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अमर उजाला अभियान: मंगलेश्वर के लाल ताल का दर्द..., लौटा दो मेरी रंगत

Mon, 16 May 2022 01:54 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Mon, 16 May 2022 01:54 PM IST
सार

तालाब के पास नाथ संप्रदाय का प्राचीन मंगलेश्वर नाथ मंदिर स्थित है। इसलिए इस तालाब को ताल मंगलेश्वर नाम से भी जाना जाता है। कभी ये तालाब गुलजार रहता था, लेकिन अब  ये तालाब सूखा पड़ा है। परिसर में गंदगी रहती है।
 

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Amar ujala abhiyan Tal Mangaleshwar red stone paved choker pond Balka basti is a victim of rudeness
गोकुलपुरा का ताल मंगलेश्वर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शहर के बीच गोकुलपुरा की घनी बल्का बस्ती में बना लाल पत्थर का पक्का तालाब बेरुखी का शिकार है। लोग इस तालाब को ताल मंगलेश्वर नाम से जानते हैं। यहां पूर्व में लगाई गईं बेंच टूट गई हैं। तालाब सूखा पड़ा है। परिसर में गंदगी रहती है। सूने पड़े मेहराबदार दरवाजे, दीवारों पर बनीं धार्मिक आकृतियां, चारों कोनों पर खड़ी बुर्जियों को यहां रौनक लौटने का इंतजार है।

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बल्का बस्ती निवासी शिक्षाविद् जानी बिहार लाल ने 19वीं सदी में इस तालाब का निर्माण कराया था। उनसे प्रभावित होकर भरतपुर के राजा ने उन्हें राजा की उपाधि दी। जोधपुर सियासत का वकील नियुक्त किया था। तब उन्होंने बल्का बस्ती में लाल पत्थर से इस बेजोड़ तालाब को बनवाया। नाम रखा ताल मंगलेश्वर। पर्यावरणविद् एवं क्षेत्रीय निवासी राजीव सक्सेना ने बताया कि इस ताल का निर्माण 1888 में हुआ होगा। तभी शहर में वाटर वर्क्स बना था। इस तालाब को भरने के लिए पानी का कनेक्शन लिया गया। चौकोर आकृति के इस पक्के तालाब पर चारों तरफ 16-16 सीढ़ियां हैं। चारों तरफ दीवार है। चार मेहराबदार पत्थर के दरवाजे हैं। तालाब में बरसात का पानी इकट्ठा होने से पूरे क्षेत्र का भूजल स्तर बढ़ता था।

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18 साल पहले हुए थे संरक्षण के प्रयास

क्षेत्रीय निवासी 80 वर्षीय श्रीलाल यादव ने बताया कि वर्ष 2004 में आखिरी बार इस तालाब के संरक्षण के प्रयास हुए थे। तत्कालीन सांसद राज बब्बर के सहयोग से तालाब की दीवारों पर लोहे की ग्रिल लगाई गई थीं। मरम्मत कराई, जो पत्थर उखड़ गए थे उन्हें जोड़ा गया था। बेंच पड़ी थीं।

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मछलियां रखती थीं ताल को साफ

सिविल सोसायटी सदस्य दिवाकर तिवारी ने बताया कि ताल मंगलेश्वर के पास पहले अखाड़ा होता था। पहलवानी करने के बाद लोग इस तालाब में स्नान करते थे। तालाब में मछलियां थीं, जो तालाब की गंदगी को खा जाती थीं। ताल साफ रहता था। अब भी यहां प्राचीन गणगौर पूजन होता है। झूलन एकादशी पर महिलाएं अपने आराध्य को झुलाती हैं। इस तालाब की जो रंगत थी वो लौटनी चाहिए।


नाथ संप्रदाय का प्राचीन मंदिर

तालाब के पास नाथ संप्रदाय का प्राचीन मंदिर मंगलेश्वर नाथ स्थित है। जहां नियमित पूजा-पाठ होता है। गोरखपुर पीठ से संबंधित इस मंदिर का प्रबंधन कानों में कुंडल पहनने वाले योगियों के हाथों में है। लोगों की मान्यता है कि क्षेत्र में बल्का बस्ती नाम से मोहल्ला बाबा बालकनाथ के नाम पर बसी है।

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