फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Ancient Well Of Holi Mohall Etah Know History

एटा: किंवदंती बन गया होली मोहल्ला का प्राचीन कुआं, कभी होली खेलकर सामूहिक स्नान के लिए जुटते थे लोग

Thu, 04 Mar 2021 02:54 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा Published by: Abhishek Saxena Updated Thu, 04 Mar 2021 02:54 PM IST
विज्ञापन
Ancient Well Of Holi Mohall Etah Know History
होली मोहल्ला का प्राचीन कुआं - फोटो : अमर उजाला
फाल्गुन माह की बयार के साथ ही होली का खुमार छाने लगता है। हालांकि ब्रज की तरह यहां वसंत पंचमी से ही रंग और गुलाल की रंगत भले न दिखाई दे पर यहां होली का इतिहास काफी पुराना और दिलचस्प है। एक समय था जब शहर के होली मोहल्ला में ही होली जलती थी। लोग होली खेलने के बाद यहीं बने कुएं पर सामूहिक रूप से स्नान करते थे, पर अब यह केवल किंवदंती बनकर रह गया है। 
विज्ञापन


शहर की व्यस्त ठंडी सड़क से लगे इलाके होली मोहल्ला में विशालकाय होली रखी जाती है। यहां होली के दिन सबसे पहले होली जलती है, इसके बाद ही पूरे शहर में होलिका दहन की शुरूआत होती है। यहां होलिका दहन स्थल के समीप ही एक कुआं बना हुआ है।
विज्ञापन

आगरा: विष्णु को 19 साल बाद जेल से मिली रिहाई, हाईकोर्ट ने एक महीने पहले बेगुनाह करार दिया था, पढ़िए पूरा मामला 
विज्ञापन
विज्ञापन


सत्तर के दशक से पूर्व तक यहां लोग सामूहिक रूप से होलिका दहन के बाद रंग और गुलाल से होली खेलते थे और इसी कुएं पर सामूहिक रूप से स्नान करते थे। होली के दिन इस कुएं के आसपास मेले जैसा नजारा होता था, जो कालांतर में केवल किंवदंती बनकर रह गया है। 

1890 में बना था कुआं
होलिका दहन की परंपरा होली मोहल्ला में बहुत प्राचीन है। यहां कब से होली का शुभारंभ हुआ, यह कोई बुजुर्ग भी ठीक से नहीं बता पाता। हां, इतना अवश्य बताते हैं कि राजा दिलसुख राय ने 1890 में कुआं का निर्माण कराया था। उस समय इस कुएं से आसपास के खेतों में लहलहाती फसलों की सिंचाई की जाती थी। इसके बाद 1930 के आसपास राजा गढ़ी लवाइन ने इसका जीर्णोद्घार कराया। जब यहां मकान बनते चले गए तो कुआं का पानी पीने के काम आने लगा। वर्तमान में कुआं पूरी तरह से सूख चुका है। 

राजा दिलसुख राय ने 1890 में कुआं का निर्माण कराया था, एक समय था जब लोग होली खेलने के बाद इसी कुएं पर स्नान करते थे। तब नजारा देखने लायक होता था। कोई बाल्टी से पानी खींच रहा होता तो कोई नहा रहा होता था। रमेश चंद, स्थानीय निवासी 

कुआं का जो प्राचीन इतिहास है, वह अब तो पूरी तरह से विलुप्त हो चुका है। अब तो कुआं केवल किंवदंती बनकर रह गया है। इसमें आसपास के लोग कूड़ा डाल जाते हैं। पालिका को बताया पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। नरेश चंद, स्थानीय निवासी

हमने तो वो नजारा कभी नहीं देखा जब लोग होली खेलने के बाद इसी कुएं पर स्नान करते थे। मगर उस समय माहौल कैसा रहा होगा, यह उस जमाने की बातों को जानकर समझा जा सकता है। लोग होली का त्योहार मिल-जुलकर मनाते रहे होंगे।
सागर, स्थानीय निवासी

होली मोहल्ला में सबसे पहले होली जलती है, इसके बाद ही किसी अन्य मोहल्ले में। यहां के प्राचीन इतिहास को संजोकर नहीं रखा गया। यही वजह है कि आज की नौजवान पीढ़ी उस इतिहास से अनभिज्ञ है। अभिषेक शर्मा, स्थानीय निवासी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed