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श्री पारस अस्पताल: पीड़ितों की गुहार... साहब, जब्त रिकॉर्ड का क्या किया, कुछ तो इंसाफ कीजिए

Wed, 07 Jul 2021 02:12 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 07 Jul 2021 02:12 PM IST
सार

आगरा के श्री पारस अस्पताल प्रकरण के वीडियो वायरल 30 दिन हो गए, लेकिन बीएचटी का सच सामने नहीं आया। प्रशासन ने जिस रिकॉर्ड को जब्त किया था उसमें क्या है ये अभी तक जग जाहिर नहीं हो सका है। जिन 16 मृतकों का डेथ ऑडिट कराया है, उनमें 10 पीड़ितों ने शिकायत दर्ज कराई थी। छह अन्य मृतक मरीजों का ब्योरा प्रशासन ने कमेटी को दिया था।

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agra paras hospital victims demanding justice to administration
श्री पारस अस्पताल प्रकरण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के श्री पारस अस्पताल प्रकरण के वीडियो वायरल 30 दिन हो गए, लेकिन बीएचटी का सच सामने नहीं आया। प्रशासन ने जिस रिकॉर्ड को जब्त किया था उसमें क्या है ये अभी तक जग जाहिर नहीं हो सका है। जिन 16 मृतकों का डेथ ऑडिट कराया है, उनमें 10 पीड़ितों ने शिकायत दर्ज कराई थी। छह अन्य मृतक मरीजों का ब्योरा प्रशासन ने कमेटी को दिया था।

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 प्रशासन द्वारा उपलब्ध रिकॉर्ड से ही मरीजों का डेथ ऑडिट किया गया। डेथ ऑडिट में कई चीजें स्पष्ट नहीं की गई। डेथ ऑडिटी करने वाले चिकित्सक कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। जबकि पीड़ित उस रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने और न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
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जब्त रिकॉर्ड का क्या किया
मधु नगर के नत्थीलाल ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों ने जो रिकॉर्ड जब्त किया था उसका क्या किया ये नहीं बताया। जब्त रिकॉर्ड हमें दिया जाए। क्योंकि अस्पताल सील होने के बाद हमें हमारे मरीजों के इलाज का ब्योरा नहीं मिला है। रिकॉर्ड नहीं दे सकते तो न्याय मिलना चाहिए। मेरी पत्नी रामवती की मृत्यु 26 अप्रैल को श्रीपारस में हुई थी। 

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'अफसरों ने मिटा दिए साक्ष्य'
भर्थना इटावा की श्वेता यादव ने कहा कि मेरे पति रिंकू की मृत्यु 27 अप्रैल को हुई थी। सबसे पहले अफसर ही अस्पताल की जांच के लिए गए थे। मुझे लगता है कि अफसरों ने ही साक्ष्य मिटा दिए। वीडियो में संचालक ने 96 मरीज भर्ती होने की बात स्वीकार की है। कितने मरीजों की मौत हुई ये उनकी बीएचटी से पता चल जाएगा। 

'मिलीभगत से नहीं इनकार'
दहतोरा की प्रियंका सिंह ने कहा कि श्री पारस अस्पताल संचालक व अफसरों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता। दोनों सच्चाई को छुपाने चाहते हैं। पुलिस व प्रशासन संचालक को मदद कर रहा है। बीएचटी सार्वजनिक नहीं की गई। मैंने दो बार बीएचटी उपलब्ध कराने के लिए एडीएम सिटी से कहा, उन्होंने मना कर दिया। 

'आखिर कब मिलेगा हमें न्याय'
राजा मंडी के सौरभ अग्रवाल ने कहा  कि मेरी पत्नी की मौत श्रीपारस अस्पताल में 26 अप्रैल को हुई थी। मैंने थाने से लेकर डीएम साहब तक शिकायत की। संचालक से पूछताछ की गई न कोई जांच हुई। जांच रिपोर्ट भी फर्जी लगती है। आखिर हमें न्याय कब मिलेगा। अब सिर्फ अदालत से उम्मीद बची है। प्रशासन ने हमारे जख्मों पर नमक छिड़का है। 

विशेषज्ञ बोले- सात साल तक बीएचटी सुरक्षित रखना जरूरी
चिकित्सा एवं विधि विशेषज्ञ के डॉ. देवेंद्र गुप्ता ने बताया कि मरीज की बीएचटी अस्पताल को सात साल तक सुरक्षित रखना जरूरी होता है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं। मुझे लगता है मरीजों की बीएचटी खाली होंगी। उन्हें भरा ही नहीं गया होगा। इसलिए अस्पताल व प्रशासन पीड़ितों को रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करा रहा है। 

'दाल में कुछ तो काला है'
पूर्व डीजीसी फौजदारी अशोक गुप्ता ने कहा कि श्री पारस अस्पताल में क्या हुआ ये सबको पता है। प्रशासन के छिपाने से कुछ नहीं होगा। इससे ये जरूर साबित हो रहा है कि दाल में कुछ तो काला है। वरना इतनी जल्दी क्लीन चिट नहीं मिलती। संवेदनशील मामले में लापरवाही बरती गई।

'जानबूझकर छिपा रहे हैं रिकॉर्ड'
अधिवक्ता फौजदारी  राजवीर सिंह ने कहा कि प्रशासन मरीजों के रिकॉर्ड को जानबूझकर छिपा रहा है। रिकॉर्ड से हकीकत खुल जाएगी। यही वजह है कि डॉ. अरिन्जय ने भी किसी को रिकॉर्ड नहीं दिया। इस मामले में सीबीआई जांच होनी चाहिए। तभी हकीकत सबके सामने आएगी। 

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