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भूकंप के संकेतों पर एआई की नजर: उपग्रहों से मिले आंकड़ों में खोजे जाएंगे खास पैटर्न, एनआईडीएम को भेजा प्रस्ताव
Fri, 11 Sep 2026 11:52 AM IST
Dhirendra Singh
देवेश शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
देवेश शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 11 Sep 2026 11:52 AM IST
सार
आरबीएस ईटीसी के भौतिकी विभाग ने भूकंप से जुड़े संभावित आयनोस्फेरिक संकेतों की एआई और मशीन लर्निंग से वैज्ञानिक जांच के लिए एनआईडीएम को शोध प्रस्ताव भेजा है। उपग्रहों से मिले टीईसी आंकड़ों को भू-भौतिकीय, विद्युतचुंबकीय, सौर और भू-चुंबकीय आंकड़ों के साथ मिलाकर संभावित भूकंपीय पैटर्न तलाशे जाएंगे।
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भूकंप
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भूकंप से जुड़े संभावित आयनोस्फेरिक संकेतों की वैज्ञानिक पड़ताल के लिए आरबीएस इंजीनियरिंग टेक्निकल कैंपस (आरबीएस ईटीसी), बिचपुरी के भौतिकी विभाग ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित शोध परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव गृह मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) के अनुसंधान कार्यक्रम के लिए 27 अगस्त को भेजा गया है। इसे सहायक प्रोफेसर डॉ. देवव्रत पुंढीर ने तैयार किया है। प्रस्तावित शोध की अनुमानित अवधि दो वर्ष है।
अध्ययन में वैश्विक उपग्रह नौवहन प्रणाली (जीएनएसएस) से प्राप्त आयनोस्फेरिक कुल इलेक्ट्रॉन संख्या (टीईसी) के आंकड़ों का भू-भौतिकीय और अंतरिक्ष-मौसम संबंधी आंकड़ों के साथ संयुक्त विश्लेषण किया जाएगा। एआई और मशीन लर्निंग की मदद से आयनोस्फियर में होने वाले असामान्य बदलावों की पहचान और उनका वर्गीकरण किया जाएगा। इसके बाद इन बदलावों और भूकंपीय गतिविधियों के बीच संभावित संबंध की जांच होगी। वहीं, अध्ययन में सौर गतिविधि और भू-चुंबकीय परिस्थितियों को भी शामिल किया जाएगा। आयनोस्फियर में होने वाले बदलावों पर इन प्राकृतिक कारकों का भी प्रभाव पड़ता है।
ऐसे में विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण कर संभावित भूकंपीय संकेतों को अन्य प्राकृतिक प्रभावों से अलग करने और उनकी विश्वसनीयता परखने का प्रयास किया जाएगा। डॉ. पुंढीर के अनुसार, अध्ययन का उद्देश्य भूकंप की सटीक भविष्यवाणी करना नहीं है। इसमें आंकड़ों के आधार पर यह जांच की जाएगी कि आयनोस्फियर में दर्ज कुछ बदलावों और भूकंपीय गतिविधियों के बीच कोई विश्वसनीय संबंध है या नहीं। एआई की मदद से विभिन्न स्रोतों के आंकड़ों में ऐसे पैटर्न तलाशे जाएंगे, जिनका भूकंपीय गतिविधियों से संभावित संबंध हो सकता है।
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उपग्रह और विद्युतचुंबकीय आंकड़े भी होंगे शामिल
डॉ. देवव्रत पुंढीर बताते हैं कि अध्ययन में उपग्रह आधारित टीईसी आंकड़ों के साथ विद्युतचुंबकीय और अन्य भू-भौतिकीय आंकड़ों को भी विश्लेषण में शामिल किया जाएगा। इससे आयनोस्फियर में होने वाले बदलावों के संभावित कारणों की एक साथ जांच की जा सकेगी।
आरबीएस ईटीसी में पहले से चल रहा शोध
आरबीएस ईटीसी की सीस्मो-इलेक्ट्रोमैग्नेटिक्स एंड स्पेस रिसर्च लेबोरेटरी (एसईएसआरएल) में भूकंप, आयनोस्फियर और अंतरिक्ष-मौसम से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन पहले से किया जा रहा है। प्रयोगशाला में जीपीएस आधारित टीईसी के साथ वीएलएफ और यूएलएफ विद्युतचुंबकीय संकेतों का भी अध्ययन होता है। प्रस्तावित परियोजना के तहत इसी शोध क्षेत्र से जुड़े विभिन्न आंकड़ों के विश्लेषण को एआई और मशीन लर्निंग तकनीकों से आगे बढ़ाने की योजना है।
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अध्ययन में वैश्विक उपग्रह नौवहन प्रणाली (जीएनएसएस) से प्राप्त आयनोस्फेरिक कुल इलेक्ट्रॉन संख्या (टीईसी) के आंकड़ों का भू-भौतिकीय और अंतरिक्ष-मौसम संबंधी आंकड़ों के साथ संयुक्त विश्लेषण किया जाएगा। एआई और मशीन लर्निंग की मदद से आयनोस्फियर में होने वाले असामान्य बदलावों की पहचान और उनका वर्गीकरण किया जाएगा। इसके बाद इन बदलावों और भूकंपीय गतिविधियों के बीच संभावित संबंध की जांच होगी। वहीं, अध्ययन में सौर गतिविधि और भू-चुंबकीय परिस्थितियों को भी शामिल किया जाएगा। आयनोस्फियर में होने वाले बदलावों पर इन प्राकृतिक कारकों का भी प्रभाव पड़ता है।
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ऐसे में विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण कर संभावित भूकंपीय संकेतों को अन्य प्राकृतिक प्रभावों से अलग करने और उनकी विश्वसनीयता परखने का प्रयास किया जाएगा। डॉ. पुंढीर के अनुसार, अध्ययन का उद्देश्य भूकंप की सटीक भविष्यवाणी करना नहीं है। इसमें आंकड़ों के आधार पर यह जांच की जाएगी कि आयनोस्फियर में दर्ज कुछ बदलावों और भूकंपीय गतिविधियों के बीच कोई विश्वसनीय संबंध है या नहीं। एआई की मदद से विभिन्न स्रोतों के आंकड़ों में ऐसे पैटर्न तलाशे जाएंगे, जिनका भूकंपीय गतिविधियों से संभावित संबंध हो सकता है।
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उपग्रह और विद्युतचुंबकीय आंकड़े भी होंगे शामिल
डॉ. देवव्रत पुंढीर बताते हैं कि अध्ययन में उपग्रह आधारित टीईसी आंकड़ों के साथ विद्युतचुंबकीय और अन्य भू-भौतिकीय आंकड़ों को भी विश्लेषण में शामिल किया जाएगा। इससे आयनोस्फियर में होने वाले बदलावों के संभावित कारणों की एक साथ जांच की जा सकेगी।
आरबीएस ईटीसी में पहले से चल रहा शोध
आरबीएस ईटीसी की सीस्मो-इलेक्ट्रोमैग्नेटिक्स एंड स्पेस रिसर्च लेबोरेटरी (एसईएसआरएल) में भूकंप, आयनोस्फियर और अंतरिक्ष-मौसम से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन पहले से किया जा रहा है। प्रयोगशाला में जीपीएस आधारित टीईसी के साथ वीएलएफ और यूएलएफ विद्युतचुंबकीय संकेतों का भी अध्ययन होता है। प्रस्तावित परियोजना के तहत इसी शोध क्षेत्र से जुड़े विभिन्न आंकड़ों के विश्लेषण को एआई और मशीन लर्निंग तकनीकों से आगे बढ़ाने की योजना है।