जल ही जीवन है: बेजुबानों की प्यास बुझा रही ताजनगरी, घरों के बाहर पशु-पक्षियों के लिए बनवाई प्याऊ
बेहाल कर देने वाली गर्मी में गाय, भैंस, घोड़ा आदि जानवरों की प्यास बुझाने के लिए लोगों ने घर के बाहर प्याऊ बनवा दी हैं। पक्षियों के लिए भी घरों की छतों पर लोग दाने डाल रहे हैं।
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सूरज की तपिश में परेशान बेजुबानों की प्यास ताजनगरी के लोग बुझा रहे है। बेहाल कर देने वाली गर्मी में गाय, भैंस, घोड़ा आदि जानवरों की प्यास बुझाने के लिए लोगों ने घर के बाहर प्याऊ बनवा दी हैं। पक्षियों के लिए भी घरों की छतों पर लोग दाने डाल रहे हैं। काफी लोगों ने इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया है। पशु-पक्षियों की सेवा करने वाले लोगों का मानना है कि जिनका बुध कमजोर होता है, पक्षियों को दाना खिलाने से वह ठीक होने लगता है। साथ ही घर की छतों पर पक्षियों के लिए दाना पानी रखने से घर में स्मृद्धि आती है।
आरबीएस में सैकड़ों पक्षी रोज चुगने आते हैं दाना
आरबीएस इंटर कॉलेज में तोता, कबूूतर, चिड़ियां, कौवा आदि पक्षियों का दिन और शाम को काफी कोलाहल रहता है। कालेज के प्राचार्य डॉ. यतेंद्र पाल सिंह बताते हैं कि कॉलेज के दो कर्मचारियों को हर रोज पानी बदलने की जिम्मेदारी दे रखी है। इनकी संख्या दिन पर दिन बढ़ रही है।
जेठ अषाढ़ में जलदान महादान
भागवताचार्य पं. सुभाष चंद्र शास्त्री बताते हैं कि जेठ अषाढ़ के महीने में जलदान का काफी महत्व रहता है। पुराणों में लिखा है कि मार्गशीर्ष के महीने में अग्नि का दान व जेठ अषाढ़ और सावन के महीने में जलदान से पाप धुलते हैं। शास्त्री बताते हैं कि चातुर्मास में महात्मा लोग नदियों में स्नान नहीं करते हैं।
घर के बाहर या बालकनी में बर्तन में हर रोज पानी भरकर रखें।
पानी को हमेशा छांव वाले स्थान पर ही रखा जाए।
बर्तन में पानी गर्म हो जाने पर उसे जरूर बदले।
पानी और दाना रख रहे हैं तो इसे नियम बना ले।
पानी का बर्तन जानवर या पक्षी के अनुसार होना चाहिए।
पिछले साल की थी जानवरों के लिए व्यवस्था
घर के बाहर पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था पिछले साल की थी। एक दिन घर के बाहर दो गाय काफी देर से घूम रही थीं। मुझे लगा कि वह प्यासी हैं। मैंने पानी भरी बाल्टी जब घर के बाहर रखी, तो दोनों गायों आपस में पानी के लिए लड़ने लगी। उसी दिन मैंने घर के बाहर जानवरों के लिए प्याऊ बनवाई। - दीपक आतवानी, कमला नगर
सुबह उठकर सबसे पहले चिड़ियों को देते है दाना
घर की छत पर 12 साल पहले एक चिड़िया का बच्चा जून की तपती गर्मी में प्यास से तड़प रहा था। उस समय हम सेंट्रल जेल के पास बने क्वार्टर में रहते थे। जब मैंने उसे छोटे से बर्तन में पानी दिया, तो वह पानी पीकर उड़ गया। उसी दिन मेरे पूरे परिवार ने प्रण लिया कि सुबह उठने के बाद सबसे पहले चिड़ियाओं को छत पर दाना डालेंगे। - कृष्ण कुमार सिंह, शास्त्रीपुरम
मैंने घर की छत पर कबूतरों और चिड़ियाओं के लिए छोटा सा घर बना रखा है। हर रोज दाना डालने के अलावा दिन में तीन बार पानी बदलता हूं। सुबह और शाम को दाना खाने निकलते हैं। मुझे मेरी मां ने बताया पक्षियों को दाना खिलाने हम सभी का धर्म है। घर के बाहर ही पशुओं के लिए पीने के पानी की व्यवस्था भी कर रखी है। - शशांक देशवाल, ब्रज विहार कॉलोनी
सनातन धर्म में बेजुबान जानवरों की सेवा करने के लिए कहा गया है। इसका भी अपना धार्मिक महत्व है। साथ ही पशुओं और पक्षियों की सेवा करने से मन को काफी शांति मिलती है। अब तो ऐसी आदत हो गई है कि हर रोज पक्षियों को दाने डालने के बाद ही कोई दूसरा काम कर पाते हैं। इन्हें दाना चुगता देख अलग खुशी मिलती है। - पूजा भोजवानी, रूई की मंडी
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