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श्री पारस अस्पताल ऑक्सीजन मॉकड्रिल प्रकरण: 23 दिन में 22 की छंटनी... तीन तथ्य और सच दूर
Fri, 02 Jul 2021 11:28 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 02 Jul 2021 11:28 AM IST
सार
प्रशासन ने 26 और 27 अप्रैल को सात मरीजों की मौत बताई। जबकि वायरल वीडियो में पांच मिनट ऑक्सीजन बंद कर दी और 96 में से 22 मरीज छंट गए, नीले पड़ गए बात कही गई।
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पारस अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आठ जून को वायरल मॉकड्रिल के वीडियो में डॉ. अरिन्जय ने 22 मरीजों की छंटनी की बात कही थी। उन पर 22 मरीजों की मौत के आरोप लगे। प्रशासन ने तक 26 और 27 को सात लोगों की मौत की बत कही थी। प्रशासनिक जांच में उन दो दिनों में मृतकों की संख्या 16 निकली। बुधवार को आईएमए जांच कमेटी ने 26 अप्रैल को 10 लोगों की मौत को सदस्यों के सामने रखा है।
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प्रशासन की जांच में दो दिन में सात मरीजों की मौत
प्रशासन ने 26 और 27 अप्रैल को सात मरीजों की मौत बताई। जबकि वायरल वीडियो में पांच मिनट ऑक्सीजन बंद कर दी और 96 में से 22 मरीज छंट गए, नीले पड़ गए बात कही गई।
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16 मृतकों के परिजन आए सामने, दर्ज कराए बयान
26 और 27 अप्रैल को अस्पताल में 16 मृतकों के परिजन ने प्रशासन के यहां बयान दर्ज कराए, इससे प्रशासन की जांच संदेह में आ गई। इसके बाद भी प्रशासन ने उनके बयानों को नजरअंदाज कर दिया।
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आईएमए को दी एक दिन में 10 की मौत की जानकारी
आईएमए की जांच समिति को डॉ. अरिन्जय जैन की ओर से दी गई 91 मरीजों की सूची में 26 अप्रैल को 10 मौत दर्शाई गई हैं। 27 अप्रैल का रिकार्ड अभी उपलब्ध नहीं कराया है। ऐसे में प्रशासन की क्लीन चिट पर फिर सवाल खड़े हुए।
मरीजों की मौत की सच्चाई दबाई गई
श्री पारस अस्पताल 22 मरीजों की मौत की सच्चाई दबाई गई। प्रशासन ने 16 मृतकों के परिजनों के बयानों को भी दरकिनार कर अस्पताल प्रशासन को क्लीन चिट दे दी। इससे प्रशासन की भूमिका भी संदिग्ध है। - नरेश पारस, सामाजिक कार्यकर्ता
एसआईटी जांच के लिए जाएंगे कोर्ट
आईएमए को एक दिन में 10 मरीजों के रिकॉर्ड दिए गया, ऐसे में श्री पारस अस्पताल प्रकरण की सच्चाई तभी सामने आएगी, जब इसकी एसआईटी गठित कर जांच कराई जाए। इसके लिए वह कोर्ट की शरण लेंगे। - शबी हैदर जाफरी, सामाजिक कार्यकर्ता
श्री पारस अस्पताल 22 मरीजों की मौत की सच्चाई दबाई गई। प्रशासन ने 16 मृतकों के परिजनों के बयानों को भी दरकिनार कर अस्पताल प्रशासन को क्लीन चिट दे दी। इससे प्रशासन की भूमिका भी संदिग्ध है। - नरेश पारस, सामाजिक कार्यकर्ता
एसआईटी जांच के लिए जाएंगे कोर्ट
आईएमए को एक दिन में 10 मरीजों के रिकॉर्ड दिए गया, ऐसे में श्री पारस अस्पताल प्रकरण की सच्चाई तभी सामने आएगी, जब इसकी एसआईटी गठित कर जांच कराई जाए। इसके लिए वह कोर्ट की शरण लेंगे। - शबी हैदर जाफरी, सामाजिक कार्यकर्ता
डीएम ने पुलिस को भेजी थी 10 पीड़ितों की शिकायतें, नहीं शुरू हुई जांच
श्री पारस अस्पताल के 10 पीड़ितों ने प्रशासन को बयान दर्ज कराए थे। जांच रिपोर्ट में बयानों को एहिमियत नहीं मिली। प्रशासन ने पीड़ितों के प्रार्थनापत्र आगे की कार्रवाई के लिए थाना पुलिस को भेजे थे, लेकिन दस दिन बाद थाना पुलिस ने भी किसी पीड़ित के बयान नहीं लिए। उनकी शिकायतों के संबंध में साक्ष्य नहीं जुटाए। ऐसे में पुलिस के रवैये पर भी सवाल उठ रहे हैं।
26 व 27 अप्रैल को अपने स्वजनों को खोने वाले पीड़ित पुलिस व प्रशासन के बीच फुटबाल बन गए हैं। पहले एडीएम सिटी व प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। जांच रिपोर्ट में अस्पताल संचालक के बयानों का जिक्र है, लेकिन पीड़ितों का कहीं कोई जिक्र नहीं। जांच रिपोर्ट में क्लीनचिट देने के बाद पीड़ितों के प्रार्थनापत्र थाना पुलिस को भेजे गए थे। तब डीएम प्रभु एन सिंह ने कहा था पुलिस प्रार्थनापत्रों के आधार पर जांच करेगी। पीड़ितों को जो कहना है पुलिस को बताए। परंतु 10 दिन बाद भी पुलिस ने प्रार्थना पत्रों को लेकर पीड़ितों के बयान दर्ज किए न साक्ष्य जुटाए। पुलिस व प्रशासन के रुख से आहत पीड़ितों ने अब अधिवक्ताओं से सहयोग मांगा है।
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श्री पारस अस्पताल के 10 पीड़ितों ने प्रशासन को बयान दर्ज कराए थे। जांच रिपोर्ट में बयानों को एहिमियत नहीं मिली। प्रशासन ने पीड़ितों के प्रार्थनापत्र आगे की कार्रवाई के लिए थाना पुलिस को भेजे थे, लेकिन दस दिन बाद थाना पुलिस ने भी किसी पीड़ित के बयान नहीं लिए। उनकी शिकायतों के संबंध में साक्ष्य नहीं जुटाए। ऐसे में पुलिस के रवैये पर भी सवाल उठ रहे हैं।
26 व 27 अप्रैल को अपने स्वजनों को खोने वाले पीड़ित पुलिस व प्रशासन के बीच फुटबाल बन गए हैं। पहले एडीएम सिटी व प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। जांच रिपोर्ट में अस्पताल संचालक के बयानों का जिक्र है, लेकिन पीड़ितों का कहीं कोई जिक्र नहीं। जांच रिपोर्ट में क्लीनचिट देने के बाद पीड़ितों के प्रार्थनापत्र थाना पुलिस को भेजे गए थे। तब डीएम प्रभु एन सिंह ने कहा था पुलिस प्रार्थनापत्रों के आधार पर जांच करेगी। पीड़ितों को जो कहना है पुलिस को बताए। परंतु 10 दिन बाद भी पुलिस ने प्रार्थना पत्रों को लेकर पीड़ितों के बयान दर्ज किए न साक्ष्य जुटाए। पुलिस व प्रशासन के रुख से आहत पीड़ितों ने अब अधिवक्ताओं से सहयोग मांगा है।
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