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विश्वविद्यालय: स्नातक प्रथम वर्ष के 38 विषयों में बदला हुआ पाठ्यक्रम पढ़ेंगे विद्यार्थी

Sat, 15 May 2021 10:32 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 15 May 2021 10:32 AM IST
सार

आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में स्नातक प्रथम वर्ष में छात्र-छात्राएं 38 विषयों का बदला हुआ पाठ्यक्रम पढ़ेंगे। जो कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार शासन स्तर से तैयार कराया गया है।

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Ambedkar University Students will study the changed syllabus in first year of graduation
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय

विस्तार

आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के स्नातक प्रथम वर्ष के 38 विषयों के पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है। बदला हुआ पाठ्यक्रम शैक्षिणक सत्र 2021-22 से लागू होगा। बोर्ड ऑफ स्टडीज और संकायों के बाद सभी 38 विषयों के पाठ्यक्रमों को शुक्रवार को विद्या परिषद की ऑनलाइन बैठक में रखा। प्रथम वर्ष के दोनों सेमेस्टर के पाठ्यक्रमों को स्वीकार कर लिया गया।

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विद्या परिषद की ऑनलाइन बैठक कुलपति प्रो. अशोक मित्तल की अध्यक्षता में हुई। कुलपति ने बताया कि शासनादेश की कड़ी में सत्र 2021-22 से सभी राज्य विश्वविद्यालयों में स्नातक स्तर पर नया पाठ्यक्रम लागू किया जाना है। शासन ने प्रत्येक विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर 38 विषयों के पाठ्यक्रम अपलोड कर दिए गए थे। शासन की मंशा के अनुरूप विश्वविद्यालय ने 38 विषयों की बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठकें कराईं। 
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उनकी संस्तुतियों को संबंधित संकाय से स्वीकृत कराने के बाद विद्या परिषद में रखा गया, जिन्हें विद्या परिषद की ओर से भी स्वीकृति दे दी गई। कुलपति ने बताया कि बोर्ड ऑफ स्टडीज के सभी संयोजकों और सदस्यों ने इन पाठ्यक्रमों का गहनता से अध्ययन किया है। जहां जरूरत थीं, अपेक्षित सुधार और संशोधन भी किया है। अब यह पाठ्यक्रम और अधिक प्रभावशाली और संपूर्ण बन गए हैं।

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अभी पहले वर्ष का पाठ्यक्रम स्वीकारा गया है 
कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय की बोर्ड ऑफ स्टडीज ने अभी शासन की ओर से उपलब्ध कराए गए पूरे पाठ्यक्रम में से प्रथम वर्ष (प्रथम और द्वितीय सेमेस्टर) के पाठ्यक्रम को ही स्वीकार किया है। आगामी सत्र में इन विषयों की पढ़ाई शुरू कराने से पहले फिर से बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठकें कराई जाएंगी। इसमें द्वितीय और तृतीय वर्ष के पाठ्यक्रम को स्वीकृति प्रदान की जाएगी ।

सीबीसीएस लागू करने के लिए शासनादेश का इंतजार 
कुलपति प्रो. अशोक मित्तल ने बताया कि आगामी सत्र में चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) लागू करने के लिए शासन का आदेश आने का इंतजार किया जाएगा। उसके अनुसार कदम उठाया जाएगा। 

शोध प्रबंध व लघु शोध प्रबंध अब 31 दिसंबर तक जमा कर सकेंगे
विश्वविद्यालय की विद्या परिषद की बैठक में पीएचडी और एमफिल करने वाले शोधार्थियों को शोध प्रबंध व लघु शोध प्रबंध जमा करने के लिए अतिरिक्त समय दिए जाने का निर्णय लिया गया। अब ये अपना शोध 31 दिसंबर 2021 तक बिना अतिरिक्त शुल्क के जमा कर सकते हैं। 

वर्ष 2013 के अध्यादेशों के तहत शोध कर रहे करीब 300 शोधार्थी ऐसे हैं , जिनका शोध प्रबंध जमा करने का समय पूरा हो चुका है। कोरोना की वजह उत्पन्न परिस्थितियों के कारण शोधार्थी अपना शोध प्रबंध जमा नहीं कर पा रहे हैं। अधिष्ठाता (डीन) शोध प्रो. अजय तनेजा की ओर से यह प्रस्ताव विद्या परिषद में रखा गया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है।

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