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Agra News: एआई कोच बदलेगा क्रिकेट कोचिंग की तस्वीर

Sun, 22 Feb 2026 03:07 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 22 Feb 2026 03:07 AM IST
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AI Coach will change the face of cricket coaching
आगरा। दिल्ली में हाल ही में हुई एआई समिट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम प्रदर्शित किया गया, जो खिलाड़ियों के स्टांस, हेड मूवमेंट, बैट स्विंग, फुटवर्क और टाइमिंग का बारीकी से विश्लेषण कर सटीक सुझाव देने का दावा करता है। दावा यह भी है कि भविष्य में यह तकनीक पारंपरिक क्रिकेट कोच की भूमिका को काफी हद तक बदल सकती है। इस नई तकनीक की चर्चा ताजनगरी आगरा में भी तेज हो गई है, जहां से दीपक चाहर, दीप्ति शर्मा और ध्रुव जुरैल जैसे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकले हैं। सवाल यह है कि क्या आगरा में भी ऐसी एआई आधारित कोचिंग खिलाड़ियों को मिल पाएगी।
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इस तरह काम करेगा एआई कोच
समिट में प्रदर्शित सिस्टम हाई-स्पीड कैमरों और सेंसर की मदद से खिलाड़ी की हर हरकत रिकॉर्ड करता है। बल्लेबाज का स्टांस कितना संतुलित है, शाॅट खेलते समय हेड पोजिशन स्थिर है या नहीं, गेंदबाज की रिलीज प्वाइंट और आर्म एंगल, फील्डर की रिएक्शन टाइमिंग, इन सभी का डाटा तुरंत स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाता है। कोच और खिलाड़ी उसी समय सुधार कर सकते हैं।
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वर्जन....

तकनीक हमेशा मददगार होती है, लेकिन क्रिकेट सिर्फ डाटा का खेल नहीं है। खिलाड़ी का आत्मविश्वास, मैच प्रेशर और मानसिक मजबूती एआई नहीं सिखा सकता। अगर यह तकनीक आगरा में उपलब्ध हो जाए तो निश्चित ही हमें मदद मिलेगी लेकिन यह कोच का विकल्प नहीं, सहायक बन सकता है। एआई से अपनी गलतियां समझने में आसानी होगी।
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- ध्रुव तोमर, युवा क्रिकेटर
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वीडियो देखकर समझ तो आता है, लेकिन अगर सिस्टम तुरंत बता दे कि हेड मूवमेंट कहां गलत है, तो सुधार जल्दी होगा लेकिन वह कोच को कभी रिप्लेस नहीं कर पाएगा।
- बल्देव भटनागर, खेल प्रशासक
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एआई विश्लेषण में बेहद सटीक हो सकता है, लेकिन खेल का मानवीय पक्ष, प्रेरणा, रणनीति, ड्रेसिंग रूम का माहौल अब भी इंसानी कोच के हाथ में ही रहेगा। अभी कोचिंग में तकनीक का इस्तेमाल होता है। यह उसका आगे का वर्जन कह सकते हैं लेकिन प्रत्येक खिलाड़ी की खूबियां और कमियां अलग होती हैं। इसे एआई नहीं एक मानवीय कोच ही समझ सकता है। - सुमित शर्मा, दीप्ति के भाई और कोच

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एआई कोचिंग से आगरा के खिलाड़ियों को मिलेगी नई उड़ान

आगरा जैसे शहर में जहां संसाधन सीमित हैं, वहां यदि एआई आधारित कोचिंग सेंटर स्थापित होते हैं तो खिलाड़ियों को दिल्ली या बड़े महानगरों पर निर्भर नहीं रहना पड़े। ताजनगरी ने पहले भी सीमित संसाधनों में बड़े खिलाड़ी दिए हैं। अगर एआई तकनीक यहां पहुंचती है, तो यह दीपक चाहर, दीप्ति शर्मा और ध्रुव जुरेल की नई पीढ़ी तैयार करने में अहम भूमिका निभा सकती है। फिलहाल सवाल यही है, क्या एआई कोच आगरा के मैदानों तक पहुंचेगा, या यह तकनीक अभी बड़े शहरों तक ही सीमित रहे।
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