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किसानों के लिए डेथ वारंट है तीनों कृषि कानून- रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी

Sun, 14 Feb 2021 09:42 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Vikas Kumar Updated Sun, 14 Feb 2021 09:42 AM IST
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All three agricultural laws are death warrants for farmers said jayant chaudhary
रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी - फोटो : amar ujala

किसान आंदोलन को गांव गांव पहुंचाने की मुहिम में लगे रालोद उपाध्यक्ष पूर्व सांसद जयंत चौधरी ने शनिवार को अकोला के चौ. चरण सिंह चाहरवाटी डिग्री कालेज में किसान महापंचायत की, जिसमें उन्होंने कहा कि नए कृषि कानून किसानों के लिए डेथ वारंट हैं। बिल का विरोध तब तक करेंगे, जब तक कानून वापस नहीं हो जाते। हर गांव में पंचायत के जरिए कृषि कानूनों की खामियों को बताएं।

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अपने बाबा के नाम पर अकोला में बने चौ. चरण सिंह चाहरवाटी डिग्री कालेज के मैदान में जयंत चौधरी ने रोक के बाद भी किसान महापंचायत में उमड़ी भीड़ देखकर हुंकार भरी। जयंत चौधरी ने कृषि बिल की खामियों को गिनाया और कहा कि सरकार सड़कों में कील ठोंक रही है ताकि किसान आंदोलन न कर पाए, पर किसान तब तक आंदोलन में डटे रहेंगे, जब तक बिल वापस नहीं हो जाते। मोदी सरकार पर बरसे जयंत ने कहा कि चंद लोगों का आंदोलन नहीं है, बल्कि पूरे देश के किसान सच समझ चुके हैं। 
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मंच पर बिछाई खटिया, पंच परमेश्वर बैठाए
चाहरवाटी की जाट बेल्ट में हुई किसान महापंचायत में पूर्व सांसद जयंत चौधरी ने मंच पर खटिया बिछवाई, जिस पर पंचायत की अध्यक्षता करने के लिए पंच परमेश्वर बाबा बने सिंह, मास्टर इमामुद्दीन, भगवान सिंह दिवाकर, लायक राम उपाध्याय, केदार सिंह धाकरे को बैठाया। जयंत चौधरी मंच पर नीचे बैठे। पंचों को खटिया पर बैठाने का उनका यह अंदाज चाहरवाटी के किसानों को लुभा गया।
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पुलिस ने रोके किसानों के ट्रैक्टर
रालोद प्रदेश प्रवक्ता कप्तान सिंह चाहर ने आरोप लगाया कि किसान पंचायत में भाग लेने आ रहे किसानों के ट्रैक्टर पुलिस ने रोक दिए। पुलिस प्रशासन ने बेरीकेडिंग लगा दीं थी और एक दिन पहले शाम को क्षेत्राधिकारी ने किसानों को पंचायत में जाने पर धमकी दी थी। फिर भी किसान पंचायत में आए। बृजेश चाहर ने कहा कि किसानों को डराया धमकाया गया, फिर भी पंचायत में किसान उमड़े। इससे साफ है कि किसान कृषि कानूनों के  वापस होने तक आंदोलन करते रहेंगे। 


महापंचायत में ये रहे मौजूद 
गोपीचंद, कप्तान सिंह चाहर, ब्रजेश चाहर, फौरन सिंह इंदौलिया, जयपाल सिंह खिरवार, लोचन चौधरी, केशव चाहर, चौधरी रामवीर सिंह, ओंकार सिंह चाहर, दुर्गेश शुक्ला, सावित्री चाहर, कुसुम चाहर, मालती चौधरी, अवधेश सोलंकी, जीतू चौधरी, सुजान धारिया, सुजान सिंह चाहर, रामेंद्र परमार आदि मौजूद रहे।

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