Amar Ujala Foundation: आगरा में विश्व रक्तदान दिवस पर यहां लगे शिविर, रक्तदान कर बनें महादानी
अमर उजाला कार्यालय गुरुद्वारा गुरु के ताल, एसएन मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक और जिला अस्पताल ब्लड बैंक में शिविर लगा है।
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रक्त के अभाव में किसी मरीज का इलाज प्रभावित न हो, इसके लिए कदम बढ़ाएं और रक्तदान करें। महादान के पर्व विश्व रक्तदान दिवस के मौके पर मंगलवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से अमर उजाला कार्यालय गुरुद्वारा गुरु के ताल, एसएन मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक और जिला अस्पताल ब्लड बैंक में शिविर लगा है। शिविर सुबह नौ बजे से शुरू हो गए। अमर उजाला कार्यालय में अपराह्न तीन बजे तक और एसएन, जिला अस्पताल में शाम पांच बजे तक शिविर चलेंगे। महादानियों को फाउंडेशन की ओर से प्रशस्ति पत्र भी दिया जाएगा।
बढ़ी जागरूकता, अब नहीं झिझकते लोग
औषधि निरीक्षक राजकुमार शर्मा का कहना है कि रक्तदान के लिए लोगों में चेतना जागी है। अब लोग रक्त देने में झिझकते नहीं हैं। कई ऐसे भी महादानी हैं, जो जरूरतमंद के लिए किसी भी वक्त रक्त देने के लिए तैयार हैं। इनमें महिलाएं भी हैं। जिले में 18 ब्लड बैंक हैं और 10 साल में रक्तदान करने वालों की संख्या 80 फीसदी से अधिक बढ़ गई है।
42 साल उम्र, 41 बार कर चुके हैं महादान
ताजगंज के 42 साल के विजय बंसल अभी तक 41 बार रक्तदान कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि पहली बार वर्ष 2005 में अपने रिश्तेदार के ऑपरेशन के लिए रक्तदान किया। पहली बार में डर लगा, अब झिझक नहीं रही है। 17 साल से वह रक्तदान कर रहे हैं। जब भी किसी को आपात स्थिति में रक्त की जरूरत पड़ती है तो वह सबसे पहले कदम बढ़ाते हैं।
19 साल में किया था पहली बार रक्तदान
बल्केश्वर के 40 साल के मोहित अग्रवाल ने बताया कि उनकी उम्र करीब 19 साल की थी, तब एक व्यक्ति को रक्त के लिए परेशान होते देखा। उसके परिजन का ऑपरेशन होना था, एक यूनिट की व्यवस्था नहीं हो पा रही थी। तब उन्होंने रक्तदान किया था। इसके बाद से रक्तदान के लिए अभियान चला रहे हैं। 35 बार रक्तदान कर चुके हैं।
थैलेसीमिया पीड़ित के लिए दिया था रक्त
यमुनोत्री कॉलोनी कमला नगर निवासी 28 वर्षीय दीक्षा साधवानी अब तक 11 बार रक्तदान कर चुकी हैं। उनके पड़ोस में थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चे के लिए उन्होंने पहली बार रक्तदान किया था। दस साल पहले की बात है। बच्चे के लिए जरूरत पड़ने पर व्यवस्था नहीं हुई तो उन्होंने रक्तदान किया। उनका मानना है कि ऐसे और भी बच्चे होंगे, जिनको रक्त की जरूरत पड़ती होगी, यही सोचकर वह रक्तदान करती हैं।