मेरा विद्यालय-मेरी पहचान: आगरा के दो परिषदीय विद्यालय उत्कृष्ट 100 विद्यालयों की सूची में शामिल, मिलेगा सम्मान
एससीईआरटी ने 'मेरा विद्यालय, मेरी पहचान' के तहत प्रस्ताव मांगे थे, जिसमें प्रदेश स्तर पर 100 विद्यालय चुने गए हैं। इनमें जिले के दो परिषदीय विद्यालय भी उत्कृष्टता सूची में शामिल हैं।
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राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की ओर से 'मेरा विद्यालय, मेरी पहचान' में जिले के दो परिषदीय विद्यालयों को उत्कृष्ट श्रेणी में चुना गया। प्रदेश से कुल 100 विद्यालयों का चयन हुआ है। चयनित प्रधानाध्यापकों को पुरस्कृत कर प्रमाणपत्र दिया जाएगा। एससीईआरटी लखनऊ के सभागार में कार्यक्रम का आयोजन होगा। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के माध्यम से प्रधानाध्यापकों को जानकारी दी जाएगी।
डायट प्राचार्य धीरेंद्र कुमार के मुताबिक, जिले से उत्कृष्ट विद्यालय के लिए दो विद्यालयों पूर्व प्राथमिक विद्यालय कागारौल प्रथम, खेरागढ़ और मॉडल प्राथमिक विद्यालय, गुर्जा रामजस, पिनाहट का चयन करके भेजा गया था। दोनों ही विद्यालय राज्य स्तर पर चुन लिए गए। विद्यालयों के प्रधानाध्यापक क्रमश: राजेंद्र सिंह व मोही (प्रभारी) हैं। जिले से जिस समय प्रस्ताव भेजा गया था, पूर्व प्राथमिक विद्यालय कागारौल प्रथम में 390 विद्यार्थियों का पंजीकरण था और उनकी औसत उपस्थिति 70 फीसदी थी। विद्यालय के राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक सत्यपाल सिंह की इसमें मेहनत रही है। प्राथमिक विद्यालय गुर्जा रामजस में 94 विद्यार्थियों का पंजीकरण था और औसत उपस्थिति 80 फीसदी थी। विद्यालय में सामुदायिक सहभागिता से स्मार्ट क्लास बनवाया गया है और कक्षा में प्रोजेक्टर और स्पीकर लगे हैं। डायट की टीम ने दोनों विद्यालयों का निरीक्षण कर विद्यार्थियों से प्रश्न भी पूछे थे, विद्यार्थियों का लर्निंग आउटकम्स अच्छा पाया गया था।
इन बिंदुओं पर हुआ मूल्यांकन
विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या, औसत उपस्थिति, विद्यार्थी जिस कक्षा में अध्ययनरत हैं, उस कक्षा से पूर्व की कक्षा के भाषा व गणित के अपेक्षित लर्निंग आउटकम्स की स्थिति, विद्यार्थी की उसके रुचि के अनुसार खेलकूद व अन्य गतिविधियों में प्रतिभागिता, समुदाय के सहयोग से विद्यालय में आधारभूत सुविधाओं, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर प्रोजेेक्टर, खेलकूद की सामग्री, फर्नीचर आदि की उपलब्धता व क्रियाशीलता की स्थिति, विद्यालय में साफ-सफाई, पर्यावरण संरक्षण, शौचालय की क्रियाशीलता व पुस्तकालय की व्यवस्था।