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UP: आगरा के जूता उद्योग में बदलाव की बयार...सिंथेटिक जूतों का बनेगा हब, खाड़ी देशों में होगा निर्यात
Tue, 11 Nov 2025 09:07 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 11 Nov 2025 09:07 AM IST
सार
आगरा के उद्यमियों ने जूता उद्योग के बदलते ट्रेंड को भांप लिया है। अब लेदर की जगह नॉन लेदर जूता-चप्पलों का उत्पादन बढ़ाएगा। खास बात ये है कि इसके लिए नए सेटअप और कर्मचारियों की जरूरत नहीं है। उसी फैक्टरी में परंपरागत कारीगर ही नॉन लेदर के जूता-चप्पल बनाएंगे। सिंथेटिक लेदर फुटवियर की मांग खाड़ी देशों में है। ऐसे में निर्यात बढ़ने से युवाओं को रोजगार और सरकार को राजस्व मिलेगा।
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आगरा के जूता उद्योग में बदलाव की बयार
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आगरा फुटवियर एंड मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स चैंबर (एफमेक) के अध्यक्ष गोपाल गुप्ता ने बताया कि आगरा में 125 जूता निर्यातक हैं। यह निर्यातक अभी चमड़े के जूते ही बनाते हैं। तीन दिन तक चले मीट एट आगरा में देश-विदेश के 8390 उद्यमी आए। इनसे देश-दुनिया में जूते के बदलते बाजार और मांगों को भी साझा किया। कई देशों में सिंथेटिक जूता-चप्पल की मांग तेजी से बढ़ी है। यहां तक कि करीब 90 फीसदी लोग नॉन लेदर यानी सिंथेटिक लेदर के बने जूता-चप्पल ही पहनते हैं। ऐेसे में आगरा में सिंथेटिक लेदर के जूता निर्माण का कार्य तेजी से करने पर सहमति बनी है। इसका उत्पादन बढ़ने से रोजगार, आय और राजस्व भी बढ़ेगा। इनकी सबसे ज्यादा मांग खाड़ी देशों में है, यहां इनका निर्यात किया जाएगा।
सिंथेटिक जूतों का भी करेंगे निर्यात
एफमेक महासचिव प्रदीप वासन का कहना है कि एफमेक महासचिव प्रदीप वासन ने बताया कि आगरा में अभी तक चमड़े के जूतों का ही निर्यात किया जाता है। सिंथेटिक जूते का घरेलू व्यापार है। दुनिया में सिंथेटिक जूते की मांग तेजी से बढ़ी है। ऐसे में अब आगरा में भी सिंथेटिक जूते के निर्माण को बढ़ाते हुए निर्यात करेंगे।
चमड़ा से सस्ता बनता है सिंथेटिक जूता
पूर्व अध्यक्ष एफमेक कैप्टन अजीत सिंह राणा ने बताया कि जूते में सिंथेटिक लेदर का 80-90 फीसदी उपयोग हो रहा है। युवाओं में ये खासा पसंद किया जा रहा है। ये चमड़े के मुकाबले एक तिहाई कीमत का बनता है। ऐसे में सिंथेटिक लेदर से जूता निर्माण पर भी उद्यमी जोर दे रहे हैं। इससे उत्पादन बढ़ने से आगरा में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
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3800 करोड़ से डेढ़ गुना कारोबार की उम्मीद
देश से 40 हजार करोड़ रुपये का जूता निर्यात होता है। इसमें 13 हजार करोड़ उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी है। इसमें से आगरा से 5000 करोड़ रुपये का निर्यात होता है। यहां सालाना 2.54 करोड़ जोड़ी जूते बनाए जा रहे हैं। सिंथेटिक जूता ज्यादा बनाने से करीब डेढ़ गुना मांग बढ़ जाएगी। इसके निर्यात होने से आगरा की हिस्सेदारी भी बढ़ेगी।
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सिंथेटिक जूतों का भी करेंगे निर्यात
एफमेक महासचिव प्रदीप वासन का कहना है कि एफमेक महासचिव प्रदीप वासन ने बताया कि आगरा में अभी तक चमड़े के जूतों का ही निर्यात किया जाता है। सिंथेटिक जूते का घरेलू व्यापार है। दुनिया में सिंथेटिक जूते की मांग तेजी से बढ़ी है। ऐसे में अब आगरा में भी सिंथेटिक जूते के निर्माण को बढ़ाते हुए निर्यात करेंगे।
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चमड़ा से सस्ता बनता है सिंथेटिक जूता
पूर्व अध्यक्ष एफमेक कैप्टन अजीत सिंह राणा ने बताया कि जूते में सिंथेटिक लेदर का 80-90 फीसदी उपयोग हो रहा है। युवाओं में ये खासा पसंद किया जा रहा है। ये चमड़े के मुकाबले एक तिहाई कीमत का बनता है। ऐसे में सिंथेटिक लेदर से जूता निर्माण पर भी उद्यमी जोर दे रहे हैं। इससे उत्पादन बढ़ने से आगरा में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
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3800 करोड़ से डेढ़ गुना कारोबार की उम्मीद
देश से 40 हजार करोड़ रुपये का जूता निर्यात होता है। इसमें 13 हजार करोड़ उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी है। इसमें से आगरा से 5000 करोड़ रुपये का निर्यात होता है। यहां सालाना 2.54 करोड़ जोड़ी जूते बनाए जा रहे हैं। सिंथेटिक जूता ज्यादा बनाने से करीब डेढ़ गुना मांग बढ़ जाएगी। इसके निर्यात होने से आगरा की हिस्सेदारी भी बढ़ेगी।