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अमृत कुंभ: हाथों में चिमटा-तलवार और भाला, तीर्थनगरी में आकर्षण का केंद्र बनेगी रुद्राक्ष माला, नागा साधु निकालेंगे शोभायात्रा
Thu, 16 Dec 2021 08:18 AM IST
Abhishek Saxena
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 16 Dec 2021 08:18 AM IST
सार
देश भर से आए नागा साधुओं ने तीर्थनगरी में शोभायात्रा की तैयारी कर ली है। गुरुवार को अलग-अलग पंथों के अखाड़े शामिल होंगे।
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नागा साधू
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विस्तार
हाथों में चिमटा, तलवार, भाला, बाहों में रुद्राक्ष की माला आज आकर्षण का केंद्र बनेगी। देशभर के नागा साधू करतब दिखाने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। देश के कोने-कोने से आए नागा साधू आज कस्बे की सड़कों पर करतब दिखाएंगे। साधुओं के साथ साथ पुलिस-प्रशासन ने भी तैयारियां की हैं। सुरक्षा की दृष्टि से शोभायात्रा के साथ पीएसी बल भ्रमण करेगा।
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दुदंभी भी बजाई जाएगी
कस्बा के नागालैंड घाट पर इन दिनों रौनक छाई हुई है। पंच दशनाम आवाहन अखाड़ा, महानिर्वाणी अखाड़ा, जूना अखाड़ा, निरंजनी अखाड़ा, पंचाग्रि अखाड़ा, नागापंथी अखाड़ा, वैष्णव अखाड़ा सहित विभिन्न अखाड़ों के नागा साधू शोभायात्रा निकालेंगे। गुरुवार सुबह यह साधू कस्बेभर में शोभायात्रा निकालेंगे। नागासाधुओं का रथ भी चलेगा और पैदल चलते साधू त्रिशुल, तलवार, वाद्ययंत्रों, फरसा आदि से तरह तरह के करतब दिखाएंगे। घंटे घड़ियाल के साथ साथ दुदुंभी बजाई जाएगी। पूरे कस्बे में नागा साधू हैरतंगेज करतब दिखाएंगे। शोभायात्रा में सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन ने तैयारियां की हैं। पुलिस के अधिकारियों ने शोभायात्रा के मार्गों का निरीक्षण किया है। नागालैंड अखाड़े के व्यवस्थापक सीताराम दुबे ने बताया कि लगभग 500 साधू शोभायात्रा में शामिल होंगे।
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अखाड़ों का महत्व
देश में 16 अखाड़े बताए गए हैं। जिनमें सभी अखाड़ों का अलग अलग महत्व है। इनमें प्रमुख कुछ अखाड़े विशेष महत्व रखते हैं। पेश है कुछ अखाड़ों के महत्व की रिपोर्ट-
निरंजनी अखाड़ा
- यह अखाड़ा गुजरात के मांडवी में स्थापित हुआ था। इनके ईष्ट देव भगवान शंकर के पुत्र कार्तिक स्वामी हैं। इनमें दिगंबर स्वामी और महामंडलेश्वर होते हैं। इनकी शाखाएं, इलाहाबाद, उज्जैन, हरिद्वार, त्र्यंबकेश्वर व उदयपुर में हैं।
महानिर्वाणी अखाड़ा
- इस अखाड़े की स्थापना हरिद्वार में नीलधारा के पास हुई थी। इनके ईष्टदेव कपिल मुनि हैं। इसके अलावा इस अखाड़े से पंचाग्री अखाड़ा, नागपंथी गोरखनाथ अखाड़ा, वैष्णव अखाड़ा पंचायती बढ़ा अखाड़ा भी इस अखाड़े स ताल्लुक रखते हैं।
जूना अखाड़ा
- यह अखाड़ा सन 1945 में उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में स्थापित हुआ था। इसे भैरव अखाड़ा भी कहते हैं। इनके ईष्टदेव रुद्रावतार दत्तात्रेय हैं। इनका केंद्र वाराणसी के हनुमान घाट पर भी है। हर साल इस अखाड़े के साधू सोरोंजी की शोभायात्रा की अगुवाई करते हैं।
नागासाधुओं की बात-
- सूकरक्षेत्र भगवान वराह का धाम है, यहां हर वर्ष अमृत कुम्भ के स्नानपर्वों में भाग लेने से परमसुख की अनुभूति होती है, अंत समय में प्राणी को मोक्ष की प्राप्ति होती है-रामजी दास, उत्तराखंड।
- सूकरक्षेत्र की पावन धरा पर भागीरथी गंगा, वृद्ध गंगा, हरिपदी गंगा की त्रिवेणी है, इस त्रिवेणी की धरती पर शोभयात्रा निकालकर गंगा स्नान सचमुच अद्भुत अकल्पनीय है- महंत सतगिरी, दिल्ली।
- करतब दिखाना हमारे कार्यक्रमों की प्राथमिकता रहती है। नागा साधुओं का रहन-सहन अलग तरीके का होता है। नागा साधु शोभायात्रा की पूरी तैयारी कर चुके हैं- महंत किशन गिरि, आवाहन अखाड़ा, हरियाणा।
- देश भर से नागा साधु सोरों में इकट्ठे हुए हैं। सोरोंजी की धरा पर हर साल साधु करतब दिखाते हैं। नागा साधु विश्व कल्याण की कामना के लिए शोभयात्रा निकालते हैं-महंत ओमगिरी, जूना अखाड़ा उत्तराखंड।
कर ली हैं तैयारियां
- शोभायात्रा के निर्धारित मार्गों का निरीक्षण अधीनस्थों से कराया है। शोभायात्रा के साथ पुलिस एवं पीएसी के जवान भ्रमण करेंगे। निर्धारित मार्गों पर जाम खुलवाने के लिए पुलिस के जवान तैनात रहेंगे- रोहन प्रमोद बोत्रे, एसपी।
देश में 16 अखाड़े बताए गए हैं। जिनमें सभी अखाड़ों का अलग अलग महत्व है। इनमें प्रमुख कुछ अखाड़े विशेष महत्व रखते हैं। पेश है कुछ अखाड़ों के महत्व की रिपोर्ट-
निरंजनी अखाड़ा
- यह अखाड़ा गुजरात के मांडवी में स्थापित हुआ था। इनके ईष्ट देव भगवान शंकर के पुत्र कार्तिक स्वामी हैं। इनमें दिगंबर स्वामी और महामंडलेश्वर होते हैं। इनकी शाखाएं, इलाहाबाद, उज्जैन, हरिद्वार, त्र्यंबकेश्वर व उदयपुर में हैं।
महानिर्वाणी अखाड़ा
- इस अखाड़े की स्थापना हरिद्वार में नीलधारा के पास हुई थी। इनके ईष्टदेव कपिल मुनि हैं। इसके अलावा इस अखाड़े से पंचाग्री अखाड़ा, नागपंथी गोरखनाथ अखाड़ा, वैष्णव अखाड़ा पंचायती बढ़ा अखाड़ा भी इस अखाड़े स ताल्लुक रखते हैं।
जूना अखाड़ा
- यह अखाड़ा सन 1945 में उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में स्थापित हुआ था। इसे भैरव अखाड़ा भी कहते हैं। इनके ईष्टदेव रुद्रावतार दत्तात्रेय हैं। इनका केंद्र वाराणसी के हनुमान घाट पर भी है। हर साल इस अखाड़े के साधू सोरोंजी की शोभायात्रा की अगुवाई करते हैं।
नागासाधुओं की बात-
- सूकरक्षेत्र भगवान वराह का धाम है, यहां हर वर्ष अमृत कुम्भ के स्नानपर्वों में भाग लेने से परमसुख की अनुभूति होती है, अंत समय में प्राणी को मोक्ष की प्राप्ति होती है-रामजी दास, उत्तराखंड।
- सूकरक्षेत्र की पावन धरा पर भागीरथी गंगा, वृद्ध गंगा, हरिपदी गंगा की त्रिवेणी है, इस त्रिवेणी की धरती पर शोभयात्रा निकालकर गंगा स्नान सचमुच अद्भुत अकल्पनीय है- महंत सतगिरी, दिल्ली।
- करतब दिखाना हमारे कार्यक्रमों की प्राथमिकता रहती है। नागा साधुओं का रहन-सहन अलग तरीके का होता है। नागा साधु शोभायात्रा की पूरी तैयारी कर चुके हैं- महंत किशन गिरि, आवाहन अखाड़ा, हरियाणा।
- देश भर से नागा साधु सोरों में इकट्ठे हुए हैं। सोरोंजी की धरा पर हर साल साधु करतब दिखाते हैं। नागा साधु विश्व कल्याण की कामना के लिए शोभयात्रा निकालते हैं-महंत ओमगिरी, जूना अखाड़ा उत्तराखंड।
कर ली हैं तैयारियां
- शोभायात्रा के निर्धारित मार्गों का निरीक्षण अधीनस्थों से कराया है। शोभायात्रा के साथ पुलिस एवं पीएसी के जवान भ्रमण करेंगे। निर्धारित मार्गों पर जाम खुलवाने के लिए पुलिस के जवान तैनात रहेंगे- रोहन प्रमोद बोत्रे, एसपी।