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#हिंदीहैंहम: सुहागनगरी के होनहारों को मिला हिंदी से सम्मान, कई मंचों पर सम्मानित हुई प्रतिभाएं
Mon, 07 Sep 2020 12:08 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 07 Sep 2020 12:08 AM IST
सार
हास्य कवि एवं व्यंगकार मनोज राजाताली कहते हैं कि मैने गणित से एमएससी करने के साथ शिक्षा शास्त्र से एमएड की डिग्री आगरा
विश्वविद्यालय से ली जिसमें टॉपटेन रहा। गणित-विज्ञान के विद्यार्थी होने के बावजूद हिंदी के प्रति लगाव एवं पागलपन हमेशा सवार रहा।
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#हिंदीहैंहम: संवाद कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने रखे विचार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिंदी आपस में मेलजोल बढ़ाती है। सुहागनगरी के कई होनहारों ने पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से की, लेकिन उनको सम्मान हिंदी के कारण मिला। वह कहते हैं कि हिंदी एक दूसरे को जोड़ने का काम करती है। हिंदी के मंच पर जाने के दौरान यह लोग खुद को भी गौरवान्वित महसूस करते हैं। अमर उजाला द्वारा व्हाट्सएप पर हुए संवाद के दौरान हिंदी के जानकारों ने अपनी राय रखी।
अंग्रेजी माध्यम से स्कूल से पढ़ाई करने वाली दाऊदयाल कॉलेज की मनोविज्ञान विभाग की प्रवक्ता डॉ. निधि गुप्ता कहती हैं कि मैने भले ही अंग्रेजी माध्यम स्कूल से पढ़ाई की, लेकिन हिंदी से मेरा लगाव शुरू से रहा। हिंदी हर किसी को जोड़ने का काम करती है। हिंदी में काव्यपाठ करने कई मंचों पर पहुंची, गंगा-जमुनी तहजीब को आगे बढ़ाने का काम हिंदी करती है।
डॉ. निधि कई हिंदी मंचों पर सम्मानित हो चुकी हैं। साहित्य सृजन संस्था में उपाध्यक्ष इसीलिए बनीं ताकि हिंदी को आगे बढ़ा सकूं। हिंदी में कविताएं लिखने का लगाव बढ़ा है। आने वाली पीढ़ी का हिंदी के प्रति रुझान बढ़े इसके लिए प्रतियोगिताएं भी कराई हैं।
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अंग्रेजी माध्यम से स्कूल से पढ़ाई करने वाली दाऊदयाल कॉलेज की मनोविज्ञान विभाग की प्रवक्ता डॉ. निधि गुप्ता कहती हैं कि मैने भले ही अंग्रेजी माध्यम स्कूल से पढ़ाई की, लेकिन हिंदी से मेरा लगाव शुरू से रहा। हिंदी हर किसी को जोड़ने का काम करती है। हिंदी में काव्यपाठ करने कई मंचों पर पहुंची, गंगा-जमुनी तहजीब को आगे बढ़ाने का काम हिंदी करती है।
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डॉ. निधि कई हिंदी मंचों पर सम्मानित हो चुकी हैं। साहित्य सृजन संस्था में उपाध्यक्ष इसीलिए बनीं ताकि हिंदी को आगे बढ़ा सकूं। हिंदी में कविताएं लिखने का लगाव बढ़ा है। आने वाली पीढ़ी का हिंदी के प्रति रुझान बढ़े इसके लिए प्रतियोगिताएं भी कराई हैं।
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हास्य कवि एवं व्यंगकार मनोज राजाताली कहते हैं कि मैने गणित से एमएससी करने के साथ शिक्षा शास्त्र से एमएड की डिग्री आगरा विश्वविद्यालय से ली जिसमें टॉपटेन रहा।
गणित-विज्ञान के विद्यार्थी होने के बावजूद हिंदी के प्रति लगाव एवं पागलपन हमेशा सवार रहा। हिंदी के उत्थान के लिए जिले में साक्षरता का वातावरण सृजन अभियान चलाया। हिंदी के नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से साक्षरता के प्रति जागरूकता अभियान चलाने के कारण जनवरी 1996 में तत्कालीन डीएम संजीव मित्तल ने सम्मानित किया था। उन्होंने सरल ब्रजभाषा में हास्य कुंडलियों को लिखा है। कई काव्य मंचों पर उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।
अनेक हिंदी रचनाओं को लिखने वाले 75 वर्षीय शास्त्री दयालुराम दयालु कहते हैं कि हिंदी ने हमें अलग पहचान दी। हिंदी से इतना लगाव था कि वह 1979 से लगातार रचनाओं के लिखते रहे हैं। साहित्य के सृजन करने की उन्हें ललक है। अभी तक उनकी छह रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं जबकि करीब आठ रचनाएं प्रकाशित होना अभी बाकी हैं।
गणित-विज्ञान के विद्यार्थी होने के बावजूद हिंदी के प्रति लगाव एवं पागलपन हमेशा सवार रहा। हिंदी के उत्थान के लिए जिले में साक्षरता का वातावरण सृजन अभियान चलाया। हिंदी के नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से साक्षरता के प्रति जागरूकता अभियान चलाने के कारण जनवरी 1996 में तत्कालीन डीएम संजीव मित्तल ने सम्मानित किया था। उन्होंने सरल ब्रजभाषा में हास्य कुंडलियों को लिखा है। कई काव्य मंचों पर उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।
अनेक हिंदी रचनाओं को लिखने वाले 75 वर्षीय शास्त्री दयालुराम दयालु कहते हैं कि हिंदी ने हमें अलग पहचान दी। हिंदी से इतना लगाव था कि वह 1979 से लगातार रचनाओं के लिखते रहे हैं। साहित्य के सृजन करने की उन्हें ललक है। अभी तक उनकी छह रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं जबकि करीब आठ रचनाएं प्रकाशित होना अभी बाकी हैं।