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हिंदी हैं हम: हिंदी की बदौलत राष्ट्रपति के हाथों मिला सम्मान, राष्ट्रीय स्तर तक बनी पहचान
Sat, 22 Aug 2020 12:07 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 22 Aug 2020 12:07 AM IST
सार
- हिंदी के छात्र-छात्राओं ने वाद-विवाद प्रतियोगिता में जीते पुरस्कार, राष्ट्रीय स्तर तक बनी पहचान
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हिंदी हैं हम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिंदी भाषा के जरिये आगरा जिले के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। हिंदी की वाद-विवाद, काव्य पाठ, विचार गोष्ठी आदि प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर कई पुरस्कार जीत चुके हैं। राज्यपाल से लेकर राष्ट्रपति तक से सम्मान प्राप्त किया है। इनका कहना है कि हिंदी भाषा में भावों को अच्छे से रखा जा सकता है। इसी के कारण पुरस्कार उनके हिस्से में आए हैं। हिंदी से पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए रोजगार के भी तमाम अवसर हैं।
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राष्ट्रीय युवा संसद में प्रतिनिधित्व किया
बैकुंठी देवी कन्या महाविद्यालय की छात्रा जूही तिवारी ने राष्ट्रीय युवा संसद में प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने बताया कि हिंदी ने मुझे लक्ष्य पाने का हौसला दिया। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के 83वें दीक्षांत समारोह में आयोजित विचार गोष्ठी प्रतियोगिता में अव्वल आई। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से पुरस्कार प्राप्त किया। 84वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा से सम्मानित हुई।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में राष्ट्रीय युवा संसद में प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। राज्य स्तरीय वॉक प्रतियोगिता में मुख्यमंत्री से तृतीय पुरस्कार प्राप्त किया। अमर उजाला की राज्य स्तरीय विचार प्रवाह वाद-विवाद प्रतियोगिता में चौथा स्थान प्राप्त किया। चंडीगढ़ विवि की स्वरचित काव्यपाठ प्रतियोगिता में पहला स्थान प्राप्त किया। सब हिंदी की बदौलत है।
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वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में छोड़ी छाप
राजा बलवंत सिंह कॉलेज की छात्रा आयुषी तिवारी ने वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में अपनी छाप छोड़ी। आयुषी ने कहा कि हिंदी भाषा पर पकड़ ने मुझे आगे बढ़ाया। वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में अलग छाप छोड़ पाई। शैक्षणिक सत्र 2018-19 में लखनऊ विश्वविद्यालय व हेमवती नंदन बहुगुणा स्मृति समिति की ओर से आयोजित अंतर विश्वविद्यालयीय वाद-विवाद प्रतियोगिता में जिले स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया। स्वामी विवेकानंद के शिकागो सम्मेलन की स्मृति में आयोजित भाषण प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल किया। लगातार वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रही हूं। हिंदी ने मुझे मान दिलाया है।
राज्यपाल से तीन बार पुरस्कार प्राप्त किया
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में वर्ष 2014 से 2017 तक सांस्कृतिक टीम के सदस्य रहे आनंद कुमार ने दीक्षांत समारोह में वाद-विवाद, विचार गोष्ठी के विजेता के रूप में राज्यपाल से तीन बार पुरस्कार प्राप्त किया। वो वर्तमान में पंजाब विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे हैं। वर्ष 2015 में राष्ट्रीय वॉक प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। इसी वर्ष जामिया मिलिया विश्वविद्यालय में हुई राष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा अन्य कई प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीत चुके हैं। वह वर्तमान में पंजाब विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे हैं।
राज्यपाल से तीन बार पुरस्कार प्राप्त किया
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में वर्ष 2014 से 2017 तक सांस्कृतिक टीम के सदस्य रहे आनंद कुमार ने दीक्षांत समारोह में वाद-विवाद, विचार गोष्ठी के विजेता के रूप में राज्यपाल से तीन बार पुरस्कार प्राप्त किया। वो वर्तमान में पंजाब विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे हैं। वर्ष 2015 में राष्ट्रीय वॉक प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। इसी वर्ष जामिया मिलिया विश्वविद्यालय में हुई राष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा अन्य कई प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीत चुके हैं। वह वर्तमान में पंजाब विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे हैं।
हिंदी ने दिलाई पहचान, जीते पुरस्कार
सेंट जोंस कॉलेज के पूर्व छात्र अखिल कुमार चौधरी ने वर्ष 2017 के दीक्षांत समारोह में गंगाधर शास्त्री वाद-विवाद प्रतियोगिता के विजेता रहे हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पुरस्कृत किया। वर्ष 2018 के दीक्षांत समारोह में गांधी वॉक प्रतियोगिता जीतने पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह और राज्यपाल राम नाईक ने उन्हें सम्मानित किया।
लखनऊ विवि व हेमवंती नंदन बहुगुणा स्मृति समिति की ओर से आयोजित अंतर विश्वविद्यालयीय वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया था। तत्कालीन पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने 51 हजार रुपये का पुरस्कार दिया था। अखिल का कहना है कि हिंदी ने उन्हें पहचान दी है।
लखनऊ विवि व हेमवंती नंदन बहुगुणा स्मृति समिति की ओर से आयोजित अंतर विश्वविद्यालयीय वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया था। तत्कालीन पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने 51 हजार रुपये का पुरस्कार दिया था। अखिल का कहना है कि हिंदी ने उन्हें पहचान दी है।