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#हिंदीहैंहम : हिंदी विषय के ज्ञान से बनाई समाज में अलग पहचान

Mon, 24 Aug 2020 08:47 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 24 Aug 2020 08:47 PM IST
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Amar Ujala Hindi Hai Hum Campaign Hindi teachers of Firozabad news
हिंदी हैं हम: अंजू गोयल, डॉ.निर्मला यादव, संध्या दुबे (क्रमश:) - फोटो : अमर उजाला
भले ही आज के अभिभावक अपने बच्चों को हिंदी माध्यम से पढ़ाने कतराते हो, लेकिन हिंदी सम्मान की भाषा है। फिरोजाबाद जिले में हिंदी विषय से जुड़े लोगों ने अपनी अलग ही पहचान बनाई है। हिंदी विषय की बदौलत सफल लोग भी कहते हैं कि हिंदी को अनिवार्य किया जाना चाहिए। लोगों को आवश्यकता है कि मातृ भाषा हिंदी का सम्मान करें।
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'हिंदी को बढ़ावा देने के लिए कर रहे कार्य'
दाऊदयाल महाविद्यालय में हिंदी विषय की अध्यापिका अंजू गोयल ने कहा कि हिंदी भाषा समाज में सम्मान दिलाती है। मैं अध्यापिका हूं, यहां भी सम्मान है। मैने समाज में अपनी पहचान बनाने के लिए काव्य क्षेत्र में अपना कदम बढ़ाया है। ताकि युवा पीढ़ी हिंदी के क्षेत्र में आगे आए और मातृ भाषा को बढ़ावा मिले। मैने हिंदी की किताबें लिखना शुरू की है। मुझे साहित्य संस्था द्वारा भी कई बार सम्मान मिल चुका है।
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'तीन किताबों का किया है प्रकाशन, हिंदी में कराए हैं सेमिनार'
महात्मा गांधी महिला महाविद्यालय में हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. संध्या दुबे हिंदी को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर राष्ट्रीय सेमिनार भी करातीं हैं। इसमें युवाओं के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ती हैं। साथ ही संध्या दुबे ने तीन किताबों का प्रकाशन भी किया है और तीन आना शेष हैं। वह कहती हैं कि हिंदी स्वयं ही सम्मान की भाषा है। इसे सीबीएसई, आईसीएसई में भी अनिवार्य करना चाहिए।
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'हिंदी विषय को चुना, आज बनी हूं प्राचार्य'
महात्मा गांधी महिला महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. निर्मला यादव ने कहा कि मैने हिंदी विषय में एमए और पीएचडी की थी। हिंदी विषय से ही मेरी नियुक्ति हुई थी और आज में प्राचार्य हूं। यूनिवर्सिटी हो या फिर कॉलेज या अन्य कोई भी मंच। हमेशा ही हिंदी का प्रयोग किया है। सम्मान पाने के लिए विषय का ज्ञान होना जरूरी है। अंग्रेजी का भी पूर्ण ज्ञान नहीं तो भी सम्मान नहीं पा सकते हैं। हिंदी के लिए ही युवाओं को प्रेरित करती हूं। 

'हिंदी को बढ़ावा देने पर मिला राष्ट्रपति पुरस्कार'
राजकीय स्कूल प्रधानाचार्य डॉ. सुरेंद्र कुमार ने हिंदी विषय से सफलता पाई। उन्होंने हिंदी विषय से एमए के बाद पीएचडी की। उनकी नियुक्ति हिंदी विषय के अध्यापक के रूप में हुई। हिंदी के प्रति युवाओं को प्रेरित किया। हमेशा नई-नई तकनीक का प्रयोग किया। यही कारण है कि उनको सन 2016 में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वह कहते हैं कि विषय कोई भी हो, उसका ज्ञान होना और नया करना सफलता दिलाता है।
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