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...तो घर से थैला लेकर ही निकलें
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
Updated Sun, 20 Dec 2015 02:27 AM IST
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प्रदेश में पॉलीथिन पर प्रतिबंध के संबंध में नगर निगम को भले ही शासनादेश न मिला हो, लेकिन दुकानदारों ने जुर्माने और जेल जाने से बचने के लिए विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है। बहुत से दुकानदारों और ठेलेवालों ने पॉलीथिन रखना ही बंद दिया है। बता दें कि प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को पॉलीथिन प्रतिबंधित करने का फैसला लिया। इस आदेश की जानकारी के बाद से लोग चिंता में पड़ गए। वहीं, दुकानदारों ने अभी से ऐहतियात बरतना शुरू कर दिया। लोगों को कहना है कि अब बाजार से सामान लाने के लिए उन्हें घर से ही कोई बंदोबस्त करके निकलना पड़ेगा।
2010 में उठी थी पालीथिन के खिलाफ आवाज
आगरा। प्रदेश सरकार ने पालीथिन को प्रतिबंधित करने का फैसला अब सुनाया, लेकिन आगरावासियों ने 2010 में ही पालीथिन के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी थी। तत्कालीन नगर आयुक्त विनय शंकर पांडे के नेतृत्व में नगर निगम ने पहले जागरूकता अभियान चलाया था और उसके बाद पालीथिन के प्रयोग प्रतिबंधित कर दिया गया था। पालीथिन के खिलाफ यहां करीब 19 किलोमीटर लंबी एतिहासिक मानव शृंखला बनाई थी। शहर में लगभग पालीथिन खत्म हो गई थी। बड़ी दुकानें क्या, ठेल वालों ने पालीथिन रखना बंद कर दिया था। लोग घरों से थैला लेकर निकलने लगे थे। लेकिन बाद में सब भूल गए।
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2010 में उठी थी पालीथिन के खिलाफ आवाज
आगरा। प्रदेश सरकार ने पालीथिन को प्रतिबंधित करने का फैसला अब सुनाया, लेकिन आगरावासियों ने 2010 में ही पालीथिन के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी थी। तत्कालीन नगर आयुक्त विनय शंकर पांडे के नेतृत्व में नगर निगम ने पहले जागरूकता अभियान चलाया था और उसके बाद पालीथिन के प्रयोग प्रतिबंधित कर दिया गया था। पालीथिन के खिलाफ यहां करीब 19 किलोमीटर लंबी एतिहासिक मानव शृंखला बनाई थी। शहर में लगभग पालीथिन खत्म हो गई थी। बड़ी दुकानें क्या, ठेल वालों ने पालीथिन रखना बंद कर दिया था। लोग घरों से थैला लेकर निकलने लगे थे। लेकिन बाद में सब भूल गए।
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