श्री पारस अस्पताल प्रकरण: 'नहीं था ऑक्सीजन संकट तो क्यों लगाया सोने जैसा भाव'
प्रशासन ने जांच रिपोर्ट में कबूला, सोने के भाव में ऑक्सीजन टैंकर खरीदने को तैयार था श्री पारस अस्पताल का संचालक
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आगरा के श्री पारस अस्पताल में मॉकड्रिल और ऑक्सीजन की गुत्थी सुलझने की जगह उलझती जा रही है। 25 अप्रैल की रात 96 मरीज भर्ती थे। अगर अस्पताल में ऑक्सीजन पर्याप्त थी तो क्या कोई सोने के भाव ऑक्सीजन खरीदेगा। लेकिन प्रशासन ने जांच रिपोर्ट में स्वीकार किया है कि श्री पारस अस्पताल संचालक डॉ. अरिंजय जैन सोने के भाव ऑक्सीजन खरीदने को तैयार था।
श्री पारस अस्पताल ही नहीं, शहरभर के अस्पतालों में 25 अप्रैल को ऑक्सीजन संकट था। प्रशासन के पास सीमित आपूर्ति थी, जबकि वेंडर्स ने हाथ खड़े कर दिए थे। ऐसे में 26 अप्रैल की सुबह सात बजे पांच मिनट की मॉकड्रिल की गई। जिसमें 22 मरीज छंट गए। इधर, जांच रिपोर्ट में प्रशासन ने श्री पारस अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी नहीं मानी। ऐसे में जांच के तरीके और अफसरों के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रशासन ने जांच रिपोर्ट में वीडियो के आधार पर कुबूला है कि 96 जिंदगियों और अपना करियर को बचाने के लिए संचालक सोने के भाव में ऑक्सीजन टैंकर खरीदने को तैयार था। ऐसे में एक तरफ प्रशासन जांच रिपोर्ट में कह रहा है कि ऑक्सीजन आपूर्ति पर्याप्त थी।
फिर सोने के भाव में ऑक्सीजन खरीदने की क्या जरूरत पड़ गई। पीड़ितों का आरोप है कि प्रशासन ने जांच रिपोर्ट को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत किया है। संचालक को बचाने और ऑक्सीजन की कमी छिपाने के लिए जांच में लीपापोती की गई है।
क्यों की गई ऑक्सीजन लेवल से छेड़छाड़
श्री पारस अस्पताल संचालक डॉ. अरिंजय जैन ने मॉकड्रिल के नाम पर मरीजों को दी जा रही ऑक्सीजन की खपत जांचने की बात कुबूली है। अमर उजाला पड़ताल में डॉ. अरिंजय ने बताया कि उसने अधिक ऑक्सीजन पर निर्भर मरीजों का ऑक्सीजन लेवल कम कर देखा।
सवाल है कि अगर ऑक्सीजन कमी नहीं थी तो फिर क्यों मरीजों के ऑक्सीजन लेवल से छेड़छाड़ की गई। जो मरीज हाई फ्लो ऑक्सीजन पर सांस ले रहे थे क्या उनके ऑक्सीजन लेवल कम करने से उनकी सांस नहीं घुटी होंगी। दमघोंटू मॉकड्रिल की जरूरत क्यों पड़ी। इन सवालों के जवाबों पर प्रशासन चुप्पी साध बैठा है।
इटावा राजू यादव ने बताया कि पूरे मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए। जिससे सच्चाई सामने आ सके। प्रशासन की रिपोर्ट झूठ का पुलिंदा है। यह पीड़ितों के साथ अन्याय है। ऑक्सीजन कमी से मेरे बहनोई की मौत हो गई।
'ऑक्सीजन होती तो न छिनतीं मरीजों की सांसें'
देहतोरा की प्रियंका सिंह ने कहा कि श्री पारस अस्पताल में उस दिन ऑक्सीजन नहीं थी। अगर ऑक्सीजन उपलब्ध होती तो मरीजों की सांसे नहीं छीनी जातीं। तीमारदार सिलिंडर के लिए नहीं भटकते। मेरी मां की ऑक्सीजन छीनने से मौत हुई।
'अधिक ऑक्सीजन पर निर्भर मरीजों से खिलवाड़'
मधु नगर के नत्थीलाल त्यागी ने कहा कि अधिक ऑक्सीजन पर निर्भर मरीजों की ऑक्सीजन बंद कर उनकी जान से खिलवाड़ हुआ है। अधिकारी हॉस्पिटल संचालक से मिले हुए हैं। मेरी पत्नी की मौत 26 अप्रैल को ऑक्सीजन हटाने के कारण हुई है।