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Agra: संवेदनशील-मिश्रित आबादी वाले इलाकों में ड्रोन से होगी निगरानी, पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने दिए ये निर्देश
Fri, 05 Jun 2026 09:34 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 05 Jun 2026 09:34 AM IST
सार
पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने आईजीआरएस शिकायतों के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए थानों को मौके पर जाकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने डिजिटल पुलिसिंग, लंबित मामलों की समयबद्ध विवेचना और अपराधियों की निगरानी को और मजबूत करने पर जोर दिया।
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पुलिस आयुक्त दीपक कुमार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने पाक्षिक अपराध समीक्षा गोष्ठी में कहा कि आईजीआरएस पोर्टल पर आने वाली शिकायतों का निस्तारण पुलिसकर्मी थाने में बैठकर नहीं करें। पीड़ितों से बात करें। मौके पर जाएं। समय पर और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण किया जाए।
पुलिस आयुक्त ने कहा कि शिकायत लंबित होने पर जवाबदेही तय होगी। थाना प्रभारी लंबित मामलों की समीक्षा करेंगे। यक्ष एप को अपराधियों का डिजिटल डेटाबेस तैयार करने, अपराधियों की पहचान करने और बीट पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए एआई आधारित एक आधुनिक तकनीकी टूल के रूप में बनाया गया है। ई-समन एप का प्रयोग बढ़ाया जाए। समन व नोटिस तामील करने में एप का प्रयोग करें।
विवेचना 60 से 90 दिन में पूर्ण होनी चाहिए। आरोपपत्र और अंतिम रिपोर्ट भी न्यायालय में समय पर दी जाए। मिश्रित आबादी वाले इलाकों में ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी कैमरों से डिजिटल मॉनीटरिंग की जाए। जेल भेजे गए और रिहा होने वाले अपराधियों की निगरानी बीट स्तर पर की जाए। गैंगस्टर और गुंडा एक्ट के मामलों की समीक्षा की जाए। जुआरियों और सटोरियों पर प्रभावी कार्रवाई की जाए।
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पुलिस आयुक्त ने कहा कि शिकायत लंबित होने पर जवाबदेही तय होगी। थाना प्रभारी लंबित मामलों की समीक्षा करेंगे। यक्ष एप को अपराधियों का डिजिटल डेटाबेस तैयार करने, अपराधियों की पहचान करने और बीट पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए एआई आधारित एक आधुनिक तकनीकी टूल के रूप में बनाया गया है। ई-समन एप का प्रयोग बढ़ाया जाए। समन व नोटिस तामील करने में एप का प्रयोग करें।
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विवेचना 60 से 90 दिन में पूर्ण होनी चाहिए। आरोपपत्र और अंतिम रिपोर्ट भी न्यायालय में समय पर दी जाए। मिश्रित आबादी वाले इलाकों में ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी कैमरों से डिजिटल मॉनीटरिंग की जाए। जेल भेजे गए और रिहा होने वाले अपराधियों की निगरानी बीट स्तर पर की जाए। गैंगस्टर और गुंडा एक्ट के मामलों की समीक्षा की जाए। जुआरियों और सटोरियों पर प्रभावी कार्रवाई की जाए।
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