेंगी।’ - शुभम राज शर्मा, आगरा कॉलेज के छात्र

सौ दिन के अंदर हो सजा
‘निर्भया प्रकरण में सात वर्ष बाद भी दोषियों को सजा नहीं मिल पाई। ऐसे मामलों में सौ दिन के अंदर सजा होनी चाहिए।’ - नीलम यादव, बलूनी क्लासेज की छात्रा

सजा सुनाने के बाद दया याचिका न ली जाए
‘किसी अपराधी को सजा सुनाने के बाद दया याचिका देेने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। इसके लिए कानून में संशोधन करने की जरूरत है।’ - मनीषा शर्मा, बलूनी क्लासेज की छात्रा

खुले में दी जानी चाहिए फांसी
‘दुष्कर्मियों को खुले में फांसी दी जानी चाहिए। अपराधियों के अधिकार की बात की जाती है, क्या पीड़ित का कोई अधिकार नहीं होता? इस पर विचार करना चाहिए।’ - शिवम जैन, एमएमसी के छात्र, विवि

ऐसे अपराधियों का जीने का अधिकार नहीं
‘ऐसे अपराधियों को जीने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। दोषी सिद्ध होने के बाद तत्काल सजा की व्यवस्था होनी चाहिए। ’ - सोनिया कर्दम, विधि की छात्रा

सजा में देरी से देश की छवि बिगड़ती है
‘जघन्य अपराधों में सजा में देरी से देश की छवि वैश्विक स्तर पर भी बिगड़ती है। सरकार को कानून में संशोधन के लिए कदम उठाना चाहिए।’ - आशीष कुमार चौहान, एमएसडब्ल्यू के छात्र, देव कॉलेज

तमाम मामलों में रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की जाती
‘तमाम मामलों में पीड़िता की रिपोर्ट तक थाने में दर्ज नहीं की जाती। जब तक पीड़िताओं को न्याय नहीं मिलेगा, अपराध कम नहीं होगा।’ - अभिषेक सिसौदिया, एमएसडब्ल्यू के छात्र

‘दया याचिका खारिज होने के बाद भी निर्भया के साथ हैवानियत करने वाले दोषियों की सजा में देरी ठीक नहीं है। कानून में संशोधन के लिए राष्ट्रपति को पत्र लिखेंगे।’ - दीप कुमार गर्ग, पीएचडी के छात्र, विवि

कानून का मजाक बन रहा
‘एक चर्चित मामले में सात वर्ष बाद भी दोषियों को सजा न मिलने से हमारी कानून व्यवस्था का मजाक बन रहा है। दरिंदों को जल्द सजा मिलनी चाहिए।’ - कुनाल दिवाकर, एमकॉम के छात्र, सेठ पदमचंद संस्थान

बचाने वाले भी दोषी माने जाएं
‘ऐसे दरिंदों को बचाने वालों को भी दोषी माना जाना चाहिए। दोष सिद्ध होने के बाद फांसी देने में देरी नहीं करनी चाहिए। ’ - आकाश सिंह राठौर, पीजीडीडीएम के छात्र, विवि

अपराध एक तो दया याचिका अलग-अलग क्यों?
‘सामूहिक अपराध करने वाले लोगों को अलग-अलग दया याचिका देने का अवसर नहीं दिया जाना चाहिए। सभी का अपराध एक तो याचिका भी एक होनी चाहिए।’ - प्रियंका नेगी, सदस्य, एबीवीपी

दुष्कर्मियों को वकील नहीं मिलने चाहिए
‘दुष्कर्मियों को तत्काल सजा मिलनी चाहिए। ऐसे अपराध में दोषियों को वकील भी नहीं मिलने चाहिए। तभी समाज में अपराध कम होगा।’ - अनामिका यादव, बलूनी क्लासेज की छात्रा

अपराधियों के मानवाधिकार कम हो
‘अपराधियों के मानवाधिकार कम होने चाहिए। महिला अपराध में त्वरित न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच सभी जिले में होनी चाहिए।’ - कीर्ति कुमारी, विधि की छात्रा

समाज में जागरूकता से रुकेंगे अपराध
‘बालिकाओं और महिलाओं के साथ होने पर अपराध तभी रुकेंगे, जब समाज में जागरूकता होगी। ’ - साक्षी यादव, बलूनी क्लासेज की छात्रा

सजा के लिए समय तय हो

‘निर्भया जैसी तमाम घटनाएं हो रही हैं। अपराध के आधार पर सजा के लिए समय तय हो।’ - संजना यादव, बलूनी क्लासेज की छात्रा

कानून पर भरोसा कम हो रहा है
‘फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद भी फांसी टलने से कानून पर लोगों का भरोसा कम हो रहा है। कानून पर भरोसा कायम करने के लिए कदम उठाने होंगे।’ - सारस निगम, बलूनी क्लासेज की छात्रा

दया याचिका ऐसे अपराधों के लिए न हो
‘दया याचिका की व्यवस्था, ऐसे अपराधों के लिए नहीं होनी चाहिए। निर्भया के साथ दरिंदगी करने वालों को जल्द से जल्द फांसी पर लटकाना चाहिए।’ - शिव प्रिया राज, बलूनी क्लासेज की छात्रा
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