{"_id":"6a57ce7b9c87bdec270d3788","slug":"anil-srivastava-wins-agra-university-election-2026-07-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Agra University: शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के चुनाव में बड़ा उलटफेर, अध्यक्ष बने अनिल; अखिलेश को हराया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Agra University: शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के चुनाव में बड़ा उलटफेर, अध्यक्ष बने अनिल; अखिलेश को हराया
Wed, 15 Jul 2026 11:46 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Wed, 15 Jul 2026 11:46 PM IST
सार
विश्वविद्यालय में शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के चुनाव में बड़ा उलटफेर देखने को मिला। आठ बार अध्यक्ष रह चुके अखिलेश चाैधरी को हार का सामना करना पड़ा। 194 मतों के साथ अनिल श्रीवास्तव नए अध्यक्ष बने।
विज्ञापन
नए अध्यक्ष चुने गए अनिल श्रीवास्तव।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
-
- 3
-
Link Copied
विस्तार
आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पालीवाल पार्क परिसर में बुधवार को शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ चुनाव-2026 के लिए मतदान और मतगणना संपन्न हुई। चुनाव में अध्यक्ष पद पर बड़ा उलटफेर देखने को मिला। अनिल श्रीवास्तव ने 194 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की, जबकि आठ बार के अध्यक्ष रह चुके अखिलेश चौधरी को 140 मत ही मिले।
बुधवार सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक मतदान हुआ। इसके बाद दोपहर 2:30 बजे से शाम 4:15 बजे तक मतगणना हुई। चुनाव में कुल 347 मतदाता थे, जिनमें से 344 ने मताधिकार का प्रयोग किया। दो मत निरस्त घोषित किए गए। इस बार अध्यक्ष पद के अलावा दो उपाध्यक्ष, दो महामंत्री, तीन सह मंत्री और पांच कोषाध्यक्ष पदों के लिए भी मतदान कराया गया। उपाध्यक्ष पद पर आशु ठाकुर ने 188, महामंत्री सुमित चौधरी ने 151, कोषाध्यक्ष ईशान शर्मा ने 88 मत, सहमंत्री राहुल पचौरी ने 159 मत प्राप्त कर जीत हासिल की।
हार के बाद बोले- कर्मचारियों की लड़ाई जारी रहेगी
आठ बार विवि शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रह चुके अखिलेश ने चुनाव परिणाम आने के बाद कहा कि इस बार चुनाव लड़ने का उनका मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के नियमितीकरण (स्थायीकरण) की मांग को मजबूती से उठाना था। चौधरी ने कहा कि चुनाव में हार-जीत लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और परिणाम से उन्हें कोई व्यक्तिगत निराशा नहीं है। उन्होंने कहा, संघ के पद पर रहूं या न रहूं, एक सामान्य कर्मचारी की तरह विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की समस्याओं के लिए आवाज उठाता रहूंगा।
विज्ञापन
गेम चेंजर बने नौ बार के महामंत्री अरविंद गुप्ता
विश्वविद्यालय शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ चुनाव में इस बार सबसे ज्यादा चर्चा नौ बार के महामंत्री रहे अरविंद गुप्ता की रही। पिछले वर्ष ही उन्होंने घोषणा कर दी थी कि वह अब चुनाव नहीं लड़ेंगे और इस बार अपने फैसले पर कायम रहे। इसके बाद उन्होंने चुनावी मैदान में उतरने के बजाय नए नेतृत्व का समर्थन किया। विश्वविद्यालय परिसर में पूरे चुनाव के दौरान यह चर्चा रही कि अरविंद गुप्ता का समर्थन अध्यक्ष पद के विजेता अनिल श्रीवास्तव के लिए निर्णायक साबित हुआ।
विज्ञापन
बुधवार सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक मतदान हुआ। इसके बाद दोपहर 2:30 बजे से शाम 4:15 बजे तक मतगणना हुई। चुनाव में कुल 347 मतदाता थे, जिनमें से 344 ने मताधिकार का प्रयोग किया। दो मत निरस्त घोषित किए गए। इस बार अध्यक्ष पद के अलावा दो उपाध्यक्ष, दो महामंत्री, तीन सह मंत्री और पांच कोषाध्यक्ष पदों के लिए भी मतदान कराया गया। उपाध्यक्ष पद पर आशु ठाकुर ने 188, महामंत्री सुमित चौधरी ने 151, कोषाध्यक्ष ईशान शर्मा ने 88 मत, सहमंत्री राहुल पचौरी ने 159 मत प्राप्त कर जीत हासिल की।
विज्ञापन
हार के बाद बोले- कर्मचारियों की लड़ाई जारी रहेगी
आठ बार विवि शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रह चुके अखिलेश ने चुनाव परिणाम आने के बाद कहा कि इस बार चुनाव लड़ने का उनका मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के नियमितीकरण (स्थायीकरण) की मांग को मजबूती से उठाना था। चौधरी ने कहा कि चुनाव में हार-जीत लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और परिणाम से उन्हें कोई व्यक्तिगत निराशा नहीं है। उन्होंने कहा, संघ के पद पर रहूं या न रहूं, एक सामान्य कर्मचारी की तरह विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की समस्याओं के लिए आवाज उठाता रहूंगा।
विज्ञापन
गेम चेंजर बने नौ बार के महामंत्री अरविंद गुप्ता
विश्वविद्यालय शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ चुनाव में इस बार सबसे ज्यादा चर्चा नौ बार के महामंत्री रहे अरविंद गुप्ता की रही। पिछले वर्ष ही उन्होंने घोषणा कर दी थी कि वह अब चुनाव नहीं लड़ेंगे और इस बार अपने फैसले पर कायम रहे। इसके बाद उन्होंने चुनावी मैदान में उतरने के बजाय नए नेतृत्व का समर्थन किया। विश्वविद्यालय परिसर में पूरे चुनाव के दौरान यह चर्चा रही कि अरविंद गुप्ता का समर्थन अध्यक्ष पद के विजेता अनिल श्रीवास्तव के लिए निर्णायक साबित हुआ।