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अमर उजाला फाउंडेशनः जारी है जरूरतमंदों की मदद, बस्ती-बस्ती जाकर पहुंचाया भोजन
Tue, 31 Mar 2020 12:01 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 31 Mar 2020 12:01 AM IST
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अमर उजाला फाउंडेशन ने समाजसेवी संस्था सेवा के जरिए पहुंचाई मदद
- फोटो : अमर उजाला
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लॉकडाउन में अमर उजाला फाउंडेशन ने समाजसेवी संस्थाओं के जरिए जरूरतमंदों को भोजन मुहैया कराने का सिलसिला सोमवार को भी जारी रखा। इस दौरान नगला पत्थर घोड़ा और आवास विकास सेक्टर 12 डी की मलिन बस्तियों में 250 घरों में भोजन के पैकेट वितरित किए गए। इन्हें पाकर लोगों ने कहा, शुक्रिया अमर उजाला, जो मुसीबत के समय में मदद की।
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रविवार को अमर उजाला कार्यालय के पास ही एक हजार मजदूरों को भोजन के पैकेट दिए गए थे। ये लोग अपने घरों को जा रहे थे। इनके लिए चाय-पानी का इंतजाम भी किया गया था। सोमवार को बस्ती-बस्ती जाकर भोजन मुहैया कराया गया।
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इन्होंने की मदद
सेवा आगरा संस्था के अध्यक्ष मुरारी लाल गुप्ता, संस्थापक सुमन गोयल, उपाध्यक्ष श्याम गुप्ता, महासचिव हरिओम गोयल, कोषाध्यक्ष प्रतीक बंसल मौजूद रहे। मुरारीलाल गोयल और सुमन गोयल ने कहा कि सेवा का यह सिलसिला अनवरत जारी रहेगा।
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बस्तियों में आटे का संकट है, मजदूरी बंद होने से पैसा भी नहीं है, अमर उजाला ने हमारा ख्याल रखा, शुक्रिया। - फिरदौस
सब कुछ बंद है, अब तो मददगारों के भरोसे ही हमारी जिंदगी है, आज घर बैठे ही भोजन आ गया। - लांगुरिया
यह मुश्किल भरा समय है, आगरा के समाजसेवी इसमें गरीबों की बड़ी मदद कर रहे हैं। - मुबीना
पूरा परिवार मजदूरी करता है, लेकिन अब काम बंद है। भोजन मिल जाता है तो बड़ी राहत मिलती है। - ऊषा
बाहर नहीं निकलना चाहते लेकिन भोजन की तलाश में निकलना पड़ता है। आज तो घर पर ही भोजन मिल गया। - संजू
सुबह से इसी उम्मीद में बैठे थे कि कहीं से भोजन का इंतजाम हो। तभी भोजन के पैकेट घर के बाहर ही वितरित होने लगे, बड़ी राहत मिली। - शाकिर
सब कुछ बंद है, अब तो मददगारों के भरोसे ही हमारी जिंदगी है, आज घर बैठे ही भोजन आ गया। - लांगुरिया
यह मुश्किल भरा समय है, आगरा के समाजसेवी इसमें गरीबों की बड़ी मदद कर रहे हैं। - मुबीना
पूरा परिवार मजदूरी करता है, लेकिन अब काम बंद है। भोजन मिल जाता है तो बड़ी राहत मिलती है। - ऊषा
बाहर नहीं निकलना चाहते लेकिन भोजन की तलाश में निकलना पड़ता है। आज तो घर पर ही भोजन मिल गया। - संजू
सुबह से इसी उम्मीद में बैठे थे कि कहीं से भोजन का इंतजाम हो। तभी भोजन के पैकेट घर के बाहर ही वितरित होने लगे, बड़ी राहत मिली। - शाकिर