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अब हाईकोर्ट में होगी यमुना खादर में निर्माण की सुनवाई
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वृंदावन (मथुरा)। यमुना के खादर में सड़क सहित अन्य निर्माण के मामले की सुनवाई अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में होगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हाईकोर्ट में यह मामला लंबित होने के कारण यह फैसला दिया है।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल, जस्टिस एस.पी वांगडी और एक्सपर्ट मेम्बर नगिन नंदा की पीठ ने आकाश वशिष्ठ की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उप्र सिंचाई विभाग और जिलाधिकारी मथुरा से रिपोर्ट तलब की गई, जिसमें वृंदावन में चीरघाट, गोविंद घाट और भ्रमर घाट पर बनाए गए 300 मीटर रोड को यमुना के खादर को पाटकर बनाने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण द्वारा एनजीटी में रिपोर्ट दाखिल कर रोड को धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए फ्लड प्लेन जोन से बाहर बताया गया।
दूसरी ओर एनजीटी को यह भी अवगत कराया गया कि इस मामले की इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा भी जनहित याचिका में निगरानी की जा रही है। ऐसे में एनजीटी ने वाद को आगे जारी रखना औचित्यपूर्ण नहीं माना। इसके साथ ही एनजीटी ने प्राधिकरण को खादर को पाटकर मलबे को हटाना सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। एनजीटी के इस आदेश को स्वामी कृष्णानंद ने अपनी जीत बताया है। उन्होंने कहा कि इससे अब खादर में हुए निर्माण पर एनजीटी की कार्रवाई नहीं होगी। इस मौके पर मोहिनी बिहारी शरण, आचार्य बद्रीश भी मौजूद रहे।
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जस्टिस आदर्श कुमार गोयल, जस्टिस एस.पी वांगडी और एक्सपर्ट मेम्बर नगिन नंदा की पीठ ने आकाश वशिष्ठ की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उप्र सिंचाई विभाग और जिलाधिकारी मथुरा से रिपोर्ट तलब की गई, जिसमें वृंदावन में चीरघाट, गोविंद घाट और भ्रमर घाट पर बनाए गए 300 मीटर रोड को यमुना के खादर को पाटकर बनाने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण द्वारा एनजीटी में रिपोर्ट दाखिल कर रोड को धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए फ्लड प्लेन जोन से बाहर बताया गया।
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दूसरी ओर एनजीटी को यह भी अवगत कराया गया कि इस मामले की इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा भी जनहित याचिका में निगरानी की जा रही है। ऐसे में एनजीटी ने वाद को आगे जारी रखना औचित्यपूर्ण नहीं माना। इसके साथ ही एनजीटी ने प्राधिकरण को खादर को पाटकर मलबे को हटाना सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। एनजीटी के इस आदेश को स्वामी कृष्णानंद ने अपनी जीत बताया है। उन्होंने कहा कि इससे अब खादर में हुए निर्माण पर एनजीटी की कार्रवाई नहीं होगी। इस मौके पर मोहिनी बिहारी शरण, आचार्य बद्रीश भी मौजूद रहे।
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