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जागरुकता: 'कोई गलत ढंग से छुए तो डरना नहीं बच्चों, जोर से चिल्लाएं, मम्मी-पापा को बताएं'
Mon, 12 Jul 2021 09:06 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 12 Jul 2021 09:06 AM IST
सार
आगरा की कावेरी कौस्तुभ आवासीय सोसाइटी में अमर उजाला के ‘बाल यौन शोषण अब बस...’ कार्यक्रम के तहत अभिभावक और बच्चों को जागरूक किया गया।
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कार्यक्रम को संबोधित करतीं विनीता कुलश्रेष्ठ।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बच्चों कोई आपको गलत ढंग से छुए, तो कतई न डरें और जोर से चिल्लाएं। दौड़कर मम्मी-पापा को भी यह बताएं। ऐसा करोगे तो गंदी हरकत करने वाले अंकल ही आपसे डर जाएंगे और फिर कभी ऐसा करने की हिमाकत नहीं करेंगे। रविवार को यह बातें जानकारों ने अमर उजाला के कार्यक्रम ‘बाल यौन शोषण अब बस...’ के जरिये कावेरी कौस्तुभ आवासीय सोसाइटी में बच्चों को समझाईं।
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वक्ताओं से बच्चों और उनके परिजनों ने भी तमाम प्रश्न कर यौन शोषण, कानून और बचाव के बारे में जानकारी की। राजकीय बाल गृह शिशु प्रभारी मुकेश चौधरी, समाजसेवी शीतल अग्रवाल, हिंदू जागरण मंच के प्रदेश अध्यक्ष राजेश खुराना ने यौन शोषण के खिलाफ जागरूकता के साथ ही बच्चों को शिक्षित करने पर भी जोर दिया।
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बच्चों को बैड टच, गुड टच की शिक्षा जरूर देंः विनीता
मुख्य अतिथि बाल कल्याण समिति की सदस्य की न्यायिक दंडाधिकारी विनीता कुलश्रेष्ठ ने कहा कि बालिका ही नहीं बालकों के साथ भी यौन शोषण हो रहा है, ऐसे में दोनों को समान रूप से बैड टच और गुड टच के बारे में जरूर जानकारी दें।
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शोषण से बच्चों में डिप्रेशन का खतरा: डॉ. दिनेश
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के प्रमुख अधीक्षक डॉ. दिनेश राठौर ने बताया कि यौन शोषण के शिकार बच्चों में डिप्रेशन का खतरा वयस्कों के मुकाबले अधिक रहता है। ऐसे बच्चों को साइको थेरेपी की जरूरत होती है। बच्चे के व्यवहार में बदलाव आए तो अभिभावक सतर्क हो जाएं।
'सावधानी की जानकारी मिली '
वंदना सिंह ने कहा कि अखबारों में बाल यौन शोषण की घटनाओं की जानकारी पर मन में बच्चों की सुरक्षा के लिए चिंतित रहते हैं। इस कार्यक्रम से कानून और सावधानी की जानकारी मिली है।
'मम्मी-पापा को बताऊंगी'
नैंन्शिया सिंह ने कहा कि बैड टच और गुड टच क्या होता है, इसकी जानकारी कार्यक्रम में मिली। अब किसी के भी गलत ढंग से छूने पर चिल्लाकर मम्मी-पापा को बताऊंगी।
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के प्रमुख अधीक्षक डॉ. दिनेश राठौर ने बताया कि यौन शोषण के शिकार बच्चों में डिप्रेशन का खतरा वयस्कों के मुकाबले अधिक रहता है। ऐसे बच्चों को साइको थेरेपी की जरूरत होती है। बच्चे के व्यवहार में बदलाव आए तो अभिभावक सतर्क हो जाएं।
'सावधानी की जानकारी मिली '
वंदना सिंह ने कहा कि अखबारों में बाल यौन शोषण की घटनाओं की जानकारी पर मन में बच्चों की सुरक्षा के लिए चिंतित रहते हैं। इस कार्यक्रम से कानून और सावधानी की जानकारी मिली है।
'मम्मी-पापा को बताऊंगी'
नैंन्शिया सिंह ने कहा कि बैड टच और गुड टच क्या होता है, इसकी जानकारी कार्यक्रम में मिली। अब किसी के भी गलत ढंग से छूने पर चिल्लाकर मम्मी-पापा को बताऊंगी।
'अब सभी को जागरूक करूंगा'
हिमांक्ष सचदेवा ने कहा कि अमर उजाला के कार्यक्रम में बैड टच और गुड टच के बारे में जानकारी मिली। अब यह सभी जानकारी अपने दोस्तों को देकर जागरूक करूंगा।
'प्रश्नों का मिल गया जवाब'
अदविक ने कहा कि मन में जो भी प्रश्न थे, उनका इस कार्यक्रम में जवाब मिल गया। कार्यक्रम से काफी जानकारी मिली है। अब कोई भी गलत हरकत करेगा तो डरूंगी नहीं।
बच्चों में ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सचेत
- गुमसुम रहना, गुस्सा करना, चिड़चिड़ापन, हिंसक होना।
- स्कूल जाने में अरुचि, दोस्तों से मिलने या फिर खेलने न जाना।
- सामाजिक गतिविधियों से दूर रहना, अकेले रहना।
ये सावधानी बरतें
- बच्चों को गुड टच, बेड टच के बारे में जानकारी दें।
- बच्चों से मित्रवत होकर स्कूली गतिविधियों के बारे में पूछें।
- अनजान लोगों के बीच में बच्चे को अकेला न छोड़ें।
- सामूहिक कार्यक्रमों जाते वक्त बच्चों के साथ ही रहें।
हिमांक्ष सचदेवा ने कहा कि अमर उजाला के कार्यक्रम में बैड टच और गुड टच के बारे में जानकारी मिली। अब यह सभी जानकारी अपने दोस्तों को देकर जागरूक करूंगा।
'प्रश्नों का मिल गया जवाब'
अदविक ने कहा कि मन में जो भी प्रश्न थे, उनका इस कार्यक्रम में जवाब मिल गया। कार्यक्रम से काफी जानकारी मिली है। अब कोई भी गलत हरकत करेगा तो डरूंगी नहीं।
बच्चों में ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सचेत
- गुमसुम रहना, गुस्सा करना, चिड़चिड़ापन, हिंसक होना।
- स्कूल जाने में अरुचि, दोस्तों से मिलने या फिर खेलने न जाना।
- सामाजिक गतिविधियों से दूर रहना, अकेले रहना।
ये सावधानी बरतें
- बच्चों को गुड टच, बेड टच के बारे में जानकारी दें।
- बच्चों से मित्रवत होकर स्कूली गतिविधियों के बारे में पूछें।
- अनजान लोगों के बीच में बच्चे को अकेला न छोड़ें।
- सामूहिक कार्यक्रमों जाते वक्त बच्चों के साथ ही रहें।