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भूखों को खाली पेट नहीं सोने देते ये रोटी वाले बाबा, शाम होते ही जल उठते हैं चूल्हे

Mon, 21 May 2018 03:30 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला मथुरा Updated Mon, 21 May 2018 03:30 PM IST
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allahabad baba ramdas providing food to poor people
भोजन बनाते बाबा रामदास व अन्य साधु - फोटो : अमर उजाला
मथुरा के गोवर्धन में गिरिराज परिक्रमा मार्ग पर अब कोई भी बेसहारा संत यात्री भूखा नहीं सोता है। रोटी वाले बाबा चूल्हे पर भोजन बनाकर बेसहारों और भूखों का खाली पेट भर रहे हैं। 
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रोटी वाले बाबा भोजनालय की व्यवस्था कुसुम सरोवर पर बाबा रामदास द्वारा की जा रही है। बाबा ने एक पेड़ के नीचे चूल्हा बना रखा है, उसी जगह अपने हाथों से गरीबों का पेट भरने के लिए भोजन बना कर तैयार करते हैं। 
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बाबा रामदास इलाहाबाद के रहने वाले हैं। बताते हैं कि बाबा की इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने दाल-बाटी की दुकान थी। उनकी दुकान पर 30 कर्मचारी काम किया करते थे।
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घर-परिवार छोड़ बन गए सन्यासी

उनके मुताबिक एक दिन उनकी दुकान पर साधु आया। वो कई दिनों से भूखा था। उसने भोजन मांगा। उसे भरपेट भोजन कराया गया। एक भूखे को भोजन कराने के बाद उन्हें बहुत अच्छा है। 

इसके बाद उन्होंने भूखों को निशुल्क भोजन कराने की ठान ली। अपनी हाईकोर्ट इलाहाबाद के समीप स्थित दुकान को बंदकर यहां चले आए। घर में पत्नी और बच्चे हैं, सभी को छोड़ रामदास सन्यासी हो गए। 

उनका कहना है कि भूखों के लिए सभी व्यवस्थाएं गिरिराज महाराज की महिमा से होती है। दानदाता और साधु-संतों का सहयोग मिल रहा है। वो अपने हाथों से भोजन बनाते हैं। इसके बाद भूखों को खिलाते हैं। 

यहां फुटपाथ पर लगती है पंगत

दूसरी ओर, गिरिराज परिक्रमा मार्ग में गया प्रसाद की समाधि के पास तिरपाल के नीचे भूखों का पेट भरने के लिए बाबा बनबारी दास बरसों से अपनी रसोई चला रहे हैं। बाबा बनबारी दास के यहां नीच-ऊंच जाति-पात का कोई फर्क नहीं है।

रोजाना फुटपाथ पर शाम होते ही भोजन करने वालों की पंगत लग जाती है। प्रेम से भोजन कराया जाता है। बाबा बनबारी दास आर्मी से रिटायर्ड हैं। बाबा पिछले 17 वर्षों से इस भंडारे को चला रहे हैं।

बनबारी दास ने बताया कि उनकी जो पेंशन आती है उससे और कुछ दानदाताओं के सहयोग से पूरी व्यवस्था कर रहे हैं। दोनों रसोइयों में सैकड़ों की संख्या में लोग निशुल्क पेट भर कर भोजन करते हैं।
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