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Agra Paper Leak Case: क्या कोचिंग संचालक लगी थी मुख्य परीक्षा में ड्यूटी? जांच में जुटी टीम
Tue, 24 May 2022 02:18 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 24 May 2022 02:18 PM IST
सार
आगरा कॉलेज के प्राचार्य ने शोधार्थी कोचिंग संचालक से जुड़े शिक्षकों के बारे में पता करने के लिए पांच सदस्यीय जांच समिति बनाई है। हालांकि ये स्पष्ट हो गया है कि कोचिंग संचालक आगरा कॉलेज का रसायन विज्ञान विषय का शोधार्थी है।
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पेपर लीक मामले में जिस कोचिंग संचालक का नाम आया है, उसके बारे में स्पष्ट हो गया है कि वह आगरा कॉलेज का रसायन विज्ञान विषय का शोधार्थी है। अब यह भी पता किया जा रहा है कि शोधार्थी ने मुख्य परीक्षा में ड्यूटी दी थी कि नहीं। आगरा कॉलेज के प्रशासन की ओर से मुख्य परीक्षा में शोधार्थियों की भी ड्यूटी लगाई गई थी।
प्राचार्य के मुताबिक मुख्य परीक्षा में परीक्षकों की कमी होने से करीब 35 शोधार्थियों की ड्यूटी रिलीवर के तौर पर लगाई गई थी। एक शिक्षक की एक से अधिक पारियों में ड्यूटी होने पर शोधार्थी रिलीव करते थे। कोचिंग चलाने वाले शोधार्थी की ड्यूटी लगी थी या नहीं और उसने ड्यूटी दी कि नहीं, यह पता किया जा रहा है।
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बता दें डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पेपर लीक मामले में पुलिस की विवेचना में कॉलेज प्रबंधक, शिक्षक और कोचिंग संचालक सहित कई और नाम सामने आए हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम लगी है। मगर, सभी घरों से फरार हो गए हैं। कोचिंग संचालक ने छात्र-छात्राओं के व्हाट्स एप पर प्रश्नपत्र भेजा था। इसके बाद यह वायरल हो गया था।11 मई को बीएससी तृतीय वर्ष का पेपर लीक हुआ था। इस मामले में थाना लोहामंडी में मुकदमा दर्ज कराया गया। 14 मई को एक और पेपर लीक होने का मामला सामने आया। इसमें भी मुकदमा दर्ज कराया गया था।
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बनाई गई जांच समिति
कोचिंग संचालक से किन शिक्षकों के तार जुड़े हैं, कौन-कौन शिक्षक कोचिंग में जाकर पढ़ाते थे सहित अन्य जानकारियां जुटाने के लिए आगरा कॉलेज के प्राचार्य की ओर से पांच सदस्यीय आंतरिक जांच समिति बनाई गई है। इसमें कॉलेज के वरिष्ठ शिक्षकों को रखा गया है। जांच समिति को रिपोर्ट देने के लिए एक हफ्ते का समय दिया गया है। प्राचार्य डॉ. अनुराग शुक्ल ने बताया कि प्राथमिक तौर पर यह पता लग गया है कि पेपर लीक मामले में जिस कोचिंग संचालक का नाम आया है, जिसके यहां से प्रश्नपत्र परीक्षार्थियों तक पहुंचते थे, वह कॉलेज का शोधार्थी है।
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रिलीवर के तौर पर लगाई गई थी शोधार्थियों की ड्यूटी
प्राचार्य के मुताबिक मुख्य परीक्षा में परीक्षकों की कमी होने से करीब 35 शोधार्थियों की ड्यूटी रिलीवर के तौर पर लगाई गई थी। एक शिक्षक की एक से अधिक पारियों में ड्यूटी होने पर शोधार्थी रिलीव करते थे। कोचिंग चलाने वाले शोधार्थी की ड्यूटी लगी थी या नहीं और उसने ड्यूटी दी कि नहीं, यह पता किया जा रहा है।
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बता दें डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पेपर लीक मामले में पुलिस की विवेचना में कॉलेज प्रबंधक, शिक्षक और कोचिंग संचालक सहित कई और नाम सामने आए हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम लगी है। मगर, सभी घरों से फरार हो गए हैं। कोचिंग संचालक ने छात्र-छात्राओं के व्हाट्स एप पर प्रश्नपत्र भेजा था। इसके बाद यह वायरल हो गया था।11 मई को बीएससी तृतीय वर्ष का पेपर लीक हुआ था। इस मामले में थाना लोहामंडी में मुकदमा दर्ज कराया गया। 14 मई को एक और पेपर लीक होने का मामला सामने आया। इसमें भी मुकदमा दर्ज कराया गया था।