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हाईकोर्ट ने लगाई रजिस्ट्रार को फटकार, पूछा- क्यों न विश्वविद्यालय को परीक्षा कराने से रोका जाए
Thu, 25 Apr 2019 08:54 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 25 Apr 2019 08:54 AM IST
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा
आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को तलब कर फटकार लगाई तथा कॉपियां नए सिरे से जांचने के लिए मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज इलाहाबाद को भेज दीं।
कोर्ट ने पूछा, क्यों न विश्वविद्यालय के खिलाफ गंभीर कार्रवाई की जाए ? क्या उनको परीक्षाएं आयोजित करने से रोक दिया जाए? ताकि इस प्रकार से छात्रों का भविष्य न बर्बाद हो।
मेडिकल छात्र देवर्शनाथ गुप्ता की याचिका पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की पीठ ने सुनवाई की। याची के अधिवक्ता जेन अब्बास का कहना था कि याची ने फिजियोलॉजी के पेपर में कम अंक मिलने पर आरटीआई में अपनी कॉपी मांगी थी।
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कोर्ट ने पूछा, क्यों न विश्वविद्यालय के खिलाफ गंभीर कार्रवाई की जाए ? क्या उनको परीक्षाएं आयोजित करने से रोक दिया जाए? ताकि इस प्रकार से छात्रों का भविष्य न बर्बाद हो।
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मेडिकल छात्र देवर्शनाथ गुप्ता की याचिका पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की पीठ ने सुनवाई की। याची के अधिवक्ता जेन अब्बास का कहना था कि याची ने फिजियोलॉजी के पेपर में कम अंक मिलने पर आरटीआई में अपनी कॉपी मांगी थी।
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याची की दलील सही निकली
विश्वविद्यालय से कॉपी मिलने पर पता चला कि उसकी उत्तर पुस्तिका में कई प्रश्न जांचे ही नहीं गए हैं और दो उत्तरों में मात्र दो-दो अंक दिए गए हैं। कोर्ट के समक्ष कॉपियां प्रस्तुत की गईं तो याची की दलील सही निकली।
इस पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने कहा कि हमें नहीं पता कि विश्वविद्यालय से ऐसी गलती कैसे हुई, जिससे किसी छात्र का भविष्य बर्बाद हो जाए। यह वास्तव में हैरान करने वाली बात है। कोर्ट का कहना था कि इस प्रकार की गलती वास्तव में विश्वविद्यालय द्वारा किया गया फ्रॉड है।
26 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई
अदालत के निर्देश पर रजिस्ट्रार उपस्थित हुए। उन्होंने मूल उत्तर पुस्तिका प्रस्तुत की, जिसमें वही गलतियां थीं। कोर्ट ने उत्तर पुस्तिका को तीन सेट में अलग-अलग तीन सील बंद लिफाफे में रखकर प्राचार्य मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज इलाहाबाद को भेजने का निर्देश दिया है।
उनको आदेश दिया कि कॉपियों का फिजियोलॉजी के तीन विशेषज्ञों से अलग-अलग मूल्यांकन कराकर अदालत को सूचित किया जाए। याचिका पर 26 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी।
इस पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने कहा कि हमें नहीं पता कि विश्वविद्यालय से ऐसी गलती कैसे हुई, जिससे किसी छात्र का भविष्य बर्बाद हो जाए। यह वास्तव में हैरान करने वाली बात है। कोर्ट का कहना था कि इस प्रकार की गलती वास्तव में विश्वविद्यालय द्वारा किया गया फ्रॉड है।
26 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई
अदालत के निर्देश पर रजिस्ट्रार उपस्थित हुए। उन्होंने मूल उत्तर पुस्तिका प्रस्तुत की, जिसमें वही गलतियां थीं। कोर्ट ने उत्तर पुस्तिका को तीन सेट में अलग-अलग तीन सील बंद लिफाफे में रखकर प्राचार्य मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज इलाहाबाद को भेजने का निर्देश दिया है।
उनको आदेश दिया कि कॉपियों का फिजियोलॉजी के तीन विशेषज्ञों से अलग-अलग मूल्यांकन कराकर अदालत को सूचित किया जाए। याचिका पर 26 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी।