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#हिंदीहैंहमः अर्थशास्त्र के प्रोफेसर को हुआ हिंदी से लगाव, लिखे उपन्यास और कहानियां...
Thu, 10 Sep 2020 12:06 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 10 Sep 2020 12:06 AM IST
सार
हिंदी से उन्हें इतना लगाव रहा कि उन्होंने आठ कहानी संग्रह लिखे जो प्रकाशित हुए। चार उपन्यास लिखे और एक नाटक लिखा। मध्य प्रदेश संस्कृति परिषद की ओर से सम्मानित किए जाने के साथ उत्तर प्रदेश सरकार ने साहित्य अकादमी का पुरस्कार से सम्मानित किया था।
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हिंदीहैंहमः व्हाट्सएप पर हुए संवाद में वक्ताओं ने रखे विचार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिंदी का विस्तार दिन प्रतिदिन हो रहा है। अर्थशास्त्र पढ़ाने वाले प्रोफेसर को हिंदी से इतना लगाव हुआ कि कई रचनाएं, उपन्यास के साथ कहानियां लिख डालीं। मध्य प्रदेश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश सरकार ने भी उन्हें सम्मानित किया।
आज भी हिंदी की अलख जगाने का काम कर रहे हैं। वह कहते हैं कि हिंदी की रचनात्मकता और उसके शब्दों का भाव ही सब कुछ कह जाता है। अमर उजाला द्वारा व्हाट्सएप पर हुए संवाद में हिंदी के जानकारों ने अपनी राय रखी।
अर्थशास्त्र से एमए एवं एमकॉम करने वाले जीवाजी यूनीवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रवक्ता रहे मितावली निवासी पुन्नी सिंह को सही पहचान हिंदी ने दिलाई। हिंदी से उन्हें इतना लगाव रहा कि उन्होंने आठ कहानी संग्रह लिखे जो प्रकाशित हुए। चार उपन्यास लिखे और एक नाटक लिखा। मध्य प्रदेश संस्कृति परिषद की ओर से सम्मानित किए जाने के साथ उत्तर प्रदेश सरकार ने साहित्य अकादमी का पुरस्कार से सम्मानित किया था। पुन्नी सिंह कहते हैं कि हिंदी वह भाषा है जिसका हर मंच पर सम्मान होता है। देश ही नहीं बल्कि विदेशों में हिंदी का सम्मान बढ़ा है।
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आज भी हिंदी की अलख जगाने का काम कर रहे हैं। वह कहते हैं कि हिंदी की रचनात्मकता और उसके शब्दों का भाव ही सब कुछ कह जाता है। अमर उजाला द्वारा व्हाट्सएप पर हुए संवाद में हिंदी के जानकारों ने अपनी राय रखी।
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अर्थशास्त्र से एमए एवं एमकॉम करने वाले जीवाजी यूनीवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रवक्ता रहे मितावली निवासी पुन्नी सिंह को सही पहचान हिंदी ने दिलाई। हिंदी से उन्हें इतना लगाव रहा कि उन्होंने आठ कहानी संग्रह लिखे जो प्रकाशित हुए। चार उपन्यास लिखे और एक नाटक लिखा। मध्य प्रदेश संस्कृति परिषद की ओर से सम्मानित किए जाने के साथ उत्तर प्रदेश सरकार ने साहित्य अकादमी का पुरस्कार से सम्मानित किया था। पुन्नी सिंह कहते हैं कि हिंदी वह भाषा है जिसका हर मंच पर सम्मान होता है। देश ही नहीं बल्कि विदेशों में हिंदी का सम्मान बढ़ा है।
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दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से हिंदी में एमफिल, पीएचडी करने के बाद नारायण कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर महेश आलोक कहते हैं हिंदी ने मुझे नई पहचान दी। समकालीन हिंदी कविता लिखने का मुझे शुरूआत से शौक रहा। उनकी कविताएं कई पत्र-पत्रकिाओं में प्रकाशित हो चुकीं है।
उनका पहला हिंदी कविता संग्रह वर्ष 2000 में प्रकाशित हुआ तो दूसरा 2017 में। प्रदेश सरकार की ओर से विश्वविद्यालय साहित्यकार सम्मान से सम्मानित हो चुके आलोक कहते हैं कि पाखी पत्रिका की ओर से शब्द साधक कविता सम्मान के साथ कई संस्थाओं ने सम्मानित किया। मूलरूप से बनारस के निवासी महेश आलोक कहते हैं कि हिंदी समाज में रचनात्मकता लाने का काम करती है।
अंग्रेजी माध्यम स्कूल में हिंदी की अलख जगा रहीं उर्मिला कहती हैं कि माना कि अंग्रेजी की ओर युवा दौड़ रहे हैं, लेकिन जो रचनात्मक्ता एवं भाव हिंदी में आते हैं वह किसी अन्य भाषा में नहीं है। मैं खुश हूं कि मैं हिंदी का ज्ञान छात्र-छात्राओं को बांट रही हूं। संधि विच्छेद, मुहावरों का अर्थ समझना और समझाना अपने आप में कुछ अलग ही है। वैसे भी हिंदी को दुनियां के विभिन्न देशों में भी काफी बढ़ावा मिला है।
उनका पहला हिंदी कविता संग्रह वर्ष 2000 में प्रकाशित हुआ तो दूसरा 2017 में। प्रदेश सरकार की ओर से विश्वविद्यालय साहित्यकार सम्मान से सम्मानित हो चुके आलोक कहते हैं कि पाखी पत्रिका की ओर से शब्द साधक कविता सम्मान के साथ कई संस्थाओं ने सम्मानित किया। मूलरूप से बनारस के निवासी महेश आलोक कहते हैं कि हिंदी समाज में रचनात्मकता लाने का काम करती है।
अंग्रेजी माध्यम स्कूल में हिंदी की अलख जगा रहीं उर्मिला कहती हैं कि माना कि अंग्रेजी की ओर युवा दौड़ रहे हैं, लेकिन जो रचनात्मक्ता एवं भाव हिंदी में आते हैं वह किसी अन्य भाषा में नहीं है। मैं खुश हूं कि मैं हिंदी का ज्ञान छात्र-छात्राओं को बांट रही हूं। संधि विच्छेद, मुहावरों का अर्थ समझना और समझाना अपने आप में कुछ अलग ही है। वैसे भी हिंदी को दुनियां के विभिन्न देशों में भी काफी बढ़ावा मिला है।