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UP: जानें क्या है 5-ई माॅडल, जिसके लिए बनाई गईं 17 क्रिटिकल काॅरिडोर टीमें; सड़क हादसों पर लगेगी रोक
Sat, 06 Dec 2025 09:39 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 06 Dec 2025 09:39 AM IST
सार
सड़क हादसों पर रोक लगाने के लिए पुलिस आयुक्त ने 5-ई माॅडल पर जोर दिया। इसके लिए आगरा में 17 क्रिटिकल काॅरिडोर टीमें बनाई गई हैं।
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police demo
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सड़क दुर्घटना में शून्य मृत्यु जिला घोषित करने के लिए आगरा में 17 क्रिटिकल काॅरिडोर टीमें बनाई गई हैं। इन टीमों ने सर्वे के बाद अपनी रिपोर्ट दे दी है। कहीं रोड इंजीनियरिंग में खामी है तो कहीं पुलिस के पास संसाधनों की कमी से हादसे हो रहे हैं। पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने 5-ई माॅडल से दुर्घटनाएं रोकने पर जोर दिया।
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पुलिस लाइन में यातायात पुलिस, पीडब्ल्यूडी, स्टेट हाईवे, नगर निगम, टोरंट, जल निगम, परिवहन विभाग, आगरा स्मार्ट सिटी परियोजना, आगरा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ बैठक की गई। पुलिस आयुक्त ने बताया कि उत्तर प्रदेश के 20 जिलों में सर्वाधिक सड़क हादसे होते हैं। इनमें आगरा भी शामिल हैं। यहां के यमुना एक्सप्रेसवे, लखनऊ एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे के अलावा अन्य राजमार्ग पर हादसे होते हैं। इन्हें रोकने के लिए कवायद तेज कर दी गई है।
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212 स्थान को ब्लैक स्पाॅट के रूप में चिह्नित किया गया है। इनमें संबंधित विभागों की मदद से जरूरी उपाय किए जाएंगे, जिससे सड़क हादसों पर रोक लगाई जा सके। पुलिस आयुक्त ने बैठक में कहा कि अधिकतर सड़क हादसे रोड इंजीनियरिंग में खामी, वाहनों में तकनीकी कमी, पर्यावरणीय परिस्थिति और मानव त्रुटि जैसे तेज गति में वाहन चलाने, मोबाइल का उपयोग, शराब पीकर वाहन चलाने आदि की वजह से होते हैं। इसको देखते हुए जरूरी उपाय किए जाने चाहिए।
ये हैं 5-ई मॉडल
इसके लिए 5-ई माॅडल रोड इंजीनियरिंग, एजुकेशन एंड अवेयरनेस, एनफोर्समेंट, इमरजेंसी चिकित्सा और एनवायरनमेंट और एवाल्यूशन को अपनाया जा रहा है। रोड इंजीनियरिंग में बदलाव किया जाएगा। लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करेंगे। नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई होगी। दुर्घटना के बाद कार्रवाई की जाएगी। दुर्घटना के कारण का डाटा और विश्लेषण कर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा सड़कों पर जरूरी उपकरण लगाने पर जोर दिया गया है। इनमें सड़कों पर मार्क लगाना, लाउड हेलर, बैरियर, पोटेर्बल बैरियर, कोन, ड्रम्स, रस्सियां, रेड-ग्रीन बैटन टार्च, मैनुअल सिग्नल आदि को होना आवश्यक है।
इसके लिए 5-ई माॅडल रोड इंजीनियरिंग, एजुकेशन एंड अवेयरनेस, एनफोर्समेंट, इमरजेंसी चिकित्सा और एनवायरनमेंट और एवाल्यूशन को अपनाया जा रहा है। रोड इंजीनियरिंग में बदलाव किया जाएगा। लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करेंगे। नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई होगी। दुर्घटना के बाद कार्रवाई की जाएगी। दुर्घटना के कारण का डाटा और विश्लेषण कर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा सड़कों पर जरूरी उपकरण लगाने पर जोर दिया गया है। इनमें सड़कों पर मार्क लगाना, लाउड हेलर, बैरियर, पोटेर्बल बैरियर, कोन, ड्रम्स, रस्सियां, रेड-ग्रीन बैटन टार्च, मैनुअल सिग्नल आदि को होना आवश्यक है।